ब्रह्मोत्तर बांध को बचाने के लिए प्रशासन और जनप्रतिनिधियों ने कसी कमर, दिन-रात जारी रहा बचाव कार्य

भागलपुर जिले मे गंगा और कोशी का कहर जारी है। जिले के गोपालपुर और रंगरा प्रखंड की दर्जनों पंचायतों को बाढ़ की विभीषिका से बचाने वाले ब्रह्मोत्तर बांध की सुरक्षा के लिए प्रशासन, जनप्रतिनिधियों और ग्रामीणों ने संयुक्त रूप से मोर्चा संभाल लिया है.....

ब्रह्मोत्तर बांध को बचाने के लिए प्रशासन और जनप्रतिनिधियों न
कटाव के खतरे के बीच ब्रह्मोत्तर बांध को बचाने की जद्दोजहद- फोटो : बाल मुकुंद कुमार

Bhagalpur : जिले के गोपालपुर और रंगरा प्रखंड की दर्जनों पंचायतों को बाढ़ तथा कटाव की विभीषिका से बचाने वाले ब्रह्मोत्तर बांध की सुरक्षा के लिए प्रशासन, जनप्रतिनिधियों और ग्रामीणों ने संयुक्त रूप से मोर्चा संभाल लिया है। गंगा नदी के जलस्तर में उतार-चढ़ाव और संभावित खतरे को देखते हुए बांध के अस्तित्व को बनाए रखने और उसे मजबूत करने का बचाव कार्य 24 घंटे लगातार जारी है।


जनप्रतिनिधियों और प्रशासनिक अधिकारियों की जमीनी सक्रियता 

बचाव अभियान की गंभीरता को देखते हुए राज्य के ऊर्जा मंत्री शैलेश कुमार उर्फ बुलो मंडल और जिला परिषद अध्यक्ष बिपिन मंडल खुद स्थिति पर नजर बनाए हुए हैं। सैदपुर पंचायत के मुखिया प्रतिनिधि जितेंद्र कुमार गौतम उर्फ गुड्डू मुखिया के साथ स्थानीय ग्रामीण भी धरातल पर डटे हुए हैं। वहीं प्रशासनिक मोर्चे पर आपदा एडीएम कुंदन कुमार, नवगछिया एसडीएम परीक्षित और जल संसाधन विभाग के एसडीओ नयन कुमार लगातार स्थल निरीक्षण कर स्थिति पर पैनी नजर रख रहे हैं।


नावों और ट्रैक्टरों के जरिए दिन-रात राहत सामग्री की आपूर्ति 

बांध के अतिसंवेदनशील और कमजोर हिस्सों को दुरुस्त करने के लिए जल संसाधन विभाग की टीम युद्धस्तर पर काम कर रही है। कटाव प्रभावित क्षेत्रों में सामग्री पहुंचाने के लिए नावों और ट्रैक्टरों की मदद ली जा रही है। बालू की बोरियां, जियो बैग और अन्य आवश्यक सामग्रियां समय पर पहुंचाकर बांध के क्षरण को रोकने के प्रयास लगातार जारी हैं।


साझा प्रयासों से फिलहाल सुरक्षित हुआ ब्रह्मोत्तर बांध 

जनप्रतिनिधियों, प्रशासनिक टीम और स्थानीय ग्रामीणों के एकजुट प्रयासों के बल पर फिलहाल ब्रह्मोत्तर बांध को सुरक्षित कर लिया गया है। समय रहते की गई इस त्वरित कार्रवाई से आसपास की पंचायतों में मंडरा रहा बाढ़ का बड़ा खतरा फिलहाल टल गया है, जिससे स्थानीय निवासियों ने बड़ी राहत की सांस ली है।


सतत निगरानी और भावी चौकसी पर जोर 

हालांकि तात्कालिक संकट को नियंत्रित कर लिया गया है, लेकिन गंगा के जलस्तर और संवेदनशीलता को देखते हुए सतर्कता में कोई कमी नहीं की जा रही है। अधिकारियों और जनप्रतिनिधियों ने स्पष्ट किया है कि कटाव या जलस्तर में अचानक वृद्धि की स्थिति से निपटने के लिए चौबीसों घंटे निगरानी जारी रहेगी ताकि किसी भी आपात स्थिति में तुरंत कदम उठाया जा सके।


बालमुकुंद की रिपोर्ट