Police Medal for Meritorious Service :राष्ट्रीय सुरक्षा में गूंजा सीवान के बेटे के शौर्य का नाम, सीआरपीएफ आईजी अमितेन्द्र नाथ सिन्हा को मिला उत्कृष्ट सेवा के लिए पुलिस पदक, गुवाहाटी परेड में तालियों की गूंज से थर्राया मैदान

Police Medal for Meritorious Service राष्ट्रीय सुरक्षा की सियासत में जब समर्पण, ईमानदारी और कर्तव्यनिष्ठा की बात होती है, तो कुछ नाम अपने आप सुर्खियों में आ जाते हैं। अमितेन्द्र नाथ सिन्हा उन्हीं में से एक हैं। ...

CRPF IG Amitendra Nath Sinha Honoured with President Medal
राष्ट्रीय सुरक्षा में गूंजा सीवान के बेटे सीआरपीएफ आईजी अमितेन्द्र नाथ सिन्हा के शौर्य का नाम- फोटो : Hiresh Kumar

 Police Medal for Meritorious Service:  राष्ट्रीय सुरक्षा की सियासत में जब समर्पण, ईमानदारी और कर्तव्यनिष्ठा की बात होती है, तो कुछ शख्सियतें अपने आप सुर्खियों में आ जाती हैं। ऐसा ही एक नाम है बिहार के सीवान की सरज़मीं से उठकर देश की हिफाज़त के मोर्चे पर अपनी अलग पहचान बनाने वाले अमितेन्द्र नाथ सिन्हा का। ओडिशा में पदस्थापित सीआरपीएफ के आईजी को गुवाहाटी में आयोजित भव्य परेड के दौरान Police Medal for Meritorious Service से नवाज़ा गया। यह सिर्फ एक तमगा नहीं, बल्कि राष्ट्रीय सुरक्षा के मैदान में उनकी बेदाग खिदमत, शानदार लीडरशिप और बेमिसाल पेशेवराना अंदाज की स्वीकारोक्ति है।

यह प्रतिष्ठित पदक भारत के राष्ट्रपति द्वारा गणतंत्र दिवस या स्वतंत्रता दिवस के मौके पर एलान किया जाता है और बाद में औपचारिक परेड में अदा किया जाता है। गुवाहाटी में आयोजित केंद्रीय रिजर्व पुलिस बल की शानदार परेड में जब उनका नाम पुकारा गया, तो पूरा मैदान तालियों की गूंज से थर्रा उठा। अनुशासन, शौर्य और फर्ज़निष्ठा का जो नज़ारा वहां दिखा, वह किसी जश्न-ए-वतन से कम नहीं था।

ओडिशा कैडर के आईपीएस अधिकारी के तौर पर उन्होंने अपने कार्यकाल में कई चुनौतीपूर्ण अभियानों का सफल नेतृत्व किया है। नक्सल प्रभावित इलाकों में सुरक्षा प्रबंधन से लेकर आंतरिक सुरक्षा के नाजुक मसलों तक, हर मोर्चे पर उनकी रणनीतिक सोच और सख्त लेकिन इंसाफपसंद कार्यशैली ने उन्हें अलग मुकाम दिया है। उनकी साफ-सुथरी छवि और बेदाग सेवा रिकॉर्ड ने उन्हें महज एक अफसर नहीं, बल्कि बल के भीतर भरोसे और एतबार की मिसाल बना दिया है।

मूल रूप से बिहार के सीवान जिले के बंगरा गांव के निवासी सिन्हा ऐसे परिवार से आते हैं, जिसकी जड़ें आज़ादी की लड़ाई से जुड़ी रही हैं। बंगरा गांव को स्वतंत्रता सेनानियों का गांव कहा जाता है। वे दिवंगत स्वतंत्रता सेनानी रामलखन सिंह के वंशज हैं। उनके पिता डॉ. यतीन्द्र नाथ सिन्हा एक प्रतिष्ठित होम्योपैथिक चिकित्सक और Homeopathic Medical Association of India के राष्ट्रीय उपाध्यक्ष रह चुके हैं, जबकि उनकी माता बच्ची देवी सेवानिवृत्त शिक्षिका हैं। उनके भाई समीतेंद्र नाथ सिन्हा एक आर्किटेक्ट इंजीनियर हैं।

सीआरपीएफ को देश की आंतरिक सुरक्षा की रीढ़ माना जाता है।यह सम्मान सिर्फ उनकी व्यक्तिगत उपलब्धि नहीं, बल्कि पूरे सुरक्षा बल के लिए फख्र का सबब है। यह उन जवानों के लिए भी पैगाम है जो सीमाओं और संवेदनशील इलाकों में दिन-रात डटे रहते हैं कि ईमानदारी और कर्तव्यपरायणता कभी राईगां (व्यर्थ) नहीं जाती। राष्ट्रीय सुरक्षा की सियासत में ऐसे अफसर ही असल मायनों में देश की ताकत और सुकून की बुनियाद होते हैं। ऐसे में यह सम्मान न सिर्फ एक अधिकारी के करियर की बुलंदी है, बल्कि यह संदेश भी है कि देश की हिफाज़त में खड़े सिपाहियों की मेहनत और वफादारी को राष्ट्र सलाम करता है।

रिपोर्ट- हीरेश कुमार