Bankipur Bypoll:पीके फैक्टर से बढ़ी BJP की बेचैनी? साख बचाने की जंग में इंजीनियर शैलेंद्र का खामोश दांव, किसके हाथ लगेगी राजधानी की सबसे प्रतिष्ठित सीट? पढ़िए...
Bankipur Bypoll: राजधानी पटना की हाई-प्रोफाइल बांकीपुर विधानसभा सीट पर होने वाले उपचुनाव ने अब एक ऐसा रोचक मोड़ ले लिया है, जिसने देश भर के सियासी पंडितों की निगाहें अपनी तरफ खींच ली हैं।
Bankipur Assembly Bypoll:बिहार की सियासत का पारा इस वक्त सातवें आसमान पर है। राजधानी पटना की हाई-प्रोफाइल बांकीपुर विधानसभा सीट पर होने वाले उपचुनाव ने अब एक ऐसा रोचक मोड़ ले लिया है, जिसने देश भर के सियासी पंडितों की निगाहें अपनी तरफ खींच ली हैं। साल 1995 से जो सीट भारतीय जनता पार्टी का अभेद्य और सबसे महफूज गढ़ रही है, वहां आज सिर्फ हार-जीत का सवाल नहीं, बल्कि साख की एक बड़ी जंग छिड़ चुकी है। भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष और इस क्षेत्र के पूर्व क्षत्रप नितिन नवीन के दिल्ली कूच करने के बाद खाली हुई इस गद्दी पर पूर्व चुनावी रणनीतिकार और जन सुराज पार्टी के मुखिया प्रशांत किशोर ने जो ताल ठोंकी है, उसने सत्ता के गलियारों में खलबली मचा दी है।
जातीय समीकरणों का ताना-बाना और पीके की सेंधमारी
तकरीब 3.79 लाख वोटरों वाले इस इलाके का चुनावी इतिहास गवाह है कि यहां की हुकूमत का फैसला हमेशा सवर्ण समाज यानी कायस्थ, ब्राह्मण, भूमिहार और राजपूत वोटर ही करते आए हैं। बांकीपुर के वोट बैंक में अकेले कायस्थ बिरादरी का दबदबा करीब 14 फीसदी है। यही वजह है कि भाजपा ने इस नब्ज को पहचानते हुए नीरज कुमार सिन्हा को अपना उम्मीदवार बनाकर दांव खेला है।लेकिन असली ट्विस्ट प्रशांत किशोर की एंट्री से आया है। सियासी हलकों में यह यक्ष प्रश्न तैर रहा है कि पारंपरिक सांगठनिक ढांचा न होने के बावजूद पीके का यह तीर किसके वोट बैंक के कलेजे को चीरेगा? क्या वह सवर्णों के भगवा झुकाव में बिखराव पैदा करेंगे या पिछड़ों-दलितों के दम पर कोई नया इंकलाब लिखेंगे?

भाजपा की आक्रामक चौसर और मंत्री शैलेंद्र की खामोश इबादत
बांकीपुर को अपनी नाक का सवाल बना चुकी भाजपा ने चुनावी मैदान में अपनी पूरी फौज झोंक दी है। जहां एक तरफ पार्टी का प्रचार बेहद आक्रामक और भव्य है, वहीं सूबे के मंत्री इंजीनियर शैलेंद्र कुमार बेहद खामोश रणनीति के साथ घर-घर जाकर भाजपा प्रत्याशी के पक्ष में जमीन मजबूत कर रहे हैं। दिलचस्प यह है कि जहां भाजपा का चुनाव अभियान आक्रामक तेवर में दिखाई दे रहा है, वहीं शैलेंद्र कुमार बिना शोर-शराबे के साइलेंट कैंपेन के जरिए घर-घर पहुंचकर मतदाताओं से संवाद साध रहे हैं। उनका कहना है कि भाजपा हर चुनाव को चुनौती मानकर पूरी संगठनात्मक ताकत के साथ लड़ती है और यही उसकी सबसे बड़ी कुव्वत है।

मंत्री शैलेंद्र का पलटवार
बूथ स्तर से लेकर शक्ति केंद्रों तक को सक्रिय करने में जुटे मंत्री शैलेंद्र ने विपक्ष पर तीखा तंज कसते हुए कहा कि हम सौभाग्यशाली हैं कि राष्ट्रीय अध्यक्ष नितिन नवीन के क्षेत्र में पार्टी उम्मीदवार के लिए मुस्तैद हैं। संगठन की मजबूती के दम पर हमारी जीत तय है, टक्कर में दूर-दूर तक कोई दल नहीं है।

इस चुनावी दंगल को धार देते हुए प्रशांत किशोर ने दावा किया है कि जन सुराज के महज एक सिपाही के उतरने से भाजपा रक्षात्मक स्थिति पर आ गई है। पीके के इस वार पर पलटवार करते हुए मंत्री शैलेंद्र ने बेहद कड़े लहजे में कहा कि पीले गमछे वाले (प्रशांत किशोर) कोई असली राजनेता नहीं हैं, बल्कि यह महज एक चुनावी तिकड़म है। उन्होंने आरोप लगाया कि उनकी सियासत सिर्फ अगड़ी जातियों को कमजोर करने और सनातन विरोधी ताकतों को हवा देने पर टिकी है, जबकि बांकीपुर की अवाम पूरी तरह भगवामय हो चुकी है।

मुकद्दर का अंतिम परिणाम
बहरहाल, बांकीपुर की यह शतरंज अब आखिरी दौर में पहुंच चुकी है। राष्ट्रीय अध्यक्ष नितिन नवीन की साख और मंत्री शैलेंद्र कुमार के खामोश जनसंपर्क ने भाजपा के हक में माहौल को गरमा दिया है, तो दूसरी तरफ प्रशांत किशोर की नई राजनीतिक मशक्कत पारंपरिक ढर्रे को चुनौती दे रही है। लोग अपना फैसला 30 को ईवीएम में कैद कर देगें और मुकद्दर का अंतिम परिणाम 3 जुलाई को सबके सामने होगा। लेकिन इतना तो साफ है कि भाजपा की आक्रामकता और जन सुराज की हलचल ने इस उपचुनाव को साधारण से बेहद असाधारण बना दिया है।