राज्यकर्मी का दर्जा देने की मांग को लेकर डाटा एंट्री ऑपरेटरों ने निकाला रोषपूर्ण मार्च, सीएम और सूचना मंत्री के नाम सौंपा ज्ञापन

'बिहार राज्य डाटा एंट्री ऑपरेटर संयुक्त मोर्चा' की जिला इकाई के बैनर तले रविवार को भारी संख्या में ऑपरेटरों, प्रोग्रामरों, स्टेनोग्राफर्स और आईटी कर्मियों ने राज्यकर्मी का दर्जा देने की मांग को लेकर एक विशाल रोड मार्च निकाला....

राज्यकर्मी का दर्जा देने की मांग को लेकर डाटा एंट्री ऑपरेटरो
राज्यकर्मी का दर्जा देने की मांग को लेकर डाटा एंट्री ऑपरेटरों का प्रदर्शन- फोटो : विनय कुमार मिश्रा

Supaul : जिले में विभिन्न सरकारी कार्यालयों में कार्यरत डाटा एंट्री ऑपरेटरों और आईटी कर्मियों का असंतोष सड़क पर देखने को मिला। 'बिहार राज्य डाटा एंट्री ऑपरेटर संयुक्त मोर्चा' की जिला इकाई के बैनर तले रविवार को भारी संख्या में ऑपरेटरों, प्रोग्रामरों, स्टेनोग्राफर्स और आईटी कर्मियों ने राज्यकर्मी का दर्जा देने की मांग को लेकर एक विशाल रोड मार्च निकाला। जिला अध्यक्ष गुंजन कुमार एवं सचिव अमित कुमार सिंह के नेतृत्व में यह मार्च गांधी मैदान से शुरू होकर लोहिया नगर होते हुए निर्धारित मार्गों से गुजरा। प्रदर्शन के उपरांत संयुक्त मोर्चा के प्रतिनिधिमंडल ने मुख्यमंत्री एवं सूचना प्रावैधिकी मंत्री, बिहार सरकार के नाम ज्ञापन सौंपा।


25 वर्षों से दे रहे हैं सेवाएं, बेल्ट्रॉन कर्मियों ने उठाई स्थायी समायोजन की मांग 

इस दौरान जिला अध्यक्ष गुंजन कुमार ने मीडिया को संबोधित करते हुए बताया कि पिछले करीब 25 वर्षों से बेल्ट्रॉन के माध्यम से राज्य के विभिन्न सरकारी विभागों में लगभग 20 हजार डाटा एंट्री ऑपरेटर और अन्य कर्मी अपनी निष्ठावान सेवाएं दे रहे हैं। ये कर्मी विभागों में टंकण, लिपिकीय और आईटी से जुड़े सभी ऑनलाइन कार्यों का सुचारू रूप से निष्पादन कर रहे हैं। टंकण शाखा के कई पद समाप्तप्राय होने के बाद अब उन तमाम महत्वपूर्ण कार्यों की जिम्मेदारी भी पूरी तरह इन्हीं कर्मियों के कंधों पर है।


दक्षता परीक्षा और बिपार्ड प्रशिक्षण के बाद भी राज्यकर्मी के दर्जे से वंचित 

ज्ञापन में इस बात पर जोर दिया गया कि इन सभी कर्मियों की विधिवत दक्षता परीक्षा ली जा चुकी है तथा बिपार्ड (BIPARD) के माध्यम से इन्हें आवासीय एवं संस्थागत प्रशिक्षण भी दिया गया है, जिसके उपरांत इन्हें प्रमाण-पत्र भी प्रदान किए गए हैं। इसके बावजूद वर्षों से स्थायी प्रकृति के कार्यों का लगातार निष्पादन करने के बावजूद इन समर्पित कर्मियों को अब तक राज्यकर्मी का दर्जा नहीं मिल सका है, जिससे उनमें निराशा व्याप्त है।


अतिरिक्त वित्तीय बोझ न पड़ने का तर्क, सुप्रीम कोर्ट के आदेशों का दिया हवाला 

संयुक्त मोर्चा ने सरकार के समक्ष तर्क रखा कि वर्तमान में इन कर्मियों के मासिक पारिश्रमिक के साथ-साथ सेवा शुल्क और जीएसटी मद में भी भारी राशि का भुगतान किया जा रहा है। ऐसे में यदि इन्हें सीधा राज्यकर्मी का दर्जा दे दिया जाता है, तो सरकार पर कोई अतिरिक्त वित्तीय बोझ नहीं पड़ेगा। मोर्चा ने सर्वोच्च न्यायालय के विभिन्न ऐतिहासिक आदेशों का हवाला देते हुए लंबे समय से बाह्य सेवा प्रदाता के माध्यम से कार्यरत कर्मियों के स्थायी सेवा समायोजन की पुरजोर मांग उठाई।


मांगें पूरी न होने पर चरणबद्ध आंदोलन और हड़ताल की चेतावनी 

संयुक्त मोर्चा ने स्पष्ट शब्दों में चेतावनी दी है कि यदि सरकार ने उनकी मांगों पर शीघ्र कोई सकारात्मक निर्णय नहीं लिया, तो आने वाले दिनों में महाधरना, बांहों पर काला बिल्ला लगाकर विरोध प्रदर्शन और अनिश्चितकालीन हड़ताल जैसे चरणबद्ध आंदोलन किए जाएंगे। मोर्चा ने यह भी चेताया कि इस स्थिति में सरकारी कार्यों के बाधित होने की संपूर्ण जिम्मेदारी शासन-प्रशासन की होगी। 


इस रोषपूर्ण मार्च में जिलाध्यक्ष गुंजन कुमार, सचिव अमित कुमार सिंह, मीडिया प्रभारी चंदन कुमार सिंह, माधव कुमार, ओबेश आलम, घनश्याम कुमार, सोनू कुमार, शुभम कुमार, शशि कुमार, अमरेंद्र कुमार, ललित कुमार, दीपक कुमार, अनुज कुमार, शेखर कुमार, देव शंकर, अमन आकाश, राजू कुमार, श्वेता कुमारी, रंजन कुमारी, निक्की कुमारी और अनिल कुमार सहित बड़ी संख्या में जिलेभर के कर्मी उपस्थित रहे।


विनय कुमार मिश्रा की रिपोर्ट