Bihar Politics: मंत्री संजय सिंह पर आरोप से चिराग पासवान सख्त, बोले- दोषी हुए तो पद भी जाएगा, सजा भी होगी, किसी को संरक्षण नहीं
Bihar Politics: लोक जनशक्ति पार्टी रामविलास के राष्ट्रीय अध्यक्ष और केंद्रीय मंत्री चिराग पासवान ने बिहार सरकार के मंत्री संजय सिंह पर लगे आरोपों को लेकर सख्त रुख अख्तियार किया है।
Bihar Politics: लोक जनशक्ति पार्टी रामविलास के राष्ट्रीय अध्यक्ष और केंद्रीय मंत्री चिराग पासवान ने बिहार सरकार के मंत्री संजय सिंह पर लगे आरोपों को लेकर सख्त रुख अख्तियार किया है। उन्होंने साफ लहजे में कहा कि आरोप गंभीर हैं और पूरे मामले की निष्पक्ष जांच होनी चाहिए। चिराग के इस बयान के बाद बिहार की सियासत में हलचल तेज हो गई है।
चिराग पासवान ने कहा कि जिस तरह के आरोप मंत्री पर लगाए गए हैं, वे बेहद गंभीर मसला हैं। सरकार को चाहिए कि पूरे मामले की तह तक जाकर हकीकत सामने लाए। उन्होंने यह भी कहा कि उनकी पार्टी ने अपने स्तर से मंत्री से जवाब तलब किया है। यानी मामला अब महज आरोप-प्रत्यारोप तक सीमित नहीं रहने वाला, बल्कि जवाबदेही की कसौटी पर भी परखा जाएगा।
केंद्रीय मंत्री ने होटल प्रबंधन से भी पूरे मामले की जानकारी सामने लाने की अपील की। साथ ही उन्होंने कथित तौर पर पीड़ित युवती से भी आग्रह किया कि वह पूरे मामले को सामने लाए, ताकि सच और झूठ का फैसला जांच के जरिए हो सके।चिराग पासवान ने दो टूक कहा कि यदि जांच में मंत्री संजय सिंह या इस मामले से जुड़ा कोई भी व्यक्ति दोषी पाया जाता है तो उसे पद से मुक्त किया जाएगा। इतना ही नहीं, उन्होंने कहा कि दोषी के खिलाफ कड़ी कानूनी कार्रवाई और सजा दिलाने के लिए उनकी पार्टी पूरी मजबूती से आगे रहेगी। उनके बयान का साफ संदेश है कि परिवार हो या पार्टी, किसी भी व्यक्ति को संरक्षण नहीं मिलेगा, अगर वह कानून की नजर में दोषी पाया जाता है।
आरक्षण पर भी चिराग का दो टूक रुख
आरक्षण के मुद्दे पर भी चिराग पासवान ने स्पष्ट रुख रखा। उन्होंने कहा कि आरक्षण पर जो अधिकार है, वह कायम रहेगा। हालांकि उन्होंने ऊंचे वर्ग के लोगों की शिकायतों और मांगों पर भी सरकार से गौर करने की बात कही। चिराग ने कहा कि अगर किसी वर्ग को उसका अधिकार देना है तो किसी दूसरे के अधिकार को छीनकर ऐसा नहीं किया जा सकता।उन्होंने साफ कहा कि किसी का हक छीनकर दूसरे को हक देना वह बर्दाश्त नहीं करेंगे। उनका कहना था कि सरकार को सभी वर्गों की समस्याओं को सुनना चाहिए और उनके साथ संवाद स्थापित कर समाधान निकालना चाहिए।चिराग ने कहा कि वह अनुसूचित जाति के अधिकारों की बात करते हैं, लेकिन दूसरे वर्गों की समस्याओं को भी नजरअंदाज नहीं किया जाना चाहिए। उन्होंने सवाल उठाया कि अगर किसी वर्ग के लोगों को अपने अधिकारों की चिंता है तो उनके नेता खुलकर सामने क्यों नहीं आते और उनकी मांगों को मजबूती से क्यों नहीं उठाते।
उन्होंने कहा कि जिसे अपना हक चाहिए, उसके नेताओं को भी आवाज बुलंद करनी होगी। हालांकि, उन्होंने भरोसा दिलाया कि जरूरत पड़ने पर वह उन लोगों के अधिकारों की लड़ाई में भी साथ खड़े होंगे।चिराग ने सरकार से अपील की कि सभी पक्षों को बुलाकर उनकी बात सुनी जाए, संवाद किया जाए और उनकी समस्याओं का समाधान निकाला जाए। लेकिन अधिकारों के बंटवारे को लेकर उनका संदेश बिल्कुल साफ रहा एक के हिस्से का हक काटकर दूसरे को देना मंजूर नहीं होगा।
रिपोर्ट- नरोत्तम सिंह