Bihar Politics:अपराध छोड़ो या श्मशान जाओ... सीएम सम्राट का सख्त पैगाम, अफसरों को दो टूक-काम करो या घर बैठो

Bihar Politics: मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी ने अपराधियों और काम में सुस्ती बरतने वाले सरकारी अफसरों-कर्मचारियों के खिलाफ ऐसा सख्त संदेश दिया है, जिसकी चर्चा पूरे प्रदेश में हो रही है।...

CM Samrat Tough Message Quit Crime or Face the Graveyard
'अफसर काम करें या घर बैठ जाएं'- फोटो : social Media

Bihar Politics: बिहार की सियासत और नौकरशाही के गलियारों में इन दिनों एक नया तेवर दिखाई दे रहा है। मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी ने अपराधियों और काम में सुस्ती बरतने वाले सरकारी अफसरों-कर्मचारियों के खिलाफ ऐसा सख्त संदेश दिया है, जिसकी चर्चा पूरे प्रदेश में हो रही है। कैमूर और सीवान में आयोजित सभाओं के दौरान मुख्यमंत्री ने साफ लहजे में कहा कि बिहार के अपराधियों के सामने अब सिर्फ दो रास्ते बचे हैं या तो अपराध छोड़ दें या फिर श्मशान का रास्ता पकड़ें।

मुख्यमंत्री ने अपराध पर जीरो टॉलरेंस की नीति का इजहार करते हुए कहा कि अब अपराधियों के लिए पड़ोसी राज्यों में भी पनाह आसान नहीं होगी। उन्होंने तंजिया अंदाज में कहा कि उत्तर प्रदेश में बाबा योगी आदित्यनाथ की सरकार है और पश्चिम बंगाल में शुभेंदु अधिकारी जैसे मजबूत विपक्षी चेहरे अपराधियों के खिलाफ मुखर हैं। ऐसे में अपराधियों को बचने के लिए नेपाल की राह देखनी पड़ सकती है।

लेकिन मुख्यमंत्री का निशाना सिर्फ अपराधी नहीं थे। उन्होंने सरकारी मशीनरी को भी चेतावनी देते हुए कहा कि "काम कीजिए या घर बैठिए।" दरअसल, मुख्यमंत्री कार्यालय द्वारा संचालित सहयोग शिविर में आने वाले आवेदनों के निपटारे में लापरवाही बरतने वाले अधिकारियों पर सरकार ने सख्त कार्रवाई शुरू कर दी है। आंकड़ों के मुताबिक 8942 अधिकारियों को पहली, 153 को दूसरी और एक अधिकारी को तीसरी नोटिस जारी की गई है।

सरकार ने जवाबदेही का नया मॉडल लागू किया है। आवेदन मिलने के 10 दिन तक कार्रवाई नहीं होने पर 11वें दिन पहली, 21वें दिन दूसरी और 26वें दिन तीसरी नोटिस जारी होगी। यदि 30 दिनों के भीतर मामला नहीं निपटाया गया तो 31वें दिन संबंधित अधिकारी स्वतः निलंबित माना जाएगा। यह व्यवस्था प्रशासनिक सुस्ती पर सीधा प्रहार मानी जा रही है।

मुख्यमंत्री ने बताया कि सहयोग शिविरों में अब तक 3 लाख से अधिक आवेदन प्राप्त हुए हैं, जिनमें लगभग 90 प्रतिशत मामलों का निष्पादन किया जा चुका है। उन्होंने इसे जवाबदेह शासन की मिसाल बताया। साथ ही बिहार की आर्थिक प्रगति का हवाला देते हुए कहा कि राज्य अब वित्तीय मजबूती की दिशा में तेजी से आगे बढ़ रहा है और वर्ष 2030 तक एक करोड़ युवाओं को नौकरी और रोजगार उपलब्ध कराने का लक्ष्य रखा गया है।

महज 60 दिनों के कार्यकाल में ताबड़तोड़ फैसलों और सख्त प्रशासनिक संदेशों के जरिए सम्राट चौधरी ने यह संकेत दे दिया है कि उनकी राजनीति केवल घोषणाओं तक सीमित नहीं रहने वाली। उनका संदेश साफ है न अपराध को बख्शा जाएगा, न कामचोरी को। सत्ता अब परिणाम चाहती है, बहाने नहीं।