रिंग रोड मुआवजे के बदले मांग रहे थे घूस, प्रधान लिपिक और अनुसेवक 20 हजार लेते रंगेहाथ गिरफ्तार

देवघर में भ्रष्टाचार निरोधक ब्यूरो (एसीबी) ने शुक्रवार को बड़ी कार्रवाई करते हुए जिला भू-अर्जन कार्यालय के प्रधान लिपिक और एक अनुसेवक को 20 हजार रुपये रिश्वत लेते रंगेहाथ गिरफ्तार किया है। यह कार्रवाई रिंग रोड मुआवजे से जुड़े मामले में की गई।

रिंग रोड मुआवजे के बदले मांग रहे थे घूस, प्रधान लिपिक और अनु

N4N Desk - झारखंड के देवघर जिले में शुक्रवार को भ्रष्टाचार निरोधक ब्यूरो (एसीबी) ने एक बड़ी कार्रवाई को अंजाम दिया। समाहरणालय परिसर स्थित जिला भू-अर्जन कार्यालय में छापेमारी कर एसीबी की टीम ने दो कर्मचारियों को रिश्वत लेते हुए रंगेहाथ गिरफ्तार कर लिया। दुमका एसीबी के डीएसपी मोनू टुडू के नेतृत्व में हुई इस औचक कार्रवाई से कार्यालय में हड़कंप मच गया। 

रिंग रोड मुआवजे के लिए मांगी थी रिश्वत

पूरा मामला देवघर रिंग रोड परियोजना से जुड़ा है। जानकारी के अनुसार, कुंडा थाना क्षेत्र के गौरीपुर निवासी ब्रह्मदेव यादव की जमीन इस परियोजना के लिए अधिग्रहित की गई थी। इस जमीन के बदले मिलने वाले मुआवजे की राशि दिलाने के नाम पर कार्यालय के प्रधान लिपिक निरंजन कुमार और अनुसेवक नुनुदेव यादव ने 20 हजार रुपये की रिश्वत की मांग की थी। 

एसीबी ने जाल बिछाकर रंगेहाथ पकड़ा

ब्रह्मदेव यादव ने रिश्वत मांगे जाने की लिखित शिकायत दुमका एसीबी से की थी। शिकायत के सत्यापन के बाद एसीबी ने जाल बिछाया। शुक्रवार दोपहर जैसे ही पीड़ित ने घूस की रकम लिपिक और अनुसेवक को दी, पहले से तैनात एसीबी के अधिकारियों और करीब एक दर्जन कर्मियों की टीम ने उन्हें दबोच लिया। मौके पर ही उनके पास से रिश्वत के पैसे बरामद किए गए। 

आरोपियों को लेकर दुमका रवाना हुई टीम

गिरफ्तारी के बाद भू-अर्जन कार्यालय में कागजी प्रक्रिया पूरी की गई। एसीबी की टीम ने संबंधित फाइलों और दस्तावेजों की भी पड़ताल की। छापेमारी की प्रक्रिया पूरी होने के बाद, टीम दोनों आरोपितों (निरंजन कुमार और नुनुदेव यादव) को हिरासत में लेकर अपने साथ दुमका ले गई, जहाँ उनसे आगे की पूछताछ और कानूनी कार्रवाई की जाएगी। 

प्रशासनिक महकमे में मचा हड़कंप

समाहरणालय परिसर के भीतर से हुई इस गिरफ्तारी ने प्रशासनिक महकमे में हड़कंप मचा दिया है। ग्रामीणों और स्थानीय लोगों ने एसीबी की इस कार्रवाई की सराहना की है। लोगों का कहना है कि मुआवजा मिलने में पहले ही देरी होती है और ऊपर से सरकारी बाबुओं द्वारा घूस की मांग करना गरीब किसानों का शोषण है। फिलहाल, विभाग अब इन कर्मचारियों के खिलाफ विभागीय कार्रवाई की तैयारी में है।