नीतीश सरकार ने खोला खजाना: 500 से ज्यादा कैंसर और गंभीर मरीजों के इलाज हेतु ₹4.08 करोड़ मंजूर

बिहार सरकार ने मुख्यमंत्री चिकित्सा सहायता कोष से 501 मरीजों के लिए ₹4.08 करोड़ की राशि जारी की है। इसमें कैंसर और हृदय रोगियों को विशेष प्राथमिकता दी गई है।

नीतीश सरकार ने खोला खजाना: 500 से ज्यादा कैंसर और गंभीर मरीज

Patna - बिहार सरकार के "मुख्यमंत्री चिकित्सा सहायता कोष" की प्राधिकृत समिति की बैठक 11 मार्च 2026 को स्वास्थ्य विभाग में संपन्न हुई। निदेशक प्रमुख, स्वास्थ्य सेवाएँ की अध्यक्षता में हुई इस उच्च स्तरीय बैठक में कुल 626 आवेदनों पर विचार किया गया । समिति ने गहन समीक्षा के उपरांत 501 गंभीर मरीजों के इलाज हेतु कुल 4,08,34,000 रुपये (चार करोड़ आठ लाख चौतीस हजार) की अनुदान राशि को मंजूरी प्रदान की है 

कैंसर और हृदय रोगों के इलाज पर विशेष जोर

बैठक में स्वीकृत किए गए अधिकांश मामले कैंसर, हृदय रोग और गुर्दा प्रत्यारोपण जैसी गंभीर बीमारियों से संबंधित हैं । महावीर कैंसर संस्थान, आईजीआईएमएस और एम्स पटना जैसे प्रतिष्ठित संस्थानों में इलाज करा रहे सैकड़ों मरीजों को 80,000 से लेकर 1,00,000 रुपये तक की सहायता राशि दी गई है । विशेष परिस्थितियों में कुछ जटिल सर्जरी और प्रत्यारोपण के मामलों में 5 लाख रुपये तक का भी अनुदान स्वीकृत किया गया है। 

अस्पतालों के लिए जारी हुए कड़े दिशा-निर्देश

समिति ने अनुदान का लाभ देने के लिए अस्पतालों के लिए सख्त शर्तें भी निर्धारित की हैं। अब अस्पतालों को केवल उन्हीं बीमारियों के लिए अनुदान दिया जाएगा, जिनके लिए वे CGHS (Central Government Health Scheme) द्वारा मान्यता प्राप्त हैं । साथ ही, अस्पतालों को चिकित्सा प्राक्कलन (Estimate) में दवा, जांच, सर्जरी और इम्प्लांट के शुल्क का स्पष्ट रूप से अलग-अलग उल्लेख करना अनिवार्य कर दिया गया है 

पारदर्शिता हेतु उपयोगिता प्रमाण पत्र अनिवार्य

वित्तीय पारदर्शिता बनाए रखने के लिए समिति ने निर्देश दिया है कि जिन संस्थानों को पहले अनुदान दिया जा चुका है, वे जल्द से जल्द "उपयोगिता प्रमाण पत्र" (Utilization Certificate) और अप्रयुक्त राशि विभाग को लौटाएं । यदि किसी संस्थान द्वारा इसमें अनियमितता पाई जाती है या राशि समय पर नहीं लौटाई जाती है, तो उनके विरुद्ध दंडात्मक कार्रवाई की जाएगी और भविष्य के अनुदान पर रोक लगा दी जाएगी 

अपात्र श्रेणियों और डायलिसिस पर स्पष्टीकरण

बैठक में यह भी स्पष्ट किया गया कि राज्य के सभी जिला अस्पतालों और मेडिकल कॉलेजों में डायलिसिस की सुविधा पहले से ही निशुल्क उपलब्ध है, इसलिए डायलिसिस के लिए कोई अलग अनुदान नहीं दिया जाएगा । इसके अतिरिक्त, आयुष्मान भारत योजना या मुख्यमंत्री जन आरोग्य योजना से आच्छादित लाभार्थियों को इस कोष से लाभ देय नहीं होगा, ताकि सहायता का दोहराव न हो