Bihar love jihad: नाम बदलकर कोचिंग संचालक मोहम्मद फंटू लड़कियों से करता था अश्लील हरकत, थाने पर मामला दबाने का आरोप, एसपी के आदेश पर केस दर्ज, इलाके में भारी तनाव
Bihar love jihad: कोचिंग संचालक मोहम्मद फंटू नाम बदलकर आर्यन सिंह बनकर छात्राओं के साथ अश्लील हरकतें करता था।थाने में महिला पुलिस पदाधिकारी ने शिकायत करने पहुंची छात्रा को कानून की राह दिखाने के बजाय गलत तरीके से समझाकर समझौते का दबाव बनाया।
Bihar love jihad: बिहार से सामने आया यह मामला अब सिर्फ एक कोचिंग सेंटर तक सीमित नहीं रहा, बल्कि पुलिसिया भूमिका, प्रशासनिक चुप्पी और सामाजिक चिंता का बड़ा सवाल बन चुका है। कटिहार के मनिहारी थाना क्षेत्र में कोचिंग संचालक मोहम्मद फंटू पर आरोप है कि वह अपना नाम बदलकर आर्यन सिंह बनकर छात्राओं के साथ अश्लील हरकतें करता था। इस मामले में एक छात्रा द्वारा मनिहारी थाने में केस दर्ज कराने और कोर्ट में बयान देने के बाद मामला पूरी तरह तूल पकड़ चुका है।
पीड़िता का आरोप है कि जब वह पहली बार शिकायत लेकर मनिहारी थाना पहुंची, तो वहां तैनात एक महिला पुलिस पदाधिकारी ने उसे कानून की राह दिखाने के बजाय गलत तरीके से समझाकर समझौते का दबाव बनाया। आरोप है कि मामले को रफा-दफा करने की कोशिश की गई। यही वजह है कि अब उस महिला पुलिस पदाधिकारी की भूमिका भी शक के घेरे में आ गई है। हालांकि बाद में एसपी के हस्तक्षेप से प्राथमिकी दर्ज की गई, लेकिन तब तक कई सवाल हवा में तैर चुके थे।
इस पूरे प्रकरण में अब सांस्कृतिक संरक्षण परिषद कूद पड़ी है। परिषद के पदाधिकारियों ने पीड़ित लड़कियों के घर से लेकर मनिहारी थाना तक जाकर अपने स्तर पर जांच की और कई गंभीर बिंदुओं को सामने रखने का दावा किया है। परिषद का कहना है कि यह सिर्फ एक व्यक्ति का अपराध नहीं, बल्कि एक सुनियोजित पैटर्न हो सकता है, जिसकी गहराई तक जांच जरूरी है।
सांस्कृतिक संरक्षण परिषद इस मामले को लव-जिहाद और फीमेल ट्रैफिकिंग जैसे गंभीर सामाजिक अपराधों से जोड़कर देख रही है। परिषद ने जिलाधिकारी से मुलाकात कर पूरे मामले की सीबीआई जांच की मांग की है। उनका तर्क है कि जिस तरह केरल फाइल ने एक राज्य की सच्चाई को उजागर किया, उसी तरह अब सीमांचल फाइल की परतें खोलने की जरूरत है।
फिलहाल आरोपी मोहम्मद फंटू फरार बताया जा रहा है। पुलिस उसकी तलाश में छापेमारी का दावा कर रही है, लेकिन गिरफ्तारी न होना कई सवाल खड़े कर रहा है। पीड़ित परिवारों में डर और गुस्सा दोनों है, वहीं आम लोगों के बीच यह चर्चा तेज है कि अगर समय रहते कार्रवाई होती, तो शायद मामला इतना नहीं बढ़ता।
अब निगाहें प्रशासन पर टिकी हैं क्या यह केस महज एक एफआईआर तक सिमटेगा, या फिर सीबीआई जांच के जरिए सच्चाई की पूरी तस्वीर सामने आएगी? यही सवाल कटिहार से लेकर सीमांचल तक गूंज रहा है।
रिपोर्ट- श्याम कुमार सिंह