Bihar Politics:सम्राट बने बिहार के नए चौधरी, आखिर क्यों BJP ने नहीं खेला सरप्राइज कार्ड? जानिए अंदर की कहानी
Bihar Politics:बिहार की सियासी बिसात पर आज एक बड़ा मोड़ आ गया है, जहां सम्राट चौधरी को सत्ता की चाभी सौंपते हुए भारतीय जनता पार्टी ने उन्हें मुख्यमंत्री की कुर्सी सौंप दी है।
Bihar Politics:बिहार की सियासी बिसात पर आज एक बड़ा मोड़ आ गया है, जहां सम्राट चौधरी को सत्ता की चाभी सौंपते हुए भारतीय जनता पार्टी ने उन्हें मुख्यमंत्री की कुर्सी सौंप दी है। विधायक दल की बैठक में उनके नाम पर जो मुहर लगी, उसने तमाम अटकलों और कयासों पर विराम लगा दिया। अब सम्राट, बिहार के चौधरी बन चुके हैं।
दिलचस्प बात यह रही कि इस बार सियासत में कोई सरप्राइज कार्ड नहीं खेला गया। आमतौर पर बीजेपी अपने फैसलों को आखिरी वक्त तक राज में रखती है, लेकिन इस बार हालात कुछ अलग थे। नीतीश कुमार जब राज्यसभा की राह पर बढ़े और बिहार के सियासी मंच से धीरे-धीरे किनारा करने लगे, तभी से उनके इशारे साफ होने लगे थे। अपने दौरों के दौरान उन्होंने कई बार सम्राट का नाम लेकर या उनकी पीठ थपथपाकर यह पैगाम दे दिया था कि अगला वारिस कौन होगा।सियासी गलियारों में बैठे पंडित इन इशारों को पहले महज एक सियासी चाल समझ रहे थे। उन्हें यकीन था कि बीजेपी मध्य प्रदेश या राजस्थान की तरह कोई बड़ा और चौंकाने वाला फैसला ले सकती है। लेकिन इस बार पार्टी ने रिस्क लेने के बजाय संतुलन साधने की राह चुनी। जनता दल यूनाइटेड और एनडीए के भीतर तालमेल बनाए रखना इसकी बड़ी वजह मानी जा रही है।
सूत्रों की मानें तो जैसे ही नीतीश कुमार के राज्यसभा जाने की तस्वीर साफ हुई, एनडीए के तमाम घटकों ने यह सुर छेड़ना शुरू कर दिया कि अगली सरकार उन्हीं के मार्गदर्शन में चलेगी। इस पूरे सियासी समीकरण में सम्राट चौधरी एक कंसेंसस कैंडिडेट बनकर उभरे।
बीजेपी के लिए यह फैसला सिर्फ नेतृत्व परिवर्तन नहीं, बल्कि एक सियासी रणनीति भी है। पार्टी किसी भी सूरत में नीतीश कुमार को नाराज़ करने का जोखिम नहीं उठाना चाहती थी। दरअसल, जेडीयू के अंदर एक तबका ऐसा भी था, जो नीतीश के दिल्ली जाने को बीजेपी की साज़िश के तौर पर देख रहा था। ऐसे में सम्राट को आगे कर बीजेपी ने एक तीर से कई निशाने साध दिए। इस्तीफे से पहले नीतीश कुमार का यह कहना-नई सरकार को मेरा पूरा सहयोग रहेगा भी इस सियासी पटकथा का अहम हिस्सा था। इससे यह साफ हो गया कि पर्दे के पीछे से उनका असर बरकरार रहेगा।
वहीं, विपक्ष भी इस पूरे घटनाक्रम पर पैनी नजर बनाए हुए है। तेजस्वी यादव और उनके सहयोगी लगातार यह दावा करते रहे हैं कि बिहार में सियासी उठापटक के पीछे गहरे खेल चल रहे हैं। भले ही संख्या बल उनके पक्ष में न हो, लेकिन जनता के बीच बनती धारणा ने बीजेपी को सेफ गेम खेलने पर मजबूर कर दिया। बहरहाल, बिहार की सियासत में अब नया दौर शुरू हो चुका है जहां सम्राट का राज होगा, लेकिन नीतीश की परछाईं भी साथ चलेगी