Bengal Assembly Election : भवानीपुर में सबसे बड़ा खेल: जिस बूथ पर ममता बनर्जी ने खुद किया मतदान, वहां जनता ने थमाया सिर्फ 32 वोट

Bengal Assembly Election : पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव के नतीजे घोषित हो चुके हैं। शुभेंदु अधिकारी वहां मुख्यमंत्री बन चुके हैं। हालाँकि विधानसभा चुनाव के नतीजों में सबसे बड़ा उलटफेर भवानीपुर विधानसभा सीट पर देखने को मिला है।

Bengal Assembly Election : भवानीपुर में सबसे बड़ा खेल: जिस ब
अपनों ने दिया दगा - फोटो : SOCIAL MEDIA

N4N DESK : पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव के नतीजों ने इस बार इतिहास पलट दिया है। बंगाल की सत्ता की चाबी अब भाजपा के हाथों में आ गई है और शुभेंदु अधिकारी राज्य के नए मुख्यमंत्री बन चुके हैं। लेकिन इस पूरे चुनाव का सबसे बड़ा और चौंकाने वाला उलटफेर भवानीपुर विधानसभा सीट पर देखने को मिला है। तृणमूल कांग्रेस (TMC) की सुप्रीमो ममता बनर्जी को उनके अपने ही घरेलू गढ़ भवानीपुर में भाजपा उम्मीदवार और वर्तमान मुख्यमंत्री शुभेंदु अधिकारी ने 15,105 वोटों के कड़े अंतर से करारी शिकस्त दी है। यह जीत इसलिए भी ऐतिहासिक है क्योंकि ममता बनर्जी ने रैलियों के दौरान इस सीट को अपनी 'मां' जैसा बताया था और दावा किया था कि भवानीपुर का हर एक इंसान उन्हें निजी तौर पर जानता है।

चुनाव आयोग द्वारा जारी बूथ-वार आंकड़ों का विश्लेषण ममता बनर्जी और टीएमसी के लिए किसी बुरे सपने जैसा है। आंकड़े साफ बताते हैं कि साल 2021 के उपचुनाव और 2024 के लोकसभा चुनाव के बाद, साल 2026 के इस विधानसभा चुनाव में ममता बनर्जी के जनाधार में अभूतपूर्व गिरावट आई है। ममता बनर्जी के लिए सबसे बड़ा और निजी झटका हरीश मुखर्जी रोड स्थित मित्रा इंस्टीट्यूशन पोलिंग स्टेशन पर लगा—यह वही पोलिंग बूथ है जहां 'दीदी' खुद अपना वोट डालती हैं। चुनाव आयोग के आधिकारिक आंकड़े बताते हैं की "2021 के उपचुनाव में इस बूथ पर ममता बनर्जी को 36 वोटों की लीड मिली थी। लेकिन 2026 के रण में शुभेंदु अधिकारी ने ममता को उनके अपने ही बूथ पर पूरी तरह पछाड़ दिया। यहाँ शुभेंदु को 238 वोट मिले, जबकि ममता बनर्जी को महज 51 वोटों से ही संतोष करना पड़ा।"

भवानीपुर निर्वाचन क्षेत्र के भीतर टीएमसी का जो संगठनात्मक ढांचा कभी अभेद्य माना जाता था, वह इस बार पूरी तरह ढह गया। क्षेत्र के कुल 267 पोलिंग बूथों में से शुभेंदु अधिकारी ने रिकॉर्ड 206 बूथों पर एकतरफा और मजबूत बढ़त हासिल की, जबकि ममता बनर्जी का जादू सिर्फ 60 बूथों तक सिमट कर रह गया। इस सीट पर स्थिति यह हो गई कि 24 पोलिंग बूथ ऐसे रहे जहां टीएमसी सुप्रीमो को 50 वोट भी नसीब नहीं हुए। हालांकि, शुभेंदु अधिकारी भी 38 बूथों पर 50 से कम वोट पर अटके, लेकिन उन्होंने बाकी के 200 से अधिक बूथों पर बंपर वोटिंग कराकर इसकी भारी अंतर से भरपाई कर ली।

इस चुनाव का सबसे हैरान कर देने वाला दृश्य बूथ संख्या 227 पर देखने को मिला, जो सरकारी प्रेस परिसर में स्थित है। साल 2021 के चुनाव में इस बूथ पर ममता बनर्जी को एकतरफा 326 वोट मिले थे। लेकिन 2026 में पासा ऐसा पलटा कि ममता बनर्जी को यहां सिर्फ 12 वोटों पर सिमटना पड़ा, जबकि शुभेंदु अधिकारी अकेले 287 वोट बटोर ले गए। भवानीपुर के इन आंकड़ों ने साफ कर दिया है कि बंगाल की राजनीति की 'दीदी' कहे जाने वाली ममता बनर्जी से उनके अपने ही पड़ोसियों और वोटरों ने इस बार मुंह मोड़ लिया, जिसने शुभेंदु अधिकारी के मुख्यमंत्री बनने की राह को बेहद आसान और ऐतिहासिक बना दिया।