Political News:झारखंड राज्यसभा चुनाव में धोखे पर सियासी संग्राम, RJD का पलटवार- कांग्रेस को हमने नहीं, उसके अपने विधायकों ने हराया
Political News: झारखंड राज्यसभा चुनाव के नतीजे सामने आने के बाद महागठबंधन के भीतर सियासी घमासान तेज हो गया है।
Political News: झारखंड राज्यसभा चुनाव के नतीजे सामने आने के बाद महागठबंधन के भीतर सियासी घमासान तेज हो गया है। कांग्रेस जहां अपनी हार के लिए राजद और माले पर क्रॉस वोटिंग का आरोप लगा रही है, वहीं राष्ट्रीय जनता दल ने पलटवार करते हुए दावा किया है कि पार्टी ने कांग्रेस को कोई धोखा नहीं दिया। राजद का कहना है कि उसके सभी चार विधायकों को कांग्रेस प्रत्याशी के पक्ष में मतदान कराने की जिम्मेदारी खुद तेजस्वी यादव ने वरिष्ठ नेता भोला यादव को सौंपी थी।
राजद की ओर से सोशल मीडिया पर जारी बयान में कहा गया कि मतदान से पहले भोला यादव रांची में पार्टी के चारों विधायकों के साथ मौजूद थे और इसकी तस्वीरें भी सार्वजनिक की गई थीं। पार्टी का दावा है कि कांग्रेस उम्मीदवार प्रणव झा को समर्थन देने का फैसला पहले ही लिया जा चुका था। 15 जून को प्रणव झा ने पटना में तेजस्वी यादव से मुलाकात कर समर्थन मांगा था, जिसके बाद राजद ने समर्थन का भरोसा दिया था।
सोशल मीडिया के फेसबुक पर राजद ने लिखा है कि झारखंड प्रदेश के राज्यसभा चुनाव में परिणाम से स्पष्ट हो गया है कि कांग्रेस अपने ही सभी विधायकों का समर्थन हासिल करने में नाकाम रही। दूसरे दलों पर बिना सोचे-समझ अनर्गल आरोप लगाने से पूर्व स्वयं में झांककर मंथन और चिंतन करना चाहिए कि विगत मार्च महीने में राज्यसभा के द्विवार्षिक चुनावों में कांग्रेस के हरियाणा से 5, ओड़िशा से 2 और बिहार से 3 विधायकों ने BJP के पक्ष में खुलकर क्रॉस वोटिंग की तथा जानबुझकर अनुपस्थित रहे।यही नहीं उन विधायकों ने खुलकर कैमरा पर आकर कहा कि महागठबंधन का उम्मीदवार उनकी पसंद का नहीं था, उनके शीर्ष नेतृत्व ने उन्हें कोई निर्देश नहीं दिया इत्यादि इत्यादि । सबूत के तौर पर वीडियो संलग्न है। अब तक उन विधायकों के खिलाफ क्या कोई कार्रवाई की गई? बिहार में वही लोग इनके शीर्ष प्रदेश नेतृत्व के साथ बैठकर अब प्रेस वार्ता भी करते फिरते है।
अब फिर झारखंड चुनाव में इनके नेता अपनी असफलता व नाकामी छिपाने तथा RJD एवं CPI(ML) की बीजेपी विरोधी विश्वसनीयता को नुकसान पहुंचाने का असफल प्रयास कर रह हैं। ऐसे नेताओं की सतही, हल्की और अधीर टिप्पणी इंडी गठबंधन की एकजुटता को नुकसान पहुंचाती है। क्या हरियाणा, ओड़िशा और बिहार में महागठबंधन के किसी भी नेता ने कांग्रेस पार्टी के विरुद्ध कभी कोई प्रतिकूल टिप्पणी की? नहीं-कभी नहीं! इसलिए झारखंड के इनके शीर्ष नेताओं को बचकाने बयानों से बचना चाहिए और साथ ही पड़ोसी राज्य बिहार से लेकर अन्य राज्यों में अपने ही उम्मीदवारों के विरुद्ध मतदान करने वालों पर बयानबाजी और कार्रवाई करवानी चाहिए।
दरअसल, 18 जून को झारखंड में राज्यसभा की दो सीटों के लिए चुनाव हुआ था। महागठबंधन की ओर से बैद्यनाथ राम और प्रणव झा मैदान में थे। गठबंधन के पास दोनों उम्मीदवारों को जिताने लायक संख्या बल मौजूद था, लेकिन परिणाम ने राजनीतिक गलियारों को चौंका दिया। भाजपा समर्थित निर्दलीय उम्मीदवार परिमल नथवानी ने जीत दर्ज कर ली।इस बीच कांग्रेस के झारखंड प्रभारी के. राजू ने खुलकर राजद और माले पर निशाना साधा है। उनका दावा है कि कांग्रेस के सभी 16 विधायकों ने पार्टी प्रत्याशी को वोट दिया और झामुमो के भी चार अतिरिक्त वोट मिले। ऐसे में हार की वजह गठबंधन के अन्य सहयोगियों की क्रॉस वोटिंग है। उन्होंने कहा कि झामुमो के सभी विधायक गठबंधन के साथ खड़े रहे और एक भी वोट इधर-उधर नहीं गया।
के. राजू ने यह भी आरोप लगाया कि चुनाव में धनबल का इस्तेमाल हुआ और भाजपा समर्थित उम्मीदवार ने पैसे के दम पर समर्थन जुटाया। वहीं राजद खेमे का कहना है कि कांग्रेस बिना ठोस सबूत के सहयोगी दलों पर आरोप लगाकर अपनी राजनीतिक नाकामी छिपाने की कोशिश कर रही है।
अब इस पूरे घटनाक्रम ने महागठबंधन के भीतर अविश्वास और नाराजगी की नई दरार पैदा कर दी है। सवाल उठ रहे हैं कि आखिर वे वोट कहां गए, जिनके दम पर कांग्रेस अपनी जीत सुनिश्चित मान रही थी। राज्यसभा चुनाव का यह नतीजा सिर्फ एक हार-जीत का मामला नहीं रह गया है, बल्कि झारखंड की गठबंधन राजनीति में भरोसे, निष्ठा और सियासी समीकरणों पर भी बड़ा सवाल बन गया है।
रिपोर्ट- देवांशु प्रभात