अंतरराष्ट्रीय बौद्ध परंपरा का एकबार फिर साक्षी बना बोधगया, 400 से अधिक लामाओं को पारंपरिक तरीके से अर्पित किए गए वस्त्र व चीवर

बोधगया स्थित महाबोधि मंदिर परिसर में देश-विदेश से पहुंचे बड़ी संख्या में बौद्ध श्रद्धालुओं और विभिन्न देशों के भिक्षुओं की उपस्थिति में हाकठिन चीवर दान समारोह संपन्न हो गया। 400 से अधिक लामाओं को चीवर दान किया गया....

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महाबोधि मंदिर में महाकठिन चीवर दान समारोह संपन्न- फोटो : मनोज कुमार

Gayaji : जिले के बोधगया की पावन धरती एक बार फिर अंतरराष्ट्रीय बौद्ध परंपरा और आध्यात्मिक आस्था का प्रमुख केंद्र बन गई है। मौका था विश्व प्रसिद्ध महाबोधि महाविहार में आयोजित भव्य 'महाकठिन चीवर दान समारोह' का। तीन महीने के कठिन वर्षावास के समापन के उपलक्ष्य में आयोजित इस धार्मिक अनुष्ठान में देश-विदेश से पहुंचे बड़ी संख्या में बौद्ध श्रद्धालुओं और विभिन्न देशों के भिक्षुओं ने हिस्सा लिया।


पवित्र बोधिवृक्ष के नीचे विशेष प्रार्थना, विश्व शांति और करुणा का संदेश 

समारोह के दौरान महाबोधि मंदिर परिसर में स्थित पवित्र बोधिवृक्ष के नीचे विशेष पूजा-अर्चना और सामूहिक प्रार्थना का आयोजन किया गया। इस दौरान उपस्थित बौद्ध अनुयायियों ने भगवान बुद्ध के पंचशीलों और उपदेशों को स्मरण करते हुए पूरी दुनिया में शांति, सौहार्द, करुणा और मानव कल्याण का संदेश दिया। इस आध्यात्मिक आयोजन से पूरा बोधगया परिसर भक्तिमय नजर आया।


थाईलैंड, म्यांमार और श्रीलंका समेत कई देशों के श्रद्धालुओं की रही भव्य उपस्थिति 

इस अंतरराष्ट्रीय समारोह की सबसे बड़ी विशेषता यह रही कि इसमें थाईलैंड, म्यांमार, बांग्लादेश, श्रीलंका और वियतनाम जैसे प्रमुख देशों से बड़ी संख्या में बौद्ध अनुयायी और श्रद्धालु शामिल हुए। विदेशी बौद्ध श्रद्धालुओं की व्यापक उपस्थिति ने इस आयोजन को एक वैश्विक और ऐतिहासिक स्वरूप प्रदान किया, जिससे बोधगया की अंतरराष्ट्रीय आध्यात्मिक पहचान और अधिक सुदृढ़ हुई है।


करीब 400 लामाओं और भिक्षुओं को पारंपरिक तरीके से अर्पित किए गए वस्त्र व चीवर 

कार्यक्रम के मुख्य आकर्षण के तहत लगभग 400 लामाओं और बौद्ध भिक्षुओं को विधिवत वस्त्र एवं चीवर दान किए गए। बौद्ध धर्म की मान्यताओं के अनुसार, वर्षावास के तीन महीने पूरे होने के बाद भिक्षुओं को चीवर (वस्त्र) दान करने की यह सदियों पुरानी और अत्यंत पवित्र परंपरा है, जिसे दान, त्याग, संयम और सेवा की भावना का प्रतीक माना जाता है।


धार्मिक और आध्यात्मिक पहचान को मजबूती, बोधगया में बढ़ा श्रद्धालुओं का उत्साह 

कुल मिलाकर, महाबोधि मंदिर में संपन्न हुआ यह महाकठिन चीवर दान समारोह बोधगया की धार्मिक महत्ता को और प्रगाढ़ करने वाला साबित हुआ। इस आयोजन ने न केवल बौद्ध धर्म की प्राचीन परंपराओं को जीवंत रखा, बल्कि शीतकालीन सत्र की शुरुआत से पहले बोधगया में वैश्विक पर्यटकों और श्रद्धालुओं के आगमन के उत्साह को भी बढ़ा दिया है।


मनोज की रिपोर्ट