शरीर पर चोट नहीं तो दुष्कर्म नहीं? पटना हाईकोर्ट ने तोड़ी यह धारणा, सुनाया ऐतिहासिक फैसला

हाई कोर्ट ने सुप्रीम कोर्ट के पूर्व फैसलों का हवाला दिया और कहा कि चिकित्सीय रिपोर्ट में बाहरी चोटों का न होना बलात्कार के आरोप को स्वतः खारिज नहीं करता।

Patna High Court
Patna High Court - फोटो : news4nation

Patna High Court : पटना हाईकोर्ट ने एक नाबालिग (दिव्यांग) लड़की के साथ हुए कथित सामूहिक दुष्कर्म के मामले में आरोपियों के खिलाफ लिए गए संज्ञान आदेश को रद्द करने से इनकार कर दिया है। हाईकोर्ट ने स्पष्ट और कड़ा संदेश देते हुए टिप्पणी की कि पीड़िता के शरीर पर चोट के निशान न मिलना अपने आप में यह साबित करने के लिए पर्याप्त नहीं है कि दुष्कर्म की घटना नहीं हुई थी। यह दुष्कर्म एक कानूनी निष्कर्ष है, न कि केवल एक चिकित्सीय निष्कर्ष।  


इस मामले की सुनवाई करते हुए हाई कोर्ट ने सुप्रीम कोर्ट के पूर्व फैसलों का हवाला दिया और कहा कि चिकित्सीय रिपोर्ट में बाहरी चोटों का न होना बलात्कार के आरोप को स्वतः खारिज नहीं करता। इसके साथ ही, पीड़िता के कपड़ों पर मिले खून के धब्बों के कारण (चाहे वह माहवारी हो या यौन हमले का परिणाम) और पुलिस जांच में हेरफेर या साक्ष्यों को नष्ट करने जैसे दावों को तथ्य से जुड़े विवादित विषय माना। 


हाईकोर्ट के अनुसार, इन सभी बिंदुओं का अंतिम फैसला विचारण (ट्रायल) के दौरान ही किया जा सकता है।निचली अदालत के फैसले को बरकरार रखते हुए हाईकोर्ट ने माना कि क्षेत्राधिकार वाले मजिस्ट्रेट के पास पुलिस की क्लोजर रिपोर्ट से अलग राय बनाने और उपलब्ध सामग्रियों के आधार पर संज्ञान लेने का पूरा कानूनी अधिकार है। कोर्ट ने संज्ञान के आदेश को तर्कसंगत मानते हुए याचिका को रद्द कर दिया।