UP News : बुर्के में कांवड़ लाने वाली तमन्ना मलिक और पति पर प्रशासनिक शिकंजा, एसडीएम ने 20-20 हजार के मुचलके पर किया पाबंद
UP News : बुर्का पहनकर कांवड़ लाने का ऐलान करने वाली तमन्ना मलिक और उनके पति अमन त्यागी के खिलाफ स्थानीय प्रशासन ने एहतियाती कार्रवाई की है।
UP News : उत्तर प्रदेश के संभल में महाशिवरात्रि के अवसर पर बुर्का पहनकर कांवड़ लाने का ऐलान करने वाली तमन्ना मलिक और उनके पति अमन त्यागी के खिलाफ स्थानीय प्रशासन ने एहतियाती कार्रवाई की है। पुलिस रिपोर्ट के आधार पर शांति एवं कानून-व्यवस्था प्रभावित होने की आशंका को देखते हुए उपजिलाधिकारी (एसडीएम) न्यायालय ने दोनों को कारण बताओ नोटिस जारी कर 20-20 हजार रुपये के निजी मुचलके पर पाबंद कर दिया है। गौरतलब है कि तमन्ना मलिक ने बीते फरवरी महीने में शिवरात्रि पर बुर्का पहनकर हरिद्वार से लाई गई कांवड़ से संभल के नैमिषारण्य तीर्थ पर जलाभिषेक किया था।
प्रशासनिक कार्रवाई के बाद तमन्ना मलिक के पति अमन त्यागी ने एसडीएम कार्यालय पहुँचकर इस नोटिस पर कड़ा विरोध दर्ज कराया। उन्होंने कहा कि पहले पुलिस और अब प्रशासन की ओर से नोटिस मिलना दुर्भाग्यपूर्ण है। अमन त्यागी ने सवाल उठाया कि शांतिपूर्ण तरीके से हरिद्वार से कांवड़ लाने में प्रशासन को क्या आपत्ति हो सकती है, जबकि ऐसी स्थिति में सुरक्षा और सहयोग मिलना चाहिए था। उन्होंने आरोप लगाया कि नोटिस में उनकी पत्नी के पहनावे पर भी सवाल खड़े किए गए हैं, जो कि पूरी तरह से व्यक्तिगत निर्णय है और इसे विवाद का विषय नहीं बनाया जाना चाहिए।
अमन त्यागी ने स्पष्ट किया कि यदि उनकी पत्नी बुर्का पहनकर कांवड़ यात्रा करती हैं तो इससे किसी की भावनाएं आहत नहीं होनी चाहिए। उन्होंने याद दिलाया कि पिछले वर्ष भी तमन्ना मलिक ने बुर्का पहनकर हरिद्वार से कांवड़ यात्रा पूरी की थी और संभल पहुँचकर बालयोगी दीनानाथ के सानिध्य में गंगाजल शिवालय में अर्पित किया गया था। इसके बावजूद इस बार यात्रा शुरू होने से पहले ही प्रशासन ने भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता (BNSS) की निवारक धाराओं के तहत यह कड़ा कदम उठा लिया है।
मामले में संभल के उपजिलाधिकारी विकास चंद्रा ने प्रशासनिक पक्ष रखते हुए बताया कि कांवड़ यात्रा और आगामी त्योहारों के दौरान क्षेत्र में शांति, सौहार्द और कानून-व्यवस्था बनाए रखना प्रशासन की सर्वोच्च प्राथमिकता है। उन्होंने कहा कि स्थानीय पुलिस की रिपोर्ट और सुरक्षात्मक पहलुओं को ध्यान में रखते हुए ही दोनों व्यक्तियों के विरुद्ध 20-20 हजार रुपये के मुचलके पर पाबंदी की वैधानिक प्रक्रिया पूरी की गई है। इस प्रशासनिक कार्रवाई के बाद जिले में यह मुद्दा एक बार फिर गरमा गया है। एक तरफ जहां पुलिस और प्रशासन कानून-व्यवस्था की स्थिति बिगड़ने से रोकने के लिए इसे आवश्यक कदम बता रहा है, वहीं दूसरी तरफ पीड़ित पक्ष इसे व्यक्तिगत आस्था और धार्मिक स्वतंत्रता पर अनुचित प्रतिबंध करार दे रहा है।