Bihar News : पटना को जलजमाव से मिलेगी मुक्ति, 956 करोड़ की लागत से दुरुस्त हुआ ड्रेनेज सिस्टम,अंतिम चरण में पहुंचा बुडको का 'कैचमेंट प्रोजेक्ट'

Bihar News : पटना को जलजमाव से मिलेगी मुक्ति, 956 करोड़ की ला

PATNA : पटना और इसके आसपास के इलाकों में रहने वालों के लिए राहत भरी खबर है। बीते चार सालों से चल रहे महत्वाकांक्षी 'कैचमेंट प्रोजेक्ट' का काम बुडको (BUIDCO) ने लगभग पूरा कर लिया है। 956.59 करोड़ रुपये की भारी-भरकम लागत से तैयार हो रही इस ड्रेनेज प्रणाली का मुख्य उद्देश्य मानसून के दौरान शहर को टापू बनने से बचाना है।

183 किलोमीटर का नेटवर्क: नगर निगम से लेकर परिषद तक राहत

बुडको के अधिकारियों के अनुसार, यह प्रोजेक्ट शहर के 183 किलोमीटर के विस्तृत दायरे में फैला हुआ है। इसमें केवल पटना नगर निगम ही नहीं, बल्कि दानापुर और फुलवारीशरीफ जैसे नगर परिषद इलाकों को भी शामिल किया गया है। जून-जुलाई में मानसून की दस्तक से पहले बुनियादी ढांचे को मजबूत किया जा रहा है ताकि भारी बारिश में भी सड़कें लबालब न हों।

9 प्रमुख इलाकों में युद्ध स्तर पर काम, 5 में फिनिशिंग टच

शहर के नौ अलग-अलग जोन में निर्माण कार्य तेजी से चल रहा है। राहत की बात यह है कि इनमें से पांच प्रमुख इलाकों में काम अपने अंतिम चरण में पहुंच चुका है। बुडको की टीम दिन-रात इस लक्ष्य के साथ जुटी है कि मानसून आने से पहले सभी बाधाओं को दूर कर लिया जाए और पंपिंग स्टेशनों से लेकर नालों के ढाल तक की तकनीकी बारीकियों को दुरुस्त कर दिया जाए।

2290 नालों का जाल: गली-मोहल्लों से निकलेगा पानी

इस प्रोजेक्ट की सबसे बड़ी खासियत इसका व्यापक नेटवर्क है। शहर के छोटे-बड़े कुल 2290 नालों को इस मुख्य कैचमेंट सिस्टम से जोड़ा जा रहा है। इससे फायदा यह होगा कि मुख्य सड़कों के साथ-साथ तंग गलियों और मोहल्लों में होने वाला जलजमाव भी खत्म हो जाएगा। ड्रेनेज लाइनों को आपस में कनेक्ट करने से पानी की निकासी की रफ्तार कई गुना बढ़ जाएगी।

2022 से शुरू हुआ सफर, इस मानसून में दिखेगा असर

बता दें कि इस मेगा प्रोजेक्ट की शुरुआत साल 2022 में हुई थी। पिछले दो-तीन सालों की चुनौतियों के बाद अब यह अपनी मंजिल के करीब है। बुडको ने स्पष्ट किया है कि इस साल मानसून से पहले काम पूरा करने का डेडलाइन निर्धारित है। वर्तमान में जो छोटे-मोटे पैच बचे हैं, उन्हें भी शीघ्र ही पूरा कर लिया जाएगा, जिससे राजधानीवासियों को सालों पुरानी जलजमाव की समस्या से स्थायी निजात मिल सकेगी।