Bihar News: बिहार में ज्यादा बच्चे होने से वार्ड पार्षद की छीनी कुर्सी, चुनाव आयोग ने किया सख्त कार्रवाई, जानिए पूरी खबर

Bihar News: बिहार में ज्यादा बच्चे होने के कारण वार्ड पार्षद की कुर्सी छीन गई। चुनाव आयोग ने कार्रवाई करते हुए वार्ड पार्षद को आयोग्य घोषित कर दिया है। इस सख्त कार्रवाई से हड़कंप मचा हुआ है।

चुनाव आयोग
वार्ड पार्षद से छीनी कुर्सी - फोटो : social media

Bihar News: बिहार में एक बड़ा मामला सामने आया है। जहां निर्वाचन आयोग ने वार्ड पार्षद की सदस्यता इसलिए रद्द कर दी है क्योंकि उनके ज्यादा बच्चे हैं। यह कार्रवाई निर्वाचन आयोग के द्वारा किया गया है। जानकारी अनुसार वार्ड पार्षद ने अपने हलफनामे में गलत जानकारी दी थी जब भेद खुला तो चुनाव आयोग ने सख्त कार्रवाई की। जानकारी अनुसार वार्ड पार्षद नालंदा के हैं।

चुनाव आयोग ने किया आयोग्य घोषित 

दरअसल, नालंदा जिले के हरनौत नगर पंचायत के वार्ड-19 के पार्षद अशोक कुमार को राज्य निर्वाचन आयोग ने अयोग्य घोषित कर दिया है। इसके साथ ही उन्हें पद से भी हटा दिया गया है। यह कार्रवाई अधिक संतान होने और गलत हलफनामा दाखिल करने के आरोप में की गई है। आयोग के अनुसार, पार्षद के पांच बच्चे हैं, जिनमें से दो का जन्म वर्ष 2008 के बाद हुआ है। बिहार नगरपालिका अधिनियम-2007 के अनुसार 4 अप्रैल 2008 के बाद दो से अधिक जीवित संतान होने पर व्यक्ति चुनाव लड़ने के योग्य नहीं होता। इसके बावजूद उन्होंने तथ्यों को छिपाकर चुनाव लड़ा।

हलफनामे में दी गलत जानकारी 

इस मामले में पकंज कुमार ने शिकायत दर्ज कराई थी। सुनवाई के दौरान प्रस्तुत साक्ष्यों में यह सामने आया कि पार्षद ने जाति आधारित सर्वेक्षण फॉर्म में भी अपनी पांच संतानों का उल्लेख किया था। निर्वाचन आयोग ने अपने आदेश में कहा कि गलत शपथ पत्र देकर आयोग को गुमराह किया गया है। साथ ही जिला प्रशासन को निर्देश दिया गया है कि संबंधित पार्षद के खिलाफ धोखाधड़ी और गलत हलफनामा देने के मामले में कानूनी कार्रवाई की जाए। इस कार्रवाई के बाद वार्ड-19 की सीट खाली हो गई है। आयोग ने निर्देश दिया है कि नियमानुसार इस सीट पर जल्द ही पुनः चुनाव की प्रक्रिया शुरू की जाए।

पहले भी हो चुकी है कार्रवाई

गौरतलब है कि इससे पहले पटना के मनेर नगर परिषद की वार्ड पार्षद गायत्री देवी की सदस्यता भी इसी तरह के मामले में रद्द की जा चुकी है। निर्वाचन आयोग की इस सख्त कार्रवाई से साफ संकेत मिला है कि चुनाव में गलत जानकारी देने और नियमों के उल्लंघन पर किसी भी जनप्रतिनिधि को बख्शा नहीं जाएगा।