Bihar Religious Places: आस्था की अग्नि में तपता रामतीर्थ, सीताकुंड में आज भी जीवित है माता सीता की अग्नि-परीक्षा का ये दिव्य रहस्य
Bihar Religious Places:बिहार की धरती पर आस्था और रहस्य का ऐसा अनोखा संगम विरले ही देखने को मिलता है, जैसा सीताकुंड मंदिर में दिखाई देता है।....
Bihar Religious Places: बिहार की धरती पर आस्था और रहस्य का ऐसा अनोखा संगम विरले ही देखने को मिलता है, जैसा मुंगेर जिले में स्थित सीताकुंड मंदिर में दिखाई देता है। यह पावन स्थल केवल एक मंदिर नहीं, बल्कि श्रद्धा, विश्वास और सनातन परंपरा की जीवंत मिसाल है। देशभर में विख्यात यह धाम सीताकुंड के साथ-साथ रामतीर्थ के नाम से भी जाना जाता है, जहां हर कण में रामकथा की गूंज सुनाई देती है। धार्मिक मान्यताओं के मुताबिक यही वह पुण्य भूमि है, जहां माता सीता ने अपनी पवित्रता सिद्ध करने के लिए अग्नि परीक्षा दी थी।
कहा जाता है कि अग्नि परीक्षा के पश्चात धरती माता फट पड़ी और वहां से एक उष्ण कुंड प्रकट हुआ, जिसका जल आज भी गर्म है। युग बीत गए, ऋतुएं बदलीं, लेकिन सीताकुंड का तप्त जल आज भी उसी तरह श्रद्धालुओं को चमत्कृत करता है, मानो माता सीता की अग्नि-साक्षी आज भी यहां जीवित हो।
मुंगेर जिला मुख्यालय से लगभग आठ किलोमीटर पूर्व, नौवागढ़ी उत्तरी पंचायत में स्थित यह तीर्थ साल भर श्रद्धालुओं से गुलजार रहता है। सीताकुंड की सबसे बड़ी विशेषता यह है कि यहां का जल बारहों महीने गर्म रहता है। कड़ाके की ठंड भी इसके ताप को कम नहीं कर पाती।
मंदिर परिसर में सीताकुंड के अतिरिक्त चार अन्य कुंड भी स्थित हैं, जिनके नाम भगवान राम, लक्ष्मण, भरत और शत्रुघ्न के नाम पर रखे गए हैं, लेकिन इन कुंडों का जल सामान्य या ठंडा रहता है। यही अंतर सीताकुंड को दिव्य और रहस्यमय बनाता है।
देश के कोने-कोने से श्रद्धालु यहां स्नान कर पुण्य अर्जित करने पहुंचते हैं। विशेष रूप से माघ महीने में यहां भव्य माघी मेले का आयोजन होता है।
वर्ष 2026 में 1 फरवरी से शुरू हुआ यह मेला पूरे एक महीने तक चलता है और पहली बार इसे राजकीय मेले का दर्जा मिला है। मेले के दौरान हजारों श्रद्धालु पवित्र कुंड में स्नान कर माता सीता और भगवान राम की आराधना करते हैं।
सीताकुंड का गर्म जल आज भी श्रद्धालुओं के लिए आस्था का विषय है और वैज्ञानिकों के लिए एक अनसुलझा रहस्य। इतिहासकार बताते हैं कि इस कुंड की लंबाई और चौड़ाई लगभग 20 फीट तथा गहराई करीब 12 फीट है। बावजूद इसके, इसके उष्ण जल का स्रोत आज तक रहस्य ही बना हुआ है। शायद यही कारण है कि सीताकुंड केवल एक तीर्थ नहीं, बल्कि श्रद्धा और रहस्य का अनंत अध्याय है, जहां विज्ञान भी नतमस्तक नजर आता है।