Bihar IAS Promotion: बिहार के 14 अफसरों को IAS में प्रमोशन, सत्ता के गलियारों में नई ताकत का आगाज, पढ़िए लिस्ट
Bihar IAS Promotion:राज्य प्रशासनिक सेवा के 14 अधिकारियों को भारतीय प्रशासनिक सेवा (IAS) में प्रोन्नति देकर बिहार कैडर में शामिल किए जाने का रास्ता साफ हो गया है।
Bihar IAS Promotion: बिहार की नौकरशाही में एक बार फिर बड़ा प्रशासनिक संदेश जारी हुआ है। सामान्य प्रशासन विभाग की अधिसूचना ने न केवल कई अफसरों के वर्षों पुराने इंतजार को खत्म किया है, बल्कि सत्ता और शासन के गलियारों में नई चर्चाओं को भी जन्म दे दिया है। राज्य प्रशासनिक सेवा के 14 अधिकारियों को भारतीय प्रशासनिक सेवा (IAS) में प्रोन्नति देकर बिहार कैडर में शामिल किए जाने का रास्ता साफ हो गया है। भारत सरकार की अधिसूचना के बाद यह फैसला अब आधिकारिक रूप से अमल में आ गया है।
नौकरशाही की दुनिया में IAS सिर्फ एक सेवा नहीं, बल्कि एक मुकाम, एक हैसियत और एक अलग पहचान का नाम माना जाता है। ऐसे में बिहार प्रशासनिक सेवा (BPS) से भारतीय प्रशासनिक सेवा (IAS) में पहुंचना किसी लंबे सफर की मंजिल हासिल करने जैसा माना जाता है। वर्षों तक जिलों, विभागों और सचिवालयों में काम करने के बाद इन अधिकारियों को अब देश की सबसे प्रतिष्ठित प्रशासनिक सेवा का हिस्सा बनने का अवसर मिला है।
इस प्रोन्नति सूची में 2016 और 2017 बैच के कुल 14 अधिकारियों को जगह मिली है। इनमें स्वास्थ्य विभाग के अपर सचिव मृणायक दास, शिक्षा विभाग के निदेशक (प्रशासन) मनोरंजन कुमार, सामान्य प्रशासन विभाग के अपर सचिव विकास कुमार, बिहार राज्य भंडार निगम के प्रबंध निदेशक डॉ. गगन, पूर्णिया के उप विकास आयुक्त अंजनी कुमार और वित्त विभाग के संयुक्त सचिव मो. इजतबा हुसैन जैसे नाम शामिल हैं।
इसके अलावा रजनीश कुमार, विधु भूषण चौधरी, मो. वसीम अहमद, कृत्यानंद रंजन, मो. राशिद आलम, इबरार अहमद खां, मनोज कुमार और हेमंत कुमार सिंह को भी भारतीय प्रशासनिक सेवा में प्रोन्नति मिली है। यह सूची सिर्फ नामों की फेहरिस्त नहीं, बल्कि प्रशासनिक अनुभव, राजनीतिक विश्वास और कार्यकुशलता के लंबे अध्याय का नतीजा मानी जा रही है।
दिलचस्प बात यह है कि सरकार ने इन सभी अधिकारियों को अगले आदेश तक अपने वर्तमान पदों पर ही बने रहने का निर्देश दिया है। फर्क सिर्फ इतना होगा कि अब वे वही जिम्मेदारी भारतीय प्रशासनिक सेवा के अधिकारी और संयुक्त सचिव स्तर के पदाधिकारी के रूप में निभाएंगे। यानी कुर्सी वही, दफ्तर वही, लेकिन नाम के आगे जुड़ने वाला दर्जा और प्रभाव पहले से कहीं अधिक होगा।


राजनीतिक और प्रशासनिक हलकों में इस फैसले को कई नजरियों से देखा जा रहा है। एक पक्ष इसे प्रतिभा और अनुभव का सम्मान बता रहा है, तो दूसरा पक्ष इसे नौकरशाही के भीतर शक्ति संतुलन में होने वाले बदलाव के रूप में देख रहा है। आखिर IAS का तमगा मिलते ही किसी अधिकारी की प्रशासनिक स्वीकार्यता, निर्णय क्षमता और प्रभाव क्षेत्र स्वतः बढ़ जाता है।
सत्ता के जानकारों का मानना है कि आने वाले दिनों में यही अधिकारी जिलों की कमान संभालने से लेकर विभागों की नीतियां तय करने तक की भूमिका में और अधिक प्रभावी दिखाई देंगे। यही वजह है कि इस प्रोन्नति को महज सेवा परिवर्तन नहीं, बल्कि बिहार की नौकरशाही में एक नई पारी की शुरुआत माना जा रहा है।
फिलहाल इतना तय है कि वर्षों तक बिहार प्रशासनिक सेवा के झंडाबरदार रहे ये अधिकारी अब भारतीय प्रशासनिक सेवा के प्रतिष्ठित मंच पर पहुंच चुके हैं। सत्ता ने इन पर भरोसे की मुहर लगा दी है, अब निगाहें इस बात पर रहेंगी कि नए दर्जे के साथ ये अफसर शासन-प्रशासन में कितना नया रंग भरते हैं और जनता की अपेक्षाओं पर कितना खरे उतरते हैं। नौकरशाही की बिसात पर मोहरे वही हैं, मगर अब उनकी चाल और उनका वज़न दोनों बदल चुके हैं।