बिहार में गरीबों के आशियाने का सपना हुआ सच: 10 वर्षों में बनकर तैयार हुए 41.56 लाख पक्के मकान, मंत्री श्रवण कुमार ने जारी किए आंकड़े
बिहार में गरीबों खासकर हासिए पर जीवन बसर करने वाले बेघरों को आवास देने में उल्लेखनीय उपसब्धि हासिल की है। वित्तीय वर्ष 2016-17 से अब तक यानी 10 वर्षों में राज्यभर के 41 लाख 56 हजार 46 लाभुकों के लिए पक्के मकान तैयार हो गए हैं...
Patna : बिहार में हाशिये पर जीवन बसर करने वाले बेघर और गरीब परिवारों को छत मुहैया कराने की दिशा में राज्य सरकार ने एक बहुत बड़ी उपलब्धि हासिल की है। ग्रामीण विकास विभाग और सूचना एवं जनसंपर्क विभाग के मंत्री श्रवण कुमार ने बताया कि वित्तीय वर्ष 2016-17 से लेकर अब तक (पिछले 10 वर्षों में) राज्यभर में 41 लाख 56 हजार 46 गरीब परिवारों के पक्के मकान पूरी तरह बनकर तैयार हो चुके हैं। इस पूरी अवधि के दौरान कुल 49 लाख 9 हजार 806 आवासों की प्रशासनिक स्वीकृति दी गई थी, जिसमें से 85 फीसदी से अधिक का निर्माण कार्य सफलतापूर्वक पूरा कर लिया गया है।
लक्ष्य और किस्तों का पूरा ब्यौरा (पिछले 10 वर्ष):
मंत्री ने बताया कि इन 10 वर्षों में कुल 49 लाख 18 हजार 99 आवास बनाने का लक्ष्य था, जिसके मुकाबले 49.09 लाख से अधिक आवास स्वीकृत हुए। पारदर्शिता और समय पर निर्माण सुनिश्चित करने के लिए राशि सीधे बैंक खातों में किस्तों के रूप में भेजी गई:
- पहली किस्त: 48 लाख 57 हजार 251 लाभुकों को मिली।
- दूसरी किस्त: 45 लाख 97 हजार 384 लाभुकों को मिली।
- तीसरी किस्त: 42 लाख 5 हजार 858 लाभुकों को ट्रांसफर की गई।
प्रधानमंत्री आवास योजना (PMAY-G) के दोनों चरणों की प्रगति
श्रवण कुमार ने कहा कि प्रधानमंत्री आवास योजना के अंतर्गत दूसरे चरण में वित्तीय वर्ष 2024-25 एवं 2025-26 के लिए प्राप्त कुल लक्ष्य 12 लाख 16 हजार 961 के विरूद्ध अब तक 12 लाख 9 हजार 258 लाभुकों को आवास की स्वीकृति दे दी गई है। इसमें 11 लाख 57 हजार 637 लाभुकों को प्रथम, 9 लाख 26 हजार 909 लाभुकों को दूसरी और 5 लाख 51 हजार 157 लाभुकों को तीसरी किस्त की राशि दी जा चुकी है। इसमें 4 लाख 93 हजार 658 लाभुकों ने आवास निर्माण पूर्ण कर लिया है। यानी इतने कम समय में कुल लक्ष्य में एक-तिहाई से अधिक आवास बनकर तैयार हो गए हैं। वहीं, इसी योजना के पहले चरण में वित्तीय वर्ष 2016-17 से 2021-22 तक आवास निर्माण के लिए निर्धारित भौतिक लक्ष्य 37 लाख 1138 के मुकाबले 37 लाख 548 लाभुकों को आवास निर्माण की स्वीकृति दी गई थी। इसमें 36 लाख 99 हजार 614 लाभुकों को पहली, 36 लाख 70 हजार 475 को दूसरी और 36 लाख 54 हजार 701 लाभुकों को तीसरी किस्त की राशि दी जा चुकी है। इसमें अब तक 36 लाख 62 हजार 388 लाभुकों ने आवास का निर्माण करा लिया है। यानी कुल लक्ष्य का 98 फीसदी से अधिक लोगों ने अपने आवास तैयार कर लिए हैं।
1.20 लाख की मिलती है सहायता, इंदिरा आवास का बदला था नाम
ग्रामीण विकास मंत्री ने योजना की पृष्ठभूमि साझा करते हुए बताया कि ग्रामीण क्षेत्रों में जो गरीब परिवार कच्चे, जर्जर मकानों में या बिना छत के रहने को मजबूर थे, उन्हें बुनियादी सुविधाओं से युक्त पक्का मकान देने के लिए वित्तीय वर्ष 2016-17 में तत्कालीन 'इंदिरा आवास योजना' को पुनर्गठित किया गया था। इसे नया नाम प्रधानमंत्री आवास योजना (ग्रामीण) दिया गया।
योजना के तहत मिलने वाली राशि
इस योजना के अंतर्गत वर्तमान में प्रति लाभुक (लाभार्थी) को पक्का मकान निर्माण के लिए 1 लाख 20 हजार रुपये की सहायता राशि सीधे सरकार की ओर से प्रदान की जाती है, जिससे सूबे के लाखों बेघरों का अपना घर होने का सपना सच हो रहा है।