Bihar Politics:बैंक की नौकरी से बिहार के डिप्टी सीएम तक का सफर, नीतीश के साये से सत्ता के शिखर तक ऐसे बने विजय चौधरी पावरफुल नेता

Bihar Politics: बिहार की सियासत में जब भी सादगी, संयम और मजबूत प्रशासनिक पकड़ की बात होती है, तो एक नाम पूरे एहतराम के साथ लिया जाता है विजय कुमार चौधरी।

From banker to Bihar Deputy CM Vijay Choudhary rise to power
बैंक की नौकरी से बिहार के डिप्टी सीएम तक का सफर- फोटो : Hiresh Kumar

Bihar Politics: बिहार की सियासत में जब भी सादगी, संयम और मजबूत प्रशासनिक पकड़ की बात होती है, तो एक नाम पूरे एहतराम के साथ लिया जाता है विजय कुमार चौधरी। समस्तीपुर की धरती से उठकर आज वे उपमुख्यमंत्री पद की शपथ लेने जा रहे हैं, जो उनके लंबे और धैर्यपूर्ण राजनीतिक सफर का सबसे अहम मुकाम है। करीब दो दशकों से ज्यादा समय तक नीतीश कुमार के भरोसेमंद साथी और ‘सियासी साये’ के तौर पर काम करने वाले विजय चौधरी ने अपनी काबिलियत से यह मुकाम हासिल किया है। उनका राजनीतिक सफर न केवल संघर्ष की कहानी है, बल्कि धैर्य और निरंतरता का एक बेहतरीन उदाहरण भी है।

हालांकि, 1995 और 2000 के चुनावों में हार ने उनके सियासी सफर को झटका जरूर दिया, लेकिन उन्होंने हार नहीं मानी। 2005 में उन्होंने जनता दल (यूनाइटेड) का दामन थामा और नीतीश कुमार के साथ नई राजनीतिक पारी शुरू की। इसके बाद उन्होंने कभी पीछे मुड़कर नहीं देखा।विजय चौधरी ने जदयू में महासचिव और प्रदेश अध्यक्ष जैसे अहम पदों की जिम्मेदारी निभाई। वे 2010 से सरायरंजन विधानसभा क्षेत्र से लगातार जीतते आ रहे हैं और 2025 के चुनाव में भी उन्होंने करीब 20 हजार से ज्यादा वोटों के अंतर से जीत दर्ज कर अपनी लोकप्रियता साबित की।

8 जनवरी 1957 को एक राजनीतिक परिवार में जन्मे विजय चौधरी के पिता जगदीश प्रसाद चौधरी कांग्रेस के वरिष्ठ नेता और विधायक थे। राजनीति में आने से पहले विजय चौधरी ने स्टेट बैंक ऑफ इंडिया (SBI) में प्रोबेशनरी ऑफिसर के रूप में नौकरी की, लेकिन 1982 में पिता के अचानक निधन के बाद उन्होंने अपनी सुरक्षित नौकरी छोड़कर सियासत का रास्ता चुन लिया।1982 के उपचुनाव में दलसिंहसराय से जीत हासिल कर उन्होंने अपने राजनीतिक जीवन की शुरुआत की। शुरुआती दौर में वे कांग्रेस से जुड़े और 1985 व 1990 में विधायक बने। उस समय वे बिहार के तत्कालीन मुख्यमंत्री जगन्नाथ मिश्र के करीबी माने जाते थे और विधानसभा में उपसचेतक की भूमिका भी निभा चुके हैं।

उनकी पहचान एक ऐसे नेता की रही है, जो बिना शोर-शराबे के काम करता है। उन्होंने विधानसभा अध्यक्ष जैसे गरिमामय पद के साथ-साथ जल संसाधन, वित्त, शिक्षा, कृषि, परिवहन और ग्रामीण विकास जैसे महत्वपूर्ण विभागों को संभाला है। वर्तमान में भी वे जल संसाधन और संसदीय कार्य मंत्री के तौर पर सक्रिय हैं।अब उपमुख्यमंत्री के रूप में उनका नया रोल बिहार की सियासत में एक अहम बदलाव का संकेत है। यह न सिर्फ उनकी व्यक्तिगत उपलब्धि है, बल्कि यह भी दर्शाता है कि सियासत में धैर्य, निष्ठा और काम के दम पर भी शिखर तक पहुंचा जा सकता है।