राष्ट्रीय लोक अदालत 2026: चालान निपटारे में पटना बना बिहार का नंबर-1 जिला, एक दिन में सुलझे 10 हजार से अधिक मामले
Patna : राष्ट्रीय लोक अदालत के विशेष आयोजन में शनिवार को बिहार की राजधानी पटना ने पूरे राज्य में कीर्तिमान स्थापित किया है। जिला विधिक सेवा प्राधिकार, जिला परिवहन कार्यालय और यातायात पुलिस के साझा प्रयासों से पटना चालान निष्पादन के मामले में बिहार में शीर्ष स्थान पर रहा। ज्ञान भवन में आयोजित इस मेगा कैंप में कुल 10,119 ट्रैफिक चालानों का मौके पर ही निपटारा किया गया, जिसके माध्यम से ₹58,08,800 के जुर्माने की राशि सरकारी खजाने में जमा हुई।
इस महत्वपूर्ण कार्यक्रम का उद्घाटन पटना उच्च न्यायालय के माननीय मुख्य न्यायाधीश श्री संगम कुमार साहू और माननीय न्यायाधीश मोहित कुमार साहू की गरिमामयी उपस्थिति में किया गया। इस अवसर पर प्रधान जिला एवं सत्र न्यायाधीश श्री रूपेश देव, पटना के जिला पदाधिकारी, डॉ. त्यागराजन (एएसपी) और वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक श्री कार्तिकेय शर्मा भी मौजूद रहे। अतिथियों ने इस पहल को न्यायपालिका और कार्यपालिका के बीच बेहतर समन्वय का उत्कृष्ट उदाहरण बताया, जिससे आम जनता को त्वरित राहत मिली है।
पटना में लगभग 16 लाख लंबित चालानों के भारी बोझ को कम करने के उद्देश्य से यह विशेष अभियान चलाया गया था। इसके लिए ज्ञान भवन में 25 अलग-अलग जजों की बेंच गठित की गई थी, जिन्होंने सुबह से ही मामलों की सुनवाई और निपटारा शुरू किया। इस व्यापक स्तर पर किए गए आयोजन की सफलता ने पटना को राज्य के अन्य जिलों की तुलना में पहले पायदान पर खड़ा कर दिया है। अधिकारियों ने बताया कि इस प्रक्रिया से न केवल अदालतों का बोझ कम हुआ, बल्कि नागरिकों को भी कोर्ट-कचहरी के चक्करों से मुक्ति मिली।
लोक अदालत की महत्ता पर प्रकाश डालते हुए विधिक सेवा प्राधिकार के अधिकारियों ने कहा कि यहां सुलझाए गए मामलों को सिविल कोर्ट की डिक्री के समान कानूनी मान्यता प्राप्त होती है और इसके खिलाफ कोई अपील नहीं की जा सकती। इससे पक्षकारों के समय और धन की बचत होती है। विशेष रूप से उन लोगों के लिए यह सुनहरा अवसर था, जो वर्षों से लंबित ट्रैफिक चालानों के कारण कानूनी उलझनों में फंसे थे। लोगों ने ऑनलाइन और ऑफलाइन दोनों माध्यमों से अपने चालान सेटल करवाए।
वरिष्ठ जानकारों और प्रशासनिक अधिकारियों ने पटना के इस प्रदर्शन को पूरे बिहार के लिए एक प्रेरक मॉडल बताया है। उनका मानना है कि जब पुलिस, प्रशासन और न्यायपालिका एक मंच पर आकर कार्य करती है, तो न्याय प्रक्रिया सुलभ और पारदर्शी हो जाती है। जिन लोगों के चालान अभी भी लंबित हैं, उन्हें जिला विधिक सेवा प्राधिकार या संबंधित पोर्टल के माध्यम से जल्द निपटान की सलाह दी गई है। पटना की इस सफलता के बाद अब अन्य जिलों में भी इसी तर्ज पर लंबित मामलों के निष्पादन की तैयारी की जा रही है।
धीरज पराशर की रिपोर्ट