Krishna Janmashtami: अनंत स्वरूप श्रीकृष्ण- ऐसा अद्भूत किरदार, जिसकी गहराई में ज्ञान भी खो जाए,बांसुरी से सुदर्शन चक्र तक-विरोधाभासों और असीम प्रेम से रचा माधव का पढ़िए अद्भुत चरित

Krishna Janmashtami: अपने केशव का, माधव का, गोविंद का, कान्हा का, कृष्ण का जन्मदिवस है। किस नाम से पुकारें उन्हें? बड़े-बड़े ज्ञानी, मुनि और विद्वान भी जिनके व्यक्तित्व की पूरी गहराई नहीं नाप पाए, फिर हम भला किस खेत की मूली हैं।...

Krishna The Complete Character Still Inspiring the World Tod
अनंत स्वरूप श्रीकृष्ण- फोटो : Sanya Raj Pandey

Krishna Janmashtami:  कृष्ण का चरित्र वास्तव में एक ऐसा सागर है, जिसकी गहराई को समेटना किसी एक रचनाकार या किसी एक ग्रंथ के बस की बात नहीं है। आज अपने केशव का,माधव का,कृष्ण का, किनका कहे,जिनके एक हजार नाम हैं,उनका जन्मदिवस है। एक ऐसे किरदार का जिसकी व्याख्या बड़े बड़े ज्ञानी भी नहीं कर पाए। फिर हम भला कौन सी चीज है। लेकिन दुनिया भर के किरदारों में कृष्ण का पूरा जीवन प्रेरणास्रोत रहा है। इसीलिए नहीं की वो भगवान विष्णु के अवतार थे। इसलिए भी नहीं की हमारे देश में उन्हें भगवान का दर्जा प्राप्त है। बल्कि इसलिए कि कृष्ण का पूरा जीवन हमें संदेश देता है। जिससे हम अपनी जिंदगी को खुशनुमा माहौल में जी सके। उनके किरदार में बालपन है, नटखटापन है, अठखेलियां हैं तो प्रेम भी,छल भी और माया भी है। 

कृष्ण के किरदार में दया है, ममता है तो संवेदनशीलता भी है। उनमें गंभीरता ऐसी है की दुनिया उन्हें योगेश्वर कहकर पुकारती है। और ज्ञान ऐसा कि बोलना शुरू किया तो आज दुनिया के सामने भागवत गीता है। आज के हिसाब कृष्ण जितने अच्छे कलाकार हैं,उससे अच्छे वक्ता हैं,योद्धा हैं,राजा है, मित्र हैं, प्रेमी हैं,संत हैं, शिष्य हैं, कारोबारी हैं। कथावाचक हैं, मोटिवेशनल स्पीकर हैं, राजनेता हैं, रणनीतिकार हैं। क्या नहीं है कृष्ण के किरदार में। आज के परिप्रेक्ष्य में उन्हें कंप्लीट मैन कहा जाता है। तभी तो प्रभु श्रीराम के जीवन पर बाबा तुलसीदास ने रामचरितमानस लिख दिया। लेकिन कृष्णचरितमानस शायद ही कोई लिख पाया हो। 

जो कृष्ण को थोड़ा भी जान पाया। हैरान हो जाएगा। ऐसा कैसे हो सकता है की बचपन में जिसने साक्षात मौत के सिर पर नाच किया हो। जिसके पास आवाज ऊंची करने पर दंड देने की क्षमता हो,वह ९९ गलतियां माफ करता है।   जिसके हाथ में महाशक्तिशाली सुदर्शन चक्र हो,वह बांसुरी की मधुर धुन निकालता हो। जो लाज को नजरअंदाज करती गोपियों के कपड़े चुराता है। लेकिन लाज बचाने के सखी द्रौपदी को इतने कपड़े देता है की दुशासन भी उसे खींच नहीं पाता है। 

एक ऐसा किरदार जिसके पास द्वारिका का वैभव हो,लेकिन फटेहाल सुदामा उसका मित्र हो। जो पत्नी के साथ महलों में रहता हो, और प्रेमिका के साथ मंदिरों में पूजा जाता है। जिसके पास शौर्य हो,शोहरत हो वह खुशी खुशी सारथि मतलब आज का ड्राइवर बनने को तैयार हो। जिसने बचपन में ही अपने मुख में मां को पूरी दुनिया दिखा दी, अपने मित्र अर्जुन को रणभूमि में पूरी कायनात के दर्शन करा दिए। जिसने मां की गोद में रहकर पूतना जैसी राक्षसी का वध किया। उनका देहावसान एक बहेलिया की तीर लगने से हो गया।।उनका चरित्र जितना पढ़ेंगे, उतना ही उलझेंगे। जितना समझेंगे, उतना ही नया सवाल सामने आएगा। सच कहें तो कृष्ण को समझते-समझते कभी-कभी दिमाग का दही हो जाएगा, लेकिन शायद यही उनकी सबसे बड़ी खूबसूरती है।आज उसी अद्भुत व्यक्तित्व, उस योगेश्वर, उस मुरलीधर, उस सखा, उस सारथी और हमारे आराध्य श्रीकृष्ण का जन्मदिवस है।

राजगीर सिंह की कलम से...