Ex-RJD MLA अरुण यादव और परिवार के खिलाफ चार्जशीट दाखिल,ED ने 36.66 करोड़ की बेनामी संपत्ति का किया खुलासा

बिहार में राजद के पूर्व विधायक अरुण यादव और उनके परिवार के खिलाफ ईडी ने मनी लॉन्ड्रिंग का आरोप पत्र दाखिल किया है। जांच में सामने आया है कि यादव परिवार ने 36 करोड़ रुपये की अवैध संपत्ति अर्जित की है.

ED files chargesheet against ex RJD MLA Arun Yadav and famil
Ex-RJD MLA अरुण यादव और परिवार के खिलाफ चार्जशीट दाखिल- फोटो : news 4 nation

बिहार में राजद के पूर्व विधायक अरुण यादव और उनके परिवार के खिलाफ ईडी ने मनी लॉन्ड्रिंग का आरोप पत्र दाखिल किया है। प्रवर्तन निदेशालय (ED) के पटना जोनल कार्यालय ने पूर्व विधायक अरुण यादव (उर्फ अरुण कुमार सिंह), उनकी पत्नी किरण देवी, राजेश कुमार रंजन, दीपू कुमार और मेसर्स किरण दुर्गा कॉन्ट्रैक्टर्स प्राइवेट लिमिटेड के खिलाफ एक बड़ी कानूनी कार्रवाई की है। जांच एजेंसी ने धन शोधन (मनी लॉन्ड्रिंग) के मामले में पटना की विशेष PMLA अदालत में 'अभियोजन शिकायत' (Prosecution Complaint) दाखिल की है। यह कार्रवाई बिहार पुलिस और विशेष सतर्कता इकाई द्वारा दर्ज की गई विभिन्न एफआईआर के आधार पर की गई है।

अवैध खनन और भ्रष्टाचार के जरिए अपराध की कमाई

ED की जांच में यह खुलासा हुआ है कि आरोपियों ने आपराधिक गतिविधियों के माध्यम से करोड़ों रुपये की संपत्ति अर्जित की है। इस मामले में अवैध रेत खनन, सार्वजनिक पद का दुरुपयोग और भ्रष्टाचार को आय का मुख्य जरिया बताया गया है। इसके अलावा, आरोपियों पर धोखाधड़ी, जबरन वसूली और भारतीय दंड संहिता (IPC) की विभिन्न धाराओं के तहत आय से अधिक संपत्ति रखने का भी गंभीर आरोप है।

आय और संपत्ति के बीच ₹36 करोड़ से अधिक का भारी अंतर

जांच के दौरान वित्तीय विश्लेषण में चौंकाने वाले आंकड़े सामने आए हैं। वित्तीय वर्ष 2014-15 से 2024-25 के बीच अरुण यादव और उनके परिवार ने लगभग ₹39.31 करोड़ की संपत्ति बनाई। जबकि इसी अवधि के दौरान उनकी कुल वैध आय केवल ₹2.65 करोड़ ही पाई गई। इस प्रकार, जांच एजेंसी ने लगभग ₹36.66 करोड़ की आय से अधिक (Disproportionate Assets) संपत्ति का आकलन किया है, जिसका कोई वैध स्रोत नहीं मिला।

मनी लॉन्ड्रिंग और फंड लेयरिंग का जटिल तरीका

अवैध रूप से कमाए गए धन को सफेद करने के लिए आरोपियों ने कई तरीके अपनाए। प्रेस रिलीज के अनुसार, अवैध पैसे को भारी मात्रा में नकद जमा किया गया और डेयरी तथा पशुपालन व्यवसाय से होने वाली आय को बढ़ा-चढ़ाकर दिखाया गया ताकि काले धन को वैध घोषित किया जा सके। इसके अलावा, किरण दुर्गा कॉन्ट्रैक्टर्स प्राइवेट लिमिटेड कंपनी के माध्यम से फंड की 'लेयरिंग' की गई और इस पैसे का उपयोग पटना में कृषि भूमि, फ्लैट और वाणिज्यिक भूखंड खरीदने में किया गया।

करोड़ों की संपत्ति कुर्क और न्यायालय की कड़ी कार्रवाई

ED ने इस मामले में पहले ही कड़ी कार्रवाई करते हुए लगभग ₹21.38 करोड़ की अचल संपत्तियों को अस्थायी रूप से कुर्क कर लिया था, जिसकी पुष्टि PMLA के निर्णायक प्राधिकरण (Adjudicating Authority) ने भी कर दी है। वर्तमान में, विशेष अदालत ने आरोपियों के खिलाफ PMLA की धारा 3 और 4 के तहत दर्ज शिकायत को रिकॉर्ड पर ले लिया है। इस पूरे प्रकरण में अभी भी आगे की जांच जारी है ताकि अपराध से जुड़े अन्य पहलुओं का पता लगाया जा सके।