Bihar politics: बिहार में सत्ता का नया अध्याय, सम्राट चौधरी की ताजपोशी, मुंगेर ने रचा इतिहास, तीसरी बार मिला मुख्यमंत्री

मुंगेर जिला बिहार की सत्ता में अपनी एक अनोखी पहचान दर्ज कर चुका है। दरअसल, सम्राट चौधरी की ताजपोशी के साथ मुंगेर ऐसा पहला जिला बन जाएगा, जिसने तीन बार बिहार को मुख्यमंत्री दिया है।

New political era in Bihar  Samrat Choudhary crowned CM Mung
बिहार में सत्ता का नया अध्याय- फोटो : social Media

Bihar politics: बिहार की सियासत आज एक ऐतिहासिक मोड़ पर पहुंच गई है, जहां सम्राट चौधरी मुख्यमंत्री पद की शपथ लेकर राज्य के नए नेतृत्व की बागडोर संभालने जा रहे हैं। राजधानी पटना के लोकभवन में सुबह 11 बजे होने वाला यह शपथ ग्रहण समारोह बिहार की राजनीति में एक नए युग की शुरुआत माना जा रहा है। यह पहली बार है जब भारतीय जनता पार्टी का कोई नेता सीधे मुख्यमंत्री पद की शपथ लेगा। समारोह को सीमित और सादगीपूर्ण रखा गया है, लेकिन राजनीतिक दृष्टि से इसका महत्व बेहद बड़ा माना जा रहा है।

इस पूरे राजनीतिक घटनाक्रम के बीच एक और ऐतिहासिक तथ्य सामने आया है मुंगेर जिला बिहार की सत्ता में अपनी एक अनोखी पहचान दर्ज कर चुका है। दरअसल, सम्राट चौधरी की ताजपोशी के साथ मुंगेर ऐसा पहला जिला बन जाएगा, जिसने तीन बार बिहार को मुख्यमंत्री दिया है।यह इतिहास 1937 में शुरू हुआ था जब डॉ. श्रीकृष्ण सिंह बिहार के पहले मुख्यमंत्री बने और आधुनिक बिहार की नींव रखी। बाद में 1983 से 1985 के बीच चंद्रशेखर ने मुख्यमंत्री पद संभाला, जिनका संबंध भी इसी भूगोलिक-राजनीतिक क्षेत्र से जुड़ा था।

सूत्रों के मुताबिक, इस नई सरकार में विजय कुमार सिन्हा और बिजेंद्र यादव उपमुख्यमंत्री पद की शपथ लेंगे। खास बात यह है कि पहली बार जनता दल (यूनाइटेड) (जनता दल यूनाइटेड) कोटे से दो उपमुख्यमंत्री बनाए जा रहे हैं, जिससे गठबंधन की सियासी संतुलन नीति साफ झलकती है।नई सरकार के गठन के बाद मंत्रिमंडल में 33 पद अभी खाली रहेंगे, जिनके विस्तार की संभावना आने वाले चुनावी समीकरणों और राजनीतिक परिस्थितियों पर निर्भर करेगी। चर्चा है कि आगे चलकर कैबिनेट विस्तार और बड़े राजनीतिक फैसले देखने को मिल सकते हैं।

सम्राट चौधरी का पूर्वी बिहार से गहरा जुड़ाव भी इस ताजपोशी को और खास बनाता है। वे भले ही तारापुर से विधायक हैं, लेकिन उनका राजनीतिक आधार भागलपुर, बांका और खगड़िया जैसे जिलों में मजबूत माना जाता है। उनके पिता शकुनी चौधरी भी लंबे समय तक इन क्षेत्रों की राजनीति में सक्रिय रहे हैं, जिससे परिवार की राजनीतिक पकड़ और मजबूत हुई है।शपथ ग्रहण समारोह में वीवीआईपी नेताओं की भारी मौजूदगी देखी जा रही है। इसी बीच शकुनी चौधरी भी अपने बेटे की ऐतिहासिक ताजपोशी के साक्षी बनने पहुंचे, हालांकि उन्होंने मीडिया से दूरी बनाए रखी, लेकिन चेहरे पर गर्व और खुशी साफ झलक रही थी।

आज का दिन बिहार की राजनीति में सत्ता परिवर्तन के साथ-साथ ऐतिहासिक पुनर्लेखन का दिन बन गया है। एक तरफ नई सरकार की शुरुआत, तो दूसरी तरफ पुराने राजनीतिक इतिहास का गौरव दोनों मिलकर बिहार को एक नए सियासी अध्याय में प्रवेश करा रहे हैं।