Dhanteras 2026: धनतेरस और दिवाली पर कैसी खरीदें लक्ष्मी-गणेश की मूर्ति? जानें सही रंग, आकार और मुद्रा
Dhanteras 2026: धनतेरस और दिवाली पर लक्ष्मी-गणेश की मूर्ति खरीदने से पहले जानें सही मुद्रा, रंग, आकार और मूर्ति से जुड़ी वास्तु मान्यताएं।
Dhanteras 2026: धनतेरस और दिवाली के मौके पर माता लक्ष्मी और भगवान गणेश की नई मूर्ति घर लाना शुभ माना जाता है। दिवाली की पूजा में नई लक्ष्मी-गणेश प्रतिमा स्थापित करने की परंपरा लंबे समय से चली आ रही है। धार्मिक मान्यता है कि इससे घर में सुख-समृद्धि और सकारात्मकता बनी रहती है।
वास्तु गुरु मान्या के अनुसार, लक्ष्मी-गणेश की मूर्ति खरीदते समय केवल उसकी सुंदरता नहीं, बल्कि आकार, रंग, मुद्रा और बनावट का भी ध्यान रखना चाहिए। वास्तु मान्यताओं के मुताबिक, प्रतिमा का सही चुनाव पूजा के लिए शुभ माना जाता है। आइए जानते हैं कि धनतेरस या दिवाली पर लक्ष्मी-गणेश की मूर्ति खरीदते समय किन बातों का ध्यान रखना चाहिए।
1. कैसी होनी चाहिए लक्ष्मी-गणेश की मूर्ति?
वास्तु गुरु मान्या के अनुसार, माता लक्ष्मी की ऐसी मूर्ति खरीदनी चाहिए जिसमें वे कमल के फूल पर बैठी हों। वास्तु मान्यता में बैठी हुई मुद्रा को घर के लिए शुभ माना जाता है। मान्यता है कि खड़ी हुई मुद्रा वाली लक्ष्मी की प्रतिमा घर में धन के स्थिर न रहने का संकेत मानी जाती है।
माता लक्ष्मी के हाथ से धन की वर्षा होती हुई दिखाई दे, ऐसी प्रतिमा को भी शुभ माना जाता है। वहीं, भगवान गणेश की सूंड बाईं ओर मुड़ी हुई होनी चाहिए। ऐसी प्रतिमा को वाममुखी गणेश कहा जाता है और इसे गृहस्थ जीवन के लिए शुभ माना जाता है।
2. किस रंग की मूर्ति खरीदना शुभ माना जाता है?
वास्तु मान्यताओं के अनुसार, माता लक्ष्मी और भगवान गणेश की मूर्ति के लिए गुलाबी, सुनहरा और हल्का पीला रंग शुभ माना जाता है। प्रतिमा पर लाल, गुलाबी या पीले रंग के वस्त्र होने चाहिए।
वास्तु गुरु मान्या के अनुसार, काले या बहुत गहरे रंग की मूर्तियां खरीदने से बचना चाहिए। हालांकि, यह धार्मिक और वास्तु से जुड़ी मान्यता है।
3. मूर्ति का आकार कितना होना चाहिए?
घर के मंदिर के लिए छोटी मूर्तियां रखने की सलाह दी जाती है। वास्तु गुरु मान्या के अनुसार, माता लक्ष्मी और भगवान गणेश की मूर्ति का आकार 1 से 9 इंच तक होना चाहिए।
उनका कहना है कि इससे बड़ी मूर्तियों की प्राण-प्रतिष्ठा और पूजा के नियम अधिक कठिन हो सकते हैं। इसलिए बड़ी प्रतिमाएं आमतौर पर मंदिरों में स्थापित की जाती हैं।
4. मूर्ति कहीं से टूटी या खंडित न हो
लक्ष्मी-गणेश की मूर्ति खरीदते समय अच्छी तरह जांच लें कि वह कहीं से टूटी, चटकी या क्षतिग्रस्त न हो। मूर्ति पर दरार या टूट-फूट नहीं होनी चाहिए। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, पूजा के लिए पूरी और साफ-सुथरी प्रतिमा का चयन करना चाहिए।
5. लक्ष्मी-गणेश की मूर्तियां अलग-अलग हों
वास्तु गुरु मान्या के अनुसार, माता लक्ष्मी और भगवान गणेश की मूर्तियां अलग-अलग होनी चाहिए। ऐसी प्रतिमा खरीदने से बचना चाहिए, जिसमें दोनों की मूर्तियां एक-दूसरे से जुड़ी हुई हों।
इसके अलावा, भगवान गणेश की प्रतिमा के साथ उनका वाहन मूषक और माता लक्ष्मी की प्रतिमा के साथ उल्लू या हाथी का चित्रण होना चाहिए। ध्यान रखें कि हाथी को माता लक्ष्मी के साथ दिखाने की परंपरा में आमतौर पर गज या हाथियों का उल्लेख होता है।
मूर्ति खरीदते समय इन बातों का भी रखें ध्यान
धनतेरस या दिवाली पर लक्ष्मी-गणेश की मूर्ति खरीदते समय उसकी बनावट, सफाई और गुणवत्ता जरूर देखें। प्रतिमा ऐसी होनी चाहिए जिसे घर के मंदिर में आसानी से स्थापित किया जा सके। पूजा के लिए मूर्ति चुनते समय परिवार की परंपरा और अपनी श्रद्धा को भी महत्व दें। वास्तु और धार्मिक नियम अलग-अलग परंपराओं में अलग हो सकते हैं। इसलिए इन्हें मान्यता के रूप में ही देखना चाहिए, किसी निश्चित परिणाम की गारंटी के रूप में नहीं।