जदयू का नाम बदलने पर बनी सहमति ! पार्टी अध्यक्ष का ऐलान नया नाम हो 'जनता दल नीतीश'
जदयू के राष्ट्रीय कार्यकारी अध्यक्ष द्वारा जदयू का नाम बदलकर जनता दल नीतीश करने के प्रस्ताव पर अब जदयू के बिहार प्रदेश अध्यक्ष उमेश कुशवाहा ने समर्थन किया है.
JDU : जदयू का नाम 'जनता दल नीतीश' करने को लेकर पार्टी में उठी मांग को जदयू प्रदेश अध्यक्ष उमेश कुशवाहा ने अपना समर्थन दिया है. उन्होंने रविवार को एक सोशल मीडिया पोस्ट के माध्यम से जदयू का नया नाम जनता दल नीतीश करने पर सहमति जताई है. दरअसल, पिछले दिनों इसी को लेकर संजय झा ने नाम बदलने के प्रस्ताव का विचार व्यक्त किया था. उन्होंने पार्टी का नाम 'जदयू-नीतीश' करने पर विचार करने की बात कही थी और अब उमेश कुशवाहा ने उनकी बातों को आगे बढ़ाते हुए इसके समर्थन में पोस्ट किया है.
नाम बदलने पर सहमत
कुशवाहा ने लिखा है - "जेडीयू मतलब नीतीश कुमार". खगड़िया में आयोजित 'फरक्का जल संधि पर नीतीश संवाद' कार्यक्रम में पार्टी के मा० राष्ट्रीय कार्यकारी अध्यक्ष श्री संजय झा जी ने पार्टी के नाम को मा० राष्ट्रीय अध्यक्ष, श्रद्धेय श्री नीतीश कुमार जी के नाम से जोड़ने को लेकर जो भावना व्यक्त की है, वह जद (यू) के प्रत्येक कार्यकर्ता के अंतर्मन की अभिव्यक्ति है। विकास पुरुष आदरणीय श्री नीतीश कुमार जी हमारी पार्टी के सर्वमान्य नेता हैं और वही हमारी सबसे बड़ी पूंजी हैं।
उन्हीं के अथक परिश्रम, संघर्ष और खून पसीने से हमारी पार्टी सींची गई है। उन्हीं के आदर्शों, सिद्धांतों और विचारधारा से प्रेरित होकर जद (यू) का एक-एक कार्यकर्ता न्याय के साथ विकास के संकल्प को आत्मसात करते हुए विकसित बिहार की परिकल्पना को साकार करने के लिए प्रतिबद्ध है।
उन्होंने आगे कहा, ऐसे में मा० राष्ट्रीय कार्यकारी अध्यक्ष जी ने पार्टी के लाखों कार्यकर्ताओं की सामूहिक भावना और अटूट आस्था को ही मुखर स्वर प्रदान किया है। श्री नीतीश कुमार जी के प्रति पार्टी के कार्यकर्ताओं की निष्ठा, श्रद्धा और विश्वास अडिग है। हम सभी मा० कार्यकारी अध्यक्ष जी की इस भावना के साथ पूरी दृढ़ता से खड़े हैं। इसमें कोई किंतु-परंतु का सवाल नहीं उठता है।
शरद यादव ने बनाई थी जदयू
जदयू का गठन 2003 में शरद यादव के नेतृत्व वाले जनता दल यूनाइटेड और समता पार्टी के विलय से हुआ था. शरद यादव 2016 तक पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष रहे, जबकि नीतीश कुमार 2016 में जदयू के राष्ट्रीय अध्यक्ष बने और 2017 में शरद यादव अलग हो गए। नीतीश ने 2020 में अध्यक्ष पद छोड़ा और आरसीपी सिंह अध्यक्ष बने. नीतीश ने 2020 में अध्यक्ष पद छोड़ा और आरसीपी सिंह अध्यक्ष बने. आरसीपी सिंह से हुए विवाद के बाद राजीव रंजन सिंह उर्फ ललन सिंह को अध्यक्ष बनाया गया था. 2023 में ललन सिंह के इस्तीफे के बाद नीतीश फिर राष्ट्रीय अध्यक्ष निर्वाचित हुए. तब से वही पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष हैं.