पटना हाईकोर्ट का बड़ा फैसला: सरकारी नौकरी में गलत जानकारी देना 'गंभीर कदाचार', 'कैट' के फैसले को किया रद्द
पटना हाईकोर्ट ने 10वीं के विषय की गलत जानकारी देने वाली ग्रामीण डाक सेवक की बर्खास्तगी को सही ठहराया है। कोर्ट ने कैट के बहाली आदेश को रद्द करते हुए इसे गंभीर कदाचार माना।
Patna -: पटना हाईकोर्ट ने सरकारी नौकरियों में चयन प्रक्रिया के दौरान गलत तथ्य प्रस्तुत करने को 'गंभीर कदाचार' (Serious Misconduct) करार दिया है। जस्टिस मोहित कुमार शाह और जस्टिस आलोक कुमार पांडेय की खंडपीठ ने केंद्र सरकार की याचिका पर सुनवाई करते हुए केंद्रीय प्रशासनिक न्यायाधिकरण (कैट) के उस आदेश को रद्द कर दिया, जिसमें एक ग्रामीण डाक सेवक की सेवा बहाल करने का निर्देश दिया गया था। अदालत ने स्पष्ट किया कि गलत सूचना के आधार पर हासिल की गई नौकरी को संरक्षण नहीं दिया जा सकता।
क्या था पूरा मामला?
डाक विभाग ने 12 जुलाई, 2024 को ग्रामीण डाक सेवक के पदों के लिए विज्ञापन जारी किया था। बेगूसराय की एक महिला अभ्यर्थी ने इसके लिए आवेदन किया और अपनी शैक्षणिक योग्यता के आधार पर मेरिट सूची में स्थान पाते हुए नियुक्ति प्राप्त कर ली। हालांकि, विभाग द्वारा नियुक्ति के पश्चात जब दस्तावेजों का सत्यापन (Verification) किया गया, तो अभ्यर्थी के दावों में बड़ी विसंगति पाई गई।
हिंदी की जगह प्रमाण-पत्र में निकला संस्कृत विषय
जांच के दौरान यह तथ्य सामने आया कि अभ्यर्थी ने अपने आवेदन पत्र में 10वीं कक्षा में 'हिंदी' विषय होने की जानकारी दी थी। लेकिन, जब उनके मूल प्रमाण-पत्रों की जांच हुई, तो उसमें हिंदी के स्थान पर 'संस्कृत' विषय दर्ज था। विभाग ने इसे नियमों का स्पष्ट उल्लंघन और तथ्यों को छुपाने का मामला माना। इसी आधार पर, डाक विभाग ने कड़ा संज्ञान लेते हुए फरवरी 2025 में उक्त महिला अभ्यर्थी की सेवा समाप्त करने का आदेश जारी कर दिया।
कैट ने दी थी राहत, हाईकोर्ट ने पलटा आदेश
अपनी सेवा समाप्ति के खिलाफ अभ्यर्थी ने कैट (CAT) में याचिका दायर की थी, जहां न्यायाधिकरण ने सहानुभूति दिखाते हुए उनकी सेवा बहाल करने का निर्देश दिया था। केंद्र सरकार ने कैट के इस फैसले को हाईकोर्ट में चुनौती दी। हाईकोर्ट ने सुनवाई के दौरान पाया कि अभ्यर्थी द्वारा दी गई गलत जानकारी का सीधा असर मेरिट सूची (Merit List) पर पड़ा था। अगर सही जानकारी दी जाती, तो शायद वह चयन की पात्रता ही नहीं रखतीं।
अदालत की सख्त टिप्पणी: मेरिट से समझौता नहीं
माननीय हाईकोर्ट ने अपने निर्णय में कहा कि कैट ने मामले के मूल और वैधानिक प्रश्न को नजरअंदाज कर दिया था। अदालत ने जोर देकर कहा कि चयन प्रक्रिया में सत्यनिष्ठा (Integrity) अत्यंत आवश्यक है। गलत तथ्यों के आधार पर मेरिट लिस्ट में जगह बनाना अन्य योग्य उम्मीदवारों के साथ अन्याय है। अंततः, हाईकोर्ट ने डाक विभाग की कार्रवाई को पूरी तरह वैध मानते हुए कैट के बहाली आदेश को निरस्त कर दिया।