Patna Zila Parishad: सुप्रीम कोर्ट के हुक्म से पलटा सियासी पासा, 25 महीने बाद फिर कुर्सी पर लौटीं कुमारी स्तुति, विरोधियों की सियासत को लगा करारा झटका
Patna Zila Parishad: करीब 25 महीने बाद कुमारी स्तुति ने एक बार फिर जिला परिषद अध्यक्ष की कुर्सी संभाल ली।
Patna Zila Parishad: पटना जिला परिषद की सियासत में ऐसा ड्रामा देखने को मिला, जिसने पूरे सियासी माहौल को गरमा दिया। करीब 25 महीने बाद कुमारी स्तुति ने एक बार फिर जिला परिषद अध्यक्ष की कुर्सी संभाल ली। जिस अविश्वास प्रस्ताव के जरिए उन्हें फरवरी 2024 में सत्ता की कुर्सी से बेदखल किया गया था, वही प्रस्ताव अब कानूनी दांव-पेच में उलझकर बेमानी साबित हो गया और उनकी वापसी का रास्ता साफ हो गया।
दरअसल, सुप्रीम कोर्ट के निर्देश के बाद जिला परिषद की एक विशेष बैठक बुलाई गई थी। यह बैठक जिलाधिकारी डॉ. चंद्रशेखर सिंह की सदारत में दोपहर 12 बजे शुरू हुई। दिलचस्प बात यह रही कि बैठक में अध्यक्ष कुमारी स्तुति तो मौजूद रहीं, लेकिन परिषद के बाकी सदस्य नदारद रहे। कुल 44 सदस्यों वाली परिषद में से एक भी सदस्य के नहीं पहुंचने से सियासी गलियारों में तरह-तरह की चर्चाएं शुरू हो गईं।
करीब एक घंटे तक इंतजार करने के बाद प्रशासन ने यह साफ कर दिया कि आवश्यक संख्या पूरी नहीं होने के कारण अविश्वास प्रस्ताव अब प्रभावहीन माना जाएगा। इसके साथ ही कुमारी स्तुति की दोबारा अध्यक्ष पद पर वापसी की आधिकारिक घोषणा कर दी गई।
बता दें कि 10 फरवरी 2024 को अविश्वास प्रस्ताव के जरिए कुमारी स्तुति को अध्यक्ष पद से हटा दिया गया था। उस वक्त हुई वोटिंग में 22 सदस्य मौजूद थे, जिनमें से 19 ने अविश्वास प्रस्ताव के पक्ष में मतदान किया था। हालांकि इस पूरी प्रक्रिया को लेकर कानूनी सवाल खड़े हुए और मामला आखिरकार सुप्रीम कोर्ट तक पहुंच गया।
सुप्रीम कोर्ट ने अपने अंतरिम आदेश में साफ कहा कि अविश्वास प्रस्ताव तभी वैध माना जाएगा, जब कुल निर्वाचित सदस्यों में से कम से कम दो-तिहाई सदस्य बैठक में मौजूद हों। पटना जिला परिषद में कुल 45 सदस्य हैं, ऐसे में आवश्यक संख्या पूरी नहीं होने के कारण पहले की कार्रवाई पर कानूनी सवाल खड़े हो गए।
कुर्सी संभालने के बाद कुमारी स्तुति ने इसे “इंसाफ और सच्चाई की जीत” बताया। उन्होंने कहा कि उन्हें साजिश के तहत पद से हटाया गया था, लेकिन अब वे बचे हुए कार्यकाल में विकास कार्यों को रफ्तार देने पर ध्यान देंगी।
वहीं दूसरी तरफ पूर्व अध्यक्ष अंजू देवी ने पूरे घटनाक्रम पर एतराज जताते हुए कहा कि सुप्रीम कोर्ट के आदेश की गलत तशरीह की गई है। उन्होंने साफ किया कि वे इस मसले को लेकर फिर अदालत का दरवाजा खटखटाएंगी। ऐसे में पटना जिला परिषद की सियासत में अभी और कानूनी व सियासी घमासान देखने को मिल सकता है।
रिपोर्ट- कमलेश कुमार सिंह