Panchayati Raj Transfer Scam: पंचायती राज विभाग में पिछले दरवाजे से बहाली की कोशिश! 3 फर्जी पंचायत सचिवों का ट्रांसफर पकड़ा गया, आदेश रद्द

Panchayati Raj Transfer Scam: बिहार के पंचायती राज विभाग में ट्रांसफर के जरिए कथित तौर पर तीन नई अवैध बहाली कराने की कोशिश का मामला सामने आया है।...

Panchayati Raj Transfer Scam

Panchayati Raj Transfer Scam: बिहार के पंचायती राज विभाग में ट्रांसफर के जरिए कथित तौर पर तीन नई अवैध बहाली कराने की कोशिश का मामला सामने आया है। दशकों पुराने तौर-तरीके को अपनाते हुए तैयार की गई ट्रांसफर सूची में ऐसे तीन लोगों के नाम शामिल कर दिए गए, जो संबंधित जिलों में पंचायत सचिव ही नहीं थे। मामला सामने आने के बाद विभाग ने कार्रवाई करते हुए तीनों के स्थानांतरण आदेश रद्द कर दिए हैं।

NEWS4NATION के कार्यकारी संपादक धीरेंद्र कुमार  ने विभाग की ट्रांसफर प्रक्रिया में कथित गड़बड़ी को प्रमुखता से उजागर किया था। इसके बाद पंचायती राज विभाग के निदेशक नवीन कुमार सिंह ने शुद्धि पत्र जारी किया। इसमें सुजीत विश्वास, दीपक कुमार और गणेश कुमार के पंचायत सचिव नहीं होने की पुष्टि करते हुए उनके स्थानांतरण आदेश निरस्त कर दिए गए।

बताया गया कि तीनों जिलों के जिलाधिकारियों से कराई गई जांच में इन नामों का संबंधित जिलों में कोई रिकॉर्ड नहीं मिला। ट्रांसफर सूची में क्रमांक-1 पर सुजीत विश्वास, अररिया, क्रमांक-761 पर दीपक कुमार, नालंदा और क्रमांक-791 पर गणेश कुमार, नवादा का नाम दर्ज था। सवाल यह है कि जब ये लोग संबंधित जिलों में पंचायत सचिव थे ही नहीं, तो आखिर विभाग की ट्रांसफर सूची में उनके नाम कैसे शामिल हो गए?

2248 में 1645 पंचायत सचिवों का तबादला

विभाग की ओर से कुल 2248 पंचायत सचिवों में से 1645 का ट्रांसफर किया गया है। लेकिन सूची तैयार करने की प्रक्रिया को लेकर गंभीर सवाल खड़े हुए हैं। आरोप है कि सूची बनाने से पहले रिकॉर्ड की मुकम्मल पड़ताल नहीं की गई।ट्रांसफर में न तो कर्मियों की वरीयता का ध्यान रखा गया और न ही दूरी के नियम का। इतना ही नहीं, सूची में मृत, नौकरी छोड़ चुके और निलंबित पंचायत सचिवों के नाम तक शामिल होने की बात सामने आई है। इससे पूरी प्रक्रिया की पारदर्शिता पर सवाल खड़े हो गए हैं।विभागीय मंत्री दीपक प्रकाश ने कहा है कि इस तरह की गड़बड़ी करने वालों को चिन्हित कर उनके खिलाफ कड़ी कार्रवाई की जाएगी।

संघ ने सीएम से जांच की मांग की

पंचायत सचिव संघ के अध्यक्ष बिरेन्द्र कुमार ने मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी को पत्र लिखकर पूरे मामले की जांच की मांग की है। उनका आरोप है कि निजी हित साधने और अपनों को फायदा पहुंचाने के लिए पिछले दरवाजे से नियुक्ति कराने की साजिश रची गई थी, जिसे समय रहते पकड़ लिया गया।संघ ने मांग की है कि सरकार यह साफ करे कि ट्रांसफर सूची में ऐसे नाम शामिल करने के पीछे कौन लोग थे और दोषियों पर कब तक कार्रवाई होगी।

पंचायत सचिव क्यों हैं इतने अहम?

पंचायत सचिवों की भूमिका इसलिए भी महत्वपूर्ण है क्योंकि बिहार में करीब 33 साल बाद पंचायतों का नए सिरे से परिसीमन होने जा रहा है। कौन-सा राजस्व गांव किस पंचायत में रहेगा और कौन-सा हटेगा, इस प्रक्रिया में पंचायत सचिवों की अहम जिम्मेदारी होगी।परिसीमन के बाद करीब एक साल में राज्य में लगभग 13 हजार संभावित नई पंचायतों के चुनाव होने हैं। फिलहाल बिहार के करीब 45 हजार गांव 8,053 पंचायतों में विभाजित हैं।

इसके अलावा जन्म-मृत्यु प्रमाण पत्र, जाति और निवास प्रमाण पत्र, वंशावली तथा सामाजिक सुरक्षा पेंशन के सत्यापन जैसे अहम काम भी पंचायत सचिवों के जिम्मे होते हैं। ऐसे में पंचायत सचिवों की नियुक्ति और ट्रांसफर प्रक्रिया में किसी भी तरह की गड़बड़ी सीधे ग्रामीण प्रशासन की व्यवस्था को प्रभावित कर सकती है।

रिपोर्ट- धीरेंद्र कुमार