2 साल से लापता मुंगेर के युवक को पाकिस्तान सीमा के पास सेना ने पकड़ा, तस्वीर देख बिलख पड़ी मां
Munger : मुंगेर जिले के बासुदेवपुर थाना क्षेत्र से करीब दो साल पहले लापता हुआ एक युवक नाटकीय घटनाक्रम के बीच जम्मू-कश्मीर में पाकिस्तान सीमा के पास जीवित पाया गया है। 27 वर्षीय धर्मेंद्र कुमार को सेना के जवानों ने सीमावर्ती इलाके में संदिग्ध परिस्थितियों में घूमते हुए पकड़ा था। पूछताछ और जांच के दौरान जब उसकी मानसिक स्थिति सामान्य नहीं लगी, तो स्थानीय लालपोरा पुलिस ने तकनीकी मदद से उसकी पहचान मुंगेर निवासी के रूप में की। युवक के सुरक्षित मिलने की खबर मिलते ही चंडी स्थान निषाद टोला स्थित उसके घर में खुशी और आंसुओं का सैलाब उमड़ पड़ा है।
अगस्त 2024 से था लापता; 50 रुपये लेकर घर से निकला था धर्मेंद्र
परिजनों के अनुसार, मानसिक रूप से अस्वस्थ धर्मेंद्र 19 अगस्त 2024 को अपनी माँ से महज 50 रुपये लेकर घर से निकला था, जिसके बाद वह कभी वापस नहीं लौटा। परिवार ने अपने स्तर पर उसे ढूंढने की हर संभव कोशिश की, लेकिन कोई सुराग न मिलने पर वे थक-हार कर बैठ गए थे। समय बीतने के साथ परिवार ने उसके जीवित होने की उम्मीद लगभग छोड़ दी थी। करीब दो साल बाद जब बासुदेवपुर थाना पुलिस धर्मेंद्र की तस्वीर लेकर उसके दरवाजे पर पहुँची, तो माँ मन्नी देवी उसे पहचानते ही भावुक हो उठीं।
तस्वीर देख परिजनों ने पहचाना; कश्मीर के लालपोरा में है पुलिस की निगरानी में
बासुदेवपुर थाना पुलिस को कश्मीर पुलिस से मिली सूचना और फोटो के आधार पर जब तस्दीक की गई, तो पुष्टि हुई कि सीमा पर मिला युवक धर्मेंद्र ही है। फिलहाल वह कश्मीर के लालपोरा थाना क्षेत्र के कोहवारा इलाके में पुलिस की कड़ी निगरानी में सुरक्षित है। पुलिस ने बताया कि शुरुआत में सेना को उस पर घुसपैठ का शक हुआ था, लेकिन गहन छानबीन में पता चला कि वह रास्ता भटककर वहां पहुँच गया था और अपनी मानसिक स्थिति के कारण घर का पता नहीं बता पा रहा था।
गरीबी बनी बाधा: वापस लाने के लिए प्रशासन और मुख्यमंत्री से लगाई गुहार
बेटे के जिंदा होने की खबर ने परिवार को नई जिंदगी तो दी है, लेकिन अब उसे वापस लाने की चिंता परिजनों को सता रही है। धर्मेंद्र के पिता शत्रुघ्न सहनी बेहद गरीब हैं और मजदूरी व मछली पकड़कर किसी तरह अपने परिवार का पेट पालते हैं। कच्चे मकान में रहने वाले इस परिवार के पास इतने पैसे नहीं हैं कि वे जम्मू-कश्मीर जाकर अपने बेटे को ला सकें। थक-हार कर अब पीड़ित परिजनों ने जिला प्रशासन और मुख्यमंत्री नीतीश कुमार से आर्थिक मदद व बेटे की सुरक्षित घर वापसी के लिए गुहार लगाई है।
उम्मीद की नई किरण; प्रशासनिक मदद पर टिकीं सबकी निगाहें
करीब दो साल बाद मौत के मुंह से सुरक्षित वापस आए बेटे की खबर ने पूरे चंडी स्थान निषाद टोला में चर्चा का माहौल बना दिया है। ग्रामीणों का कहना है कि यह किसी चमत्कार से कम नहीं है कि एक मानसिक रूप से कमजोर युवक सुरक्षित तरीके से सीमावर्ती संवेदनशील इलाके में पाया गया। अब सबकी निगाहें मुंगेर जिला प्रशासन पर टिकी हैं कि वे कब तक कागजी प्रक्रिया पूरी कर धर्मेंद्र को उसके वृद्ध माता-पिता के पास वापस पहुँचाने में मदद करते हैं।
इम्तियाज खान की रिपोर्ट