Bihar Crime: वीडियो कॉल से बनाया बंधक, 10 दिन में उड़ाए 67 लाख , साइबर पुलिस का बड़ा पर्दाफाश, पटना से बाप-बेटा गिरफ्तार

Bihar Crime: मुजफ्फरपुर में साइबर ठगों के डिजिटल अरेस्ट वाले खतरनाक खेल का भंडाफोड़ हुआ है। साइबर थाना पुलिस ने 67 लाख रुपये की हाई-प्रोफाइल ठगी का खुलासा करते हुए पटना से बाप-बेटे को दबोच लिया। ...

Muzaffarpur Video Call Trap 6 7M Extorted
डिजिटल अरेस्ट का खौफ- फोटो : reporter

Bihar Crime: मुजफ्फरपुर में साइबर ठगों के डिजिटल अरेस्ट वाले खतरनाक खेल का भंडाफोड़ हुआ है। साइबर थाना पुलिस ने 67 लाख रुपये की हाई-प्रोफाइल ठगी का खुलासा करते हुए पटना से बाप-बेटे को दबोच लिया। इस सनसनीखेज केस ने साफ कर दिया है कि अब ठग डर और दहशत को हथियार बनाकर लोगों की गाढ़ी कमाई पर डाका डाल रहे हैं। गिरफ्तार आरोपी प्रियरंजन शर्मा और उसका बेटा अनंत अभिषेक बताए जा रहे हैं, जो एनजीओ के नाम पर बैंक खाते खोलकर देशभर में ठगी का नेटवर्क चला रहे थे। इनके पास से मोबाइल, लैपटॉप, बैंक दस्तावेज और कई संदिग्ध सामान बरामद हुए हैं, जो इनके साइबर साम्राज्य की कहानी बयां करते हैं।

इस गैंग ने काजी मोहम्मदपुर के आमगोला निवासी 66 वर्षीय रिटायर्ड बैंककर्मी महेश गामी को अपना शिकार बनाया। 26 मार्च 2026 को एक वीडियो कॉल के जरिए खुद को CBI अफसर बताकर ठगों ने उन्हें डिजिटल अरेस्ट का डर दिखाया। आरोप लगाया गया कि उनके आधार कार्ड का इस्तेमाल आतंकी गतिविधियों और 5 करोड़ के मनी लॉन्ड्रिंग केस में हुआ है। इसके बाद शुरू हुआ मेंटल टॉर्चर का खेल। 10 दिनों तक लगातार व्हाट्सएप वीडियो कॉल पर उन्हें निगरानी में रखा गया। घर से बाहर निकलने और किसी से बात करने तक पर पाबंदी लगा दी गई। अलग-अलग नंबरों से वरिष्ठ अधिकारी बनकर कॉल आते रहे, जिससे पीड़ित पूरी तरह खौफ में आ गया।

ठगों ने सुप्रीम कोर्ट, RBI, CBI और ED के नाम पर फर्जी दस्तावेज भेजकर डर को और गहरा कर दिया। IPC की गंभीर धाराओं में फंसाने की धमकी दी गई। इस दबाव में आकर महेश गामी ने 4 अप्रैल को 42 लाख और 6 अप्रैल को 25 लाख रुपये अलग-अलग खातों में ट्रांसफर कर दिए। जब ठगी का एहसास हुआ, तब साइबर थाने में शिकायत दर्ज कराई गई। SSP के निर्देश पर बनी विशेष टीम ने तकनीकी जांच और बैंक ट्रेल के जरिए इस गैंग तक पहुंच बनाई और पटना से दोनों आरोपियों को गिरफ्तार कर लिया।

जांच में खुलासा हुआ कि इन खातों पर देशभर से 100 से ज्यादा शिकायतें दर्ज हैं। चेन्नई और मुंबई में भी इनके खिलाफ पहले से केस दर्ज हैं। पुलिस ने इनके पास से नकदी, पासबुक, चेकबुक, स्कैनर और अन्य उपकरण जब्त किए हैं। पुलिस ने जनता से साफ अपील की है डिजिटल अरेस्ट जैसा कोई कानूनी प्रावधान नहीं होता। अगर कोई खुद को एजेंसी बताकर डराए या पैसे मांगे, तो तुरंत सतर्क हो जाएं और नजदीकी साइबर थाने में शिकायत करें। यह मामला बता रहा है अब ठगी सिर्फ पैसे का खेल नहीं, बल्कि दिमाग और डर पर कब्जा करने की साजिश बन चुकी है।

रिपोर्ट- मणिभूषण शर्मा