Bihar Flood: कटिहार में बाढ़ का कहर, नदी पार करते 17 वर्षीय विवेक की डूबकर मौत, 3.43 लाख लोग प्रभावित
Bihar Flood: कटिहार में लगातार बारिश के बीच नदियों का जलस्तर बढ़ने से बाढ़ का संकट गहराता जा रहा है। ...
Bihar Flood: कटिहार में लगातार बारिश के बीच नदियों का जलस्तर बढ़ने से बाढ़ का संकट गहराता जा रहा है। एक तरफ कुदरा थाना क्षेत्र में नदी पार करने के दौरान 17 वर्षीय युवक की डूबने से मौत हो गई, वहीं दूसरी ओर जिले के कई प्रखंडों में बाढ़ का पानी घरों, सड़कों और सरकारी भवनों तक पहुंच गया है। हालात ऐसे हैं कि हजारों परिवार सुरक्षित ठिकाने की तलाश में भटकने को मजबूर हैं।
कुदरा थाना क्षेत्र के रामपुर गांव में नदी पार करने के दौरान हुए हादसे में 17 वर्षीय विवेक कुमार की डूबने से मौत हो गई। बताया गया कि रामपुर निवासी विनोद साह का पुत्र विवेक कुमार और राम एकबाल का पुत्र गोलू कुदरा बाजार से खरीदारी कर घर लौट रहे थे। कुदरा से रामपुर जाने वाले रास्ते में श्रमदान से बनी पुलिया पार करते समय दोनों अचानक गहरे पानी में चले गए।
हादसे के बाद ग्रामीणों ने तत्काल बचाव अभियान शुरू किया। काफी मशक्कत के बाद विवेक का शव बरामद किया गया, जबकि गोलू को ग्रामीणों ने सुरक्षित बाहर निकाल लिया। उसे इलाज के लिए अस्पताल में भर्ती कराया गया है। घटना के बाद रामपुर गांव में मातम पसरा हुआ है और परिजनों का रो-रोकर बुरा हाल है।
ग्रामीणों का कहना है कि दुर्गावती और कर्मनाशा नदी का जलस्तर लगातार बढ़ा हुआ है। उनका आरोप है कि पुलिया के पास लाल कपड़े से घेराव या बांस-बल्ला लगाकर रास्ता बंद कर दिया जाता तो शायद हादसा टाला जा सकता था। इस घटना के बाद प्रशासन की तैयारियों और सुरक्षा इंतजामों पर सवाल उठने लगे हैं। परिजनों ने सरकार से मुआवजे की मांग की है।
इधर, कटिहार जिले में गंगा, कोसी, बरांडी और कारी कोसी नदियों के बढ़ते जलस्तर ने भी बड़ी आबादी को प्रभावित किया है। उपलब्ध प्रशासनिक आंकड़ों के अनुसार कुर्सेला, बरारी, अमदाबाद और मनिहारी प्रखंडों की कुल 35 ग्राम पंचायतों के 236 गांव और तीन नगर पंचायतों के 10 वार्ड बाढ़ की चपेट में हैं। इससे करीब 3 लाख 43 हजार 180 आबादी प्रभावित बताई जा रही है।
मनिहारी प्रखंड के दक्षिणी कांटाकोश में हालात बेहद चिंताजनक हैं। कई घरों में बाढ़ का पानी घुस चुका है। मजबूर होकर लोग ऊंचे स्थानों और कांटाकोश रेलवे स्टेशन के आसपास पटरियों के किनारे शरण ले रहे हैं। रेलवे ट्रैक के किनारे रहना भी लोगों के लिए जानलेवा जोखिम बना हुआ है।
दक्षिणी कांटाकोश के पंचायत भवन, सरकारी विद्यालय और कई सड़कों पर पानी भर गया है। मुख्य सड़क पर पानी बहने के कारण जिला मुख्यालय और प्रखंड मुख्यालय से ग्रामीणों का संपर्क प्रभावित हुआ है। कई परिवार घर की छतों पर दिन गुजार रहे हैं, जबकि पशुपालक अपने मवेशियों को सुरक्षित और सूखे स्थानों तक पहुंचाने में जुटे हैं।
बाढ़ पीड़ित सरस्वती देवी का कहना है कि करीब 15 दिन पहले उनके घर में पानी घुस गया था, लेकिन अब तक कोई सुध लेने नहीं पहुंचा। घर में रखा भोजन और जरूरी सामान खत्म हो चुका है और परिवार रेलवे पटरी के किनारे रहने को मजबूर है।वहीं शंभू चौधरी ने मवेशियों के चारे को लेकर चिंता जताई। उनका कहना है कि इंसान किसी तरह सूखा-रूखा खाकर रह सकता है, लेकिन बाढ़ के बीच मवेशियों के लिए चारे का इंतजाम करना सबसे बड़ी चुनौती बन गया है।
पूर्व प्रमुख मिलन कुमार यादव ने बाढ़ प्रभावित लोगों के लिए सरकारी राहत और सामुदायिक रसोई शुरू करने की मांग की है। उनका कहना है कि मुख्य सड़क पर पानी बहने से गांव का संपर्क टूट गया है और लोगों को तत्काल भोजन, पेयजल तथा अन्य जरूरी सुविधाओं की आवश्यकता है।पीड़ित बनारसी यादव ने भी प्रशासन से राहत पहुंचाने की अपील की है। बाढ़ प्रभावित लोगों ने मेडिकल कैंप और स्वास्थ्य सुविधाएं उपलब्ध कराने की मांग की है, ताकि पानी के बीच बीमारी फैलने की स्थिति में तत्काल इलाज मिल सके।
फिलहाल कटिहार में बाढ़ का संकट गंभीर बना हुआ है। एक ओर नदी का बढ़ता जलस्तर लोगों की जिंदगी पर भारी पड़ रहा है, तो दूसरी ओर राहत और बचाव व्यवस्था को लेकर ग्रामीणों की शिकायतें सामने आ रही हैं। अब प्रशासन के सामने चुनौती बाढ़ प्रभावित परिवारों को सुरक्षित स्थान, भोजन, पेयजल, पशु चारा और चिकित्सा सुविधा उपलब्ध कराने की है।
रिपोर्ट- श्याम कुमार सिंह