Bihar Politics: एनकाउंटर में ढेर 'रामधनी यादव' का NDA नेताओं से कनेक्शन, तेजस्वी ने तस्वीर दिखाकर खोला राज, सियासी बवाल
Bihar Politics: सुबह सुबह पुलिस एनकाउंटर में ढेर हुए रामधनी यादव का एनडीए नेताओं के साथ कनेक्श सामने आया है। नेता प्रतिपक्ष तेजस्वी यादव ने तस्वीर साझा कर भाजपा पर गंभीर आरोप लगाया है।
Bihar Politics: बिहार के भागलपुर जिले के सुल्तानगंज में हुए सनसनीखेज गोलीकांड से राज्य की सियासत गरमाई हुई है। विपक्ष लगातार सरकार पर हमलावर हैं और इस घटना को जंगलराज का उदाहरण बता रहे हैं। हालांकि पुलिस एनकाउंटर में मुख्य आरोपी भी मौत हो गई है। वहीं पुलिस अन्य आरोपियों की तलाश में जुटी हुई है। इसी बीच नेता प्रतिपक्ष तेजस्वी यादव ने भापजा सरकार पर बड़ा हमला बोला है। उन्होंने तस्वीर जारी कर आरोप लगाया है कि मास्टरमाइंड बीजेपी संरक्षित गुंडा है।
तेजस्वी का भाजपा पर आरोप
तेजस्वी यादव ने ट्विट कर लिखा है कि, "भागलपुर में सरकारी अधिकारी की दिनदहाड़े हत्या करने वाला प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के गाने “मारब सिक्सर की 6 गोली छाती में” से प्रेरित सुशासनी अपराधी, बीजेपी संरक्षित गुंडा व एनडीए नेता रामधनी यादव है। यह अपराधी बीजेपी के राष्ट्रीय अध्यक्ष नितिन नवीन और कई केंद्रीय मंत्रियों का नजदीकी है। जंगलराज का बेसुरा राग अलपाने वाले लोग अब हत्यारे एनडीए नेता के बारे में क्या कहेंगे"?
तेजस्वी ने जारी किया तस्वीर
तेजस्वी ने इसके साथ ही तस्वीर भी साझा की है। एक तस्वीर में मृतक आरोपी नितिन नवीन के साथ ही तो दूसरे तस्वीर में चिराग पासवान के साथ हैं। तेजस्वी ने भाजपा सरकार पर जबरदस्त हमला बोला है। बता दें कि, भागलपुर में हुए इस कांड के मुख्य अभियुक्त रामधनी यादव की पुलिस मुठभेड़ में मौत हो गई।
तेजी से बढ़ रहा था प्रभाव
सूत्रों के अनुसार, पिछले तीन महीनों से रामधनी यादव की कमाई के सभी रास्ते घाट, सैरात और पार्किंग से होने वाली आमदनी पर रोक लग गई थी। इससे उसके आर्थिक और राजनीतिक दबदबे को बड़ा झटका लगा था। बताया जाता है कि नगर परिषद में अब कनबुच्चा यादव का प्रभाव तेजी से बढ़ रहा था, जिससे शक्ति संतुलन पूरी तरह बदल गया।
अपराध और सत्ता के गठजोड़ का अड्डा
यही नहीं, 2023 से दोनों गुटों के बीच खूनी संघर्ष पहले से ही जारी था। 24 फरवरी 2023 को रामधनी यादव पर जानलेवा हमला हुआ था और 5 नवंबर 2023 को रंजीत यादव पर भी हमला किया गया था। दोनों घटनाओं में एक-दूसरे के गिरोह पर आरोप लगे थे, जिससे रंजिश और गहरी होती चली गई। स्थानीय लोगों का कहना है कि नगर परिषद सुल्तानगंज अब अपराध और सत्ता के गठजोड़ का अड्डा बनता जा रहा था। घाट की वसूली से लेकर पार्किंग और सैरात तक हर आर्थिक स्रोत पर वर्चस्व की लड़ाई ने हालात को विस्फोटक बना दिया था।