बिहार परिवहन विभाग में विरोधाभास: 29 डाटा एंट्री ऑपरेटरों की प्रतिनियुक्ति,पर 26 MVI-ESI अधिकारी 2 महीने से पोस्टिंग विहीन

बिहार परिवहन विभाग का अजीबोगरीब खेल सामने आया है। आदेश पत्र 7949 के जरिए 29 डाटा एंट्री ऑपरेटरों का रातों-रात ट्रांसफर-प्रतिनियुक्ति हो जाती है, लेकिन 26 नवनियुक्त MVI और ESI अधिकारी पिछले 2 महीनों से अपनी पहली पोस्टिंग का इंतजार कर रहे हैं।

Bihar Transport Department controversy
बिहार परिवहन विभाग में अफसरों की अनदेखी से राजस्व को झटका- फोटो : news 4 nation AI

बिहार के परिवहन विभाग में इन दिनों प्रशासनिक फैसले और जमीनी जरूरतें एक-दूसरे के विपरीत दिशा में नजर आ रही हैं। विभाग द्वारा जारी हालिया आदेश पत्र संख्या 7949 के अनुसार, 3 प्रोग्रामर और कुल 29 डाटा एंट्री ऑपरेटरों की तत्काल प्रभाव से अलग-अलग जिलों तथा विभागों (जैसे पटना, समस्तीपुर, सीवान आदि) में नई प्रतिनियुक्ति कर दी गई है। इसी क्रम में राजस्व बढ़ाने के उद्देश्य से 17 सितम्बर को 10 प्रमुख जिलों में प्रवर्तन अधिकारियों की तैनाती और 25 जिलों में प्रवर्तन निरीक्षकों के पदों का जिलावार आवंटन भी किया गया। लेकिन विडंबना यह है कि जब निचले स्तर पर फेरबदल इतनी फुर्ती से हो रहे हैं, तब मुख्य फील्ड अधिकारियों की तैनाती का मामला अधर में लटका हुआ है।   

नवनियुक्त MVI और ESI: दो महीनों से बिना काम के मिल रहा वेतन

विभाग की इस उलझी हुई कार्यशैली का सबसे बड़ा उदाहरण 26 नवनियुक्त मोटर वाहन निरीक्षकों (MVI) और प्रवर्तन अवर निरीक्षकों (ESI) का मामला है। ये अधिकारी चयन प्रक्रिया की सभी औपचारिकताएं और प्रशिक्षण पूरा करने के बावजूद पिछले दो महीनों से अपनी पहली पदस्थापना (Posting) का इंतजार कर रहे हैं। विभाग में अधिकारियों की भारी कमी होने के बाद भी इन नए अधिकारियों को कोई कार्यक्षेत्र आवंटित नहीं किया गया है। सरकारी खजाने से इन्हें बिना किसी जिम्मेदारी के बिठाकर वेतन दिया जा रहा है, जिससे विभाग की मंशा और कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े होते हैं।

शीर्ष स्तर का शक्ति-संग्राम: मंत्री और सचिव के बीच खींचतान का असर

विभागीय सूत्रों के अनुसार, इस पूरे गतिरोध की मुख्य जड़ परिवहन विभाग के मंत्री और विभागीय सचिव के बीच आपसी तालमेल और सामंजस्य की भारी कमी है। दोनों शीर्ष अधिकारियों के बीच मनपसंद अधिकारियों की पोस्टिंग और नीतिगत निर्णयों की प्राथमिकताओं को लेकर खींचतान जारी है। फाइलों के आदान-प्रदान के बजाय दोनों ओर से एक-दूसरे को लगातार 'पीत-पत्र' (ऑफिशियल नोट) भेजे जा रहे हैं। शीर्ष स्तर पर जारी इस प्रशासनिक खींचतान और अहम की लड़ाई का सीधा नुकसान विभागीय कामकाज और नए अधिकारियों के करियर पर पड़ रहा है।

नियमावली को ताक पर रखा: 1.5 साल से ठप पड़े हैं ESI तबादले

विभागीय विसंगति सिर्फ नई पदस्थापनाओं तक सीमित नहीं है, बल्कि स्थानांतरण से जुड़े नियमों का भी धड़ल्ले से उल्लंघन हो रहा है। बिहार परिवहन विभाग के नियमानुसार प्रवर्तन अवर निरीक्षकों (ESI) का स्थानांतरण प्रत्येक 6 महीने में किया जाना अनिवार्य है, ताकि निष्पक्षता और पारदर्शिता बनी रहे। हालांकि, अधिकारियों की आपसी लड़ाई और शिथिलता के चलते पिछले 1.5 साल (18 महीने) से ESI तबादला प्रक्रिया पूरी तरह ठप पड़ी है। समय पर तबादला न होने से पुरानी व्यवस्था में जंग लग रहा है और नए अधिकारियों के समायोजन का रास्ता पूरी तरह बंद हो चुका है।

फील्ड मॉनिटरिंग ध्वस्त: ओवरलोडिंग और अवैध परिचालन पर नहीं लग पा रही लगाम

क्षेत्रीय (फील्ड) स्तर पर MVI और ESI अधिकारियों की भूमिका किसी भी परिवहन तंत्र की रीढ़ होती है। समय पर नई तैनाती न होने और पुराने अधिकारियों का लंबे समय से एक ही स्थान पर जमे रहने के कारण जमीनी निगरानी तंत्र बेहद कमजोर पड़ गया है। सड़कों पर बिना फिटनेस के दौड़ते वाहनों की जांच, मालवाहक गाड़ियों में ओवरलोडिंग पर लगाम, और अनधिकृत/अवैध रूप से चल रहे वाहनों को जब्त करने जैसी महत्वपूर्ण प्रशासनिक गतिविधियां सुस्त पड़ गई हैं, जिसका सीधा असर सड़क सुरक्षा और यातायात नियमों के पालन पर पड़ रहा है।

सरकारी राजस्व पर प्रतिकूल प्रभाव और मनोबल का पतन

फील्ड मॉनिटरिंग के पंगु होने का सीधा नुकसान राज्य सरकार के खजाने को हो रहा है। वाहनों की उचित जांच न होने और चालान/जुर्माना प्रक्रिया प्रभावित होने के कारण राजस्व संग्रह में भारी गिरावट दर्ज की जा रही है। वहीं दूसरी ओर, प्रशासनिक उपेक्षा का शिकार होकर बिना काम के बैठने को मजबूर नवनियुक्त अधिकारियों के मनोबल पर भी नकारात्मक असर पड़ रहा है। यदि शीर्ष स्तर पर यह विवाद जल्द न सुलझाया गया, तो राज्य की परिवहन व्यवस्था और सरकारी राजस्व दोनों को बड़ा नुकसान उठाना पड़ सकता है।