Patna High Court: 11 साल तक सोते रहे, अब जागे तो राहत नहीं, 81 आयुध सिपाहियों की नियुक्ति चुनौती को हाई कोर्ट ने किया खारिज
Patna High Court: पटना हाईकोर्ट ने 81 आयुद्ध सिपाहियों की नियुक्ति को चुनौती देने वाली याचिका को रद्द कर दिया। कोर्ट ने कहा कि 11 साल तक आवेदक सोते रहे और अब दूसरे मामले में फैसला आने के बाद जगे हैं,तो ऐसे लोगों को राहत नहीं दी जा सकती।
Patna High Court: पटना हाईकोर्ट ने 81 आयुध सिपाहियों की नियुक्ति को चुनौती देने वाली याचिकाओं को खारिज करते हुए याचिकाकर्ताओं को कड़ी टिप्पणी सुनाई। कोर्ट ने कहा कि आवेदक करीब 11 वर्षों तक चुप रहे और अब दूसरे मामले में फैसला आने के बाद जागे हैं। इतनी देरी से उठाई गई चुनौती पर राहत नहीं दी जा सकती।
जस्टिस रितेश कुमार की एकलपीठ ने प्रदीप राम एवं अन्य की ओर से दायर याचिकाओं पर सुनवाई के बाद उन्हें खारिज कर दिया। मामला वर्ष 2014 में 181 आर्मरर सिपाही पदों पर हुई भर्ती से जुड़ा है। भर्ती परीक्षा में कुल 213 अभ्यर्थी शामिल हुए थे। रोस्टर के आधार पर 132 अभ्यर्थियों का चयन किया गया, जबकि 81 अभ्यर्थी रोस्टर क्लीयरेंस के कारण नियुक्ति से बाहर रह गए थे।
इसके बाद बिहार पुलिस मेन्स एसोसिएशन की आपत्ति पर तत्कालीन डीजीपी ने गृह विभाग से मार्गदर्शन मांगा। गृह विभाग ने पत्र संख्या 1550 के जरिए स्पष्ट किया कि यह सीधी नियुक्ति या प्रोन्नति नहीं है, इसलिए रोस्टर क्लीयरेंस की आवश्यकता नहीं है। इसके बाद शेष 81 अभ्यर्थियों को भी नियुक्त कर वरीयता सूची जारी कर दी गई।
याचिकाकर्ताओं का तर्क था कि हाईकोर्ट के एक अन्य मामले में आयुध सिपाही चयन में रोस्टर लागू होने की बात कही गई है और 231 अभ्यर्थियों का चयन रद्द किया गया है। इसलिए उसी सिद्धांत को उनके मामले में भी लागू किया जाना चाहिए।
वहीं राज्य सरकार ने दलील दी कि जिन 81 आयुध सिपाहियों की नौकरी पर फैसले का सीधा असर पड़ सकता है, उनमें से एक को भी मामले में पक्षकार नहीं बनाया गया है।
कोर्ट ने सुप्रीम कोर्ट के विभिन्न फैसलों का हवाला देते हुए कहा कि अत्यधिक विलंब, लैचेज और आवश्यक पक्षकारों को शामिल नहीं किए जाने के आधार पर याचिका खारिज की जा सकती है। कोर्ट ने यह भी माना कि करीब 11 वर्षों तक नियुक्ति को चुनौती नहीं देना परिस्थितियों में याचिकाकर्ताओं की सहमति के रूप में देखा जा सकता है। इस आधार पर अदालत ने सभी याचिकाओं को खारिज कर दिया।