हमनशीं- अल्फाज की वह महफिल, जहाँ इश्क, तन्हाई और जिंदगी एक साथ मुस्कुराते हैं...लोग कहते हैं आवारा मेरी आवारगी देखकर, ये बेचारगी 'कौशल' तेरी फितरत ही तो है...

Ghazal Collection: जज़्बात, तजुर्बा, मोहब्बत, तन्हाई और उम्मीद एक साथ साँस लेने लगें, तब जन्म लेती है एक ऐसी किताब, जिसका नाम है-हमनशीं।

Hamnasheen Book Review Where Love Solitude Life Smile Togeth
सब कुछ था पास मेरे, एक तेरे इश्क़ के सिवा...- फोटो : Hiresh Kumar

Ghazal Collection: सब कुछ था पास मेरे, एक तेरे इश्क़ के सिवा, आज हूँ बीमार-ए-इश्क़, कुछ नहीं हैं बस तन्हाइयाँ...

यही कुछ पंक्तियाँ उस एहसास की दस्तक हैं, जो दिल के बंद दरवाजों को भी खामोशी से खोल देती हैं। शब्द जब सिर्फ लिखे न जाएँ, बल्कि जिए जाएँ, तब वे साहित्य बनते हैं। और जब साहित्य में जज़्बात, तजुर्बा, मोहब्बत, तन्हाई और उम्मीद एक साथ साँस लेने लगें, तब जन्म लेती है एक ऐसी किताब, जिसका नाम है-हमनशीं।

अब तक आनंद कौशल को लोग एक प्रखर पत्रकार, कुशल मीडिया रणनीतिकार और बिहार सरकार के मीडिया विशेषज्ञ के रूप में जानते रहे हैं। समाचारों की आपाधापी, सत्ता और समाज के बीच संवाद की कठिन ज़िम्मेदारियों तथा पेशेवर जीवन की कंटकाकीर्ण जमीन पर चलते हुए भी उन्होंने अपने भीतर के संवेदनशील इंसान और कवि को कभी मरने नहीं दिया। यही वजह है कि हमनशीं उनके व्यक्तित्व का वह रूहानी चेहरा सामने लाती है, जो अब तक अल्फ़ाज की चादर में खामोश था।

यह केवल गजलों और शायरियों का संग्रह नहीं, बल्कि एहसासों का ऐसा कारवाँ है, जहाँ हर शेर किसी बिछड़े रिश्ते की दस्तक है, हर गजल किसी अधूरी मोहब्बत की दास्तान है और हर पन्ना ज़िंदगी की किसी अनकही कहानी का आईना बन जाता है।

लोग कहते हैं आवारा मेरी आवारगी देखकर, ये बेचारगी 'कौशल' तेरी फ़ितरत ही तो है...

ऐसे शेर केवल लिखे नहीं जाते, बल्कि बरसों की तन्हाई, रिश्तों की तपिश, मोहब्बत की कसक और जीवन के गहरे तजुर्बों से जन्म लेते हैं। हमनशीं की सबसे बड़ी ख़ूबी यही है कि इसमें बनावटी अल्फ़ाज नहीं, बल्कि दिल की सच्ची आवाज सुनाई देती है। यह किताब पाठक को केवल पढ़ने के लिए नहीं, बल्कि महसूस करने के लिए आमंत्रित करती है।

आज जब दुनिया तेज़ रफ़्तार में भाग रही है, शब्दों का शोर बहुत है लेकिन जज़्बात कम होते जा रहे हैं, ऐसे दौर में हमनशीं ठहरकर अपने भीतर झाँकने का अवसर देती है। यह किताब याद दिलाती है कि मोहब्बत अभी ज़िंदा है, रिश्तों में अभी भी गर्माहट बाकी है और इंसान के भीतर संवेदनाओं का समंदर अब भी लहरें मारता है।

किताबें हमेशा से इंसान की सबसे सच्ची हमसफ़र रही हैं। वे बिना किसी स्वार्थ के राह दिखाती हैं, मुश्किल वक़्त में हौसला देती हैं और अकेलेपन में दोस्त बन जाती हैं। एक अच्छी किताब सिर्फ़ ज्ञान नहीं देती, बल्कि सोचने का नया नज़रिया, जीने का नया हौसला और महसूस करने की नई वजह भी देती है। हमनशीं"भी ऐसी ही एक किताब है, जो पाठक के भीतर एक नई दुनिया आबाद करती है। WJAI के राष्ट्रीय अध्यक्ष आनंद कौशल की यह पहली गजल और शायरी संग्रह उनके साहित्यिक व्यक्तित्व की प्रभावशाली दस्तक है। यह उन लोगों के लिए एक अनमोल तोहफ़ा है, जो शब्दों में सिर्फ़ तुकबंदी नहीं, बल्कि ज़िंदगी की धड़कन तलाशते हैं।

हमनशीं पढ़िए, उसके अल्फ़ाज़ों में अपना अक्स तलाशिए और उस सफर का हिस्सा बनिए, जहाँ हर गजल दिल से निकलकर सीधे रूह तक पहुँचती है। यह किताब केवल पुस्तकालय की शोभा बढ़ाने के लिए नहीं, बल्कि दिलों में हमेशा के लिए जगह बनाने आई है। आनंद कौशल को इस साहित्यिक उपलब्धि के लिए हार्दिक बधाई और हर साहित्य प्रेमी से बस एक गुज़ारिश हमनशीं को ज़रूर पढ़िए, क्योंकि कुछ किताबें पढ़ी नहीं जातीं, उम्र भर महसूस की जाती हैं।

हीरेश कुमार की रिपोर्ट