PATNA HIGHCOURT NEWS : पटना हाईकोर्ट ने कोर्ट परिसर में मोबाइल टावर लगाने का दिया आदेश, 2 सप्ताह बाद होगी अगली सुनवाई

PATNA HIGHCOURT NEWS : पटना हाईकोर्ट ने रजिस्ट्रार को कोर्ट में तलब किया। खंडपीठ ने रजिस्ट्रार से सीधे तौर पर यह जानना चाहा कि हाईकोर्ट परिसर को डिजिटल रूप से सुदृढ़ बनाने के लिए अब तक क्या ठोस कार्रवाइयां की गई हैं।

PATNA HIGHCOURT NEWS : पटना हाईकोर्ट ने कोर्ट परिसर में मोबा
पटना हाईकोर्ट में हाईस्पीड इंटरनेट - फोटो : SOCIAL MEDIA

PATNA : पटना हाईकोर्ट परिसर में और कोर्ट रूम  में  समयबद्ध ढंग से  उच्च गति  इन्टरनेट कनेक्टिविटी, जिसमें वाई-फाई की सुविधा शामिल हो, के उपलब्ध कराए जाने के मामलें पर सुनवाई हुई। जस्टिस राजीव रंजन प्रसाद खंडपीठ ने इस  जनहित याचिका पर सुनवाई की। सुनवाई के दौरान कोर्ट ने पटना हाईकोर्ट के रजिस्ट्रार, सीपीसी को बुलाया।कोर्ट ने जानना चाहा कि अबतक क्या कार्रवाई हुई है।

कोर्ट  ने न्यू वेल्डिंग  में इन्टरनेट सुविधा प्रदान करने हेतु मोबाइल टावर लगाने का आदेश सम्बन्धित रजिस्ट्रार को दिया।पुनः इस मामलें की सुनवाई दो सप्ताह बाद होगी। कोर्ट ने पूर्व  में इस मामलें पर  याचिकाकर्ता की शिकायत को त्वरित कार्रवाई के लिए बुनियादी ढांचागत समिति के समक्ष भेज दिया और समिति से अगली सुनवाई में विस्तृत रिपोर्ट प्रस्तुत करने का निर्देश दिया था।

अधिवक्ता ओमप्रकाश ने पटना हाईकोर्ट परिसर में  हाई स्पीड इन्टरनेट और वाई-फाई  लगाने के लिए एक जनहित याचिका दायर की थी। कोर्ट ने पटना हाईकोर्ट प्रशासन से जबावतलब करते हुए ये बताने को कहा अब तक इस मामलें पर क्या कार्रवाई हुई है। पिछली सुनवाई में कोर्ट ने याचिकाकर्ता अधिवक्ता ओम प्रकाश को बीएसएनएल और beltron को पार्टी बनाने का निर्देश दिया था। याचिकाकर्ता अधिवक्ता ओमप्रकाश का कहना था कि हाईकोर्ट परिसर  में प्रभावी  और तेजपुर गति का इन्टरनेट और वाई-फाई की सुविधा होनी चाहिए। 

उन्होने कहा था कि पटना हाईकोर्ट परिसर  में बिना किसी रूकावट  के इन्टरनेट और वाई-फाई  कनेक्टिविटी  होनी चाहिए, जिससे न्यायिक कार्य मे  बाधा उत्पन्न  नहीं  हो।अधिवक्तागण अपने न्यायिक कार्य सुचारू ढंग से कर सके। उन्होंने बताया कि पटना हाईकोर्ट के एडवोकेट्स एसोसिएशन ने अपने अधिवक्ता सदस्यों के सीमित वाई-फाई सुविधा प्रदान किया था।डिजिटल न्यायिक सेवा प्रभावी रूप से कार्य करना आवश्यक है,तभी कोर्ट में तीव्र गति और कम समय में न्याय मिल सकेगा।संविधान के मौलिक अधिकार 19 और 21 धाराएं तभी सही मायनों कार्य  कर  पाएगी। इस मामलें पर अगली सुनवाई दो  सप्ताह के बाद होगी।