मुख्यमंत्री सम्राट ने दानवीर भामाशाह को उनकी जयंती पर किया नमन, जानिए कौन थे भामाशाह

दानवीर भामाशाह (1547-1600) मेवाड़ के महाराणा प्रताप के परम मित्र, मंत्री और सलाहकार थे, बुधवार को उनकी जयंती पर मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी ने उन्हें नमन किया.

Danveer Bhamashah Jayanti
Danveer Bhamashah Jayanti - फोटो : news4nation

 Samrat Choudhary: राज्यपाल लेफ्टिनेंट जनरल (रिटायर्ड) सैयद अता हसनैन एवं मुख्यमंत्री  सम्राट चौधरी ने बुधवार को दानवीर भामाशाह की जयंती के अवसर पर आयोजित समारोह में पुनाईचक पार्क स्थित 'शूरवीर दानवीर भामाशाह जी' की आदमकद प्रतिमा पर पुष्पांजलि अर्पित कर नमन किया और अपनी श्रद्धांजलि दी।


इस अवसर पर उप मुख्यमंत्री विजय कुमार चौधरी, पूर्व राज्यपाल गंगा प्रसाद, भाजपा के प्रदेश अध्यक्ष सह विधायक संजय सरावगी, पूर्व मंत्री सह विधायक श्रवण कुमार, विधान पार्षद ललन सर्राफ, विधान पार्षद श्रीमती कुमुद वर्मा सहित कई अन्य राजनीतिक एवं सामाजिक कार्यकर्ताओं ने भी शूरवीर दानवीर भामा शाह की प्रतिमा पर माल्यार्पण कर उन्हें श्रद्धांजलि दी। इस अवसर पर सूचना एवं जन-सम्पर्क विभाग के कलाकारों द्वारा आरती पूजन, भजन कीर्तन, राष्ट्रीय गीत, राष्ट्र गान, बिहार गीत एवं देशभक्ति गीत के कार्यक्रम प्रस्तुत किये गये।


कौन थे दानवीर भामाशाह

दानवीर भामाशाह (1547-1600) मेवाड़ के महाराणा प्रताप के परम मित्र, मंत्री और सलाहकार थे, जिन्होंने हल्दीघाटी युद्ध के बाद अपनी पूरी संपत्ति राष्ट्र की रक्षा के लिए दान कर दी थी। उन्हें 'दानवीर शिरोमणि' के रूप में जाना जाता है, क्योंकि उनके द्वारा दिए गए अपार धन से महाराणा प्रताप ने पुन: सेना संगठित कर मुगलों से मेवाड़ को मुक्त कराया था। भामाशाह का जन्म 29 अप्रैल 1547 को राजस्थान के पाली जिले के सादड़ी गाँव में एक जैन ओसवाल परिवार में हुआ था। उनके पिता भारमल, महाराणा उदय सिंह के समय रणथंभौर के किलेदार थे।


सारी सम्पत्ति कर दी दान

जब महाराणा प्रताप के पास मुगलों के खिलाफ लड़ने के लिए धन की कमी थी, तब भामाशाह ने अपनी जीवन भर की जमा पूंजी (जिसे 25,000 सैनिकों के लिए वर्षों का खर्च माना जाता है) को महाराणा के चरणों में समर्पित कर दिया। मेवाड़ के रक्षक कहे जाने वाले भामाशाह ने अपनी सारी संपत्ति मेवाड़ की प्रजा की संपत्ति मानकर उसे राज्य के अस्तित्व को बचाने के लिए दिया, न कि व्यक्तिगत यश के लिए।