Jamui school building: शिक्षा पर बड़े दावों के बीच गांव का स्कूल भवन अब भी अधूरा, अभिभावकों के मदद से भी काम पड़ा ठप, जानें पूरा मामला

Jamui school building: बिहार के जमुई के पिरहिंडा गांव में प्राथमिक विद्यालय का भवन वर्षों से अधूरा है। करीब 100 बच्चे करकट की छत के नीचे पढ़ाई करने को मजबूर हैं। Keywords: बिहार शिक्षा बजट, सिकंदरा पिरहिंडा स्कूल, प्राथमिक विद्यालय भवन अध

Jamui school building
बिहार में शिक्षा बना मजाक!- फोटो : social media

Jamui school building: बिहार में शिक्षा पर सबसे अधिक बजट खर्च किए जाने के दावों के बीच सिकंदरा प्रखंड के पिरहिंडा गांव में एक प्राथमिक विद्यालय भवन आज भी अधूरा है। यह मामला अति पिछड़े और दलित समाज के उस टोले से जुड़ा है, जो सिकंदरा-शेखपुरा सड़क किनारे बसा है और मुख्य बस्ती से अलग है। यहां के बच्चों को पहले पढ़ाई के लिए करीब डेढ़ किलोमीटर दूर स्कूल जाना पड़ता था।

स्थानीय लोगों के अनुसार, उस समय के प्रमुख सिंधु कुमार पासवान के प्रयास से नवसृजित प्राथमिक विद्यालय की स्वीकृति मिली थी। लेकिन विद्यालय भवन के लिए सरकार की ओर से जमीन खरीद की कोई स्पष्ट नीति नहीं थी। ऐसे में मजदूर वर्ग के अभिभावकों ने अपने स्तर पर चंदा इकट्ठा कर विद्यालय के नाम जमीन खरीदने का निर्णय लिया। वर्ष 2016 में जमीन खरीद की प्रक्रिया शुरू हुई और कई प्रयासों के बाद 2019 में विद्यालय के नाम जमीन का निबंधन हो सका।

भवन निर्माण के लिए राशि आवंटित नहीं

इसके बावजूद अब तक भवन निर्माण के लिए राशि आवंटित नहीं हो सकी है। वर्तमान में विद्यालय ईंट और मिट्टी की दीवारों तथा करकट की छत के नीचे संचालित हो रहा है। तेज हवा चलने पर छत उड़ने का खतरा बना रहता है, जिससे किसी अनहोनी की आशंका भी रहती है।

जिला शिक्षा पदाधिकारी  से मिलकर उठाई मांग

अभिभावकों ने कई बार जिला शिक्षा पदाधिकारी और जिला पदाधिकारी से मिलकर भवन निर्माण की मांग उठाई, लेकिन अब तक कोई ठोस परिणाम नहीं मिला। स्थानीय लोगों—विष्णु रावत, ज्ञान कुमार पासवान, मिट्ठू पासवान, सोनू कुमार, सुनील राम, श्री रावत और रामफल पासवान—ने बताया कि वे कई बार अधिकारियों के चक्कर लगा चुके हैं। उन्होंने कहा कि वे एक बार फिर प्रयास करेंगे ताकि बच्चों को सुरक्षित भवन मिल सके।

विद्यालय में करीब 100 बच्चे नामांकित

विद्यालय में करीब 100 बच्चे नामांकित हैं। सभी बच्चे फिलहाल बरामदे में एक साथ बैठकर पढ़ाई करने को मजबूर हैं। अभिभावकों का कहना है कि उन्होंने अपने संसाधनों से जमीन उपलब्ध कराई, अब सरकार से केवल भवन निर्माण की उम्मीद है ताकि बच्चों का भविष्य सुरक्षित हो सके।