बिहार की 13 नाबालिग बच्चियों को देह व्यापार के अड्डे से कराया गया मुक्त, रोजाना करती थी 8 से 10 ग्राहकों को खुश
बड़े पैमाने पर देह व्यापार के धंधे में नाबालिग लड़कियों के इस्तेमाल और उनके शोषण की सूचना के बाद बिहार की 13 नाबालिग लड़कियों को मुक्त कराया गया है.
Bihar News : बिहार की 13 नाबालिग बच्चियों को पश्चिम बंगाल के एक देह व्यापार के एक अड्डे से मुक्त कराया गया है। पश्चिम बंगाल के उत्तर दीनाजपुर के इस्लामपुर थाना क्षेत्र में देह व्यापार के एक अड्डे पर मारे गए छापे में पुलिस ने बिहार की 13 नाबालिग बच्चियों सहित कुल 17 बच्चियों को मुक्त कराया। मुक्त कराई गई अन्य लड़कियों में तीन पश्चिम बंगाल की जबकि एक असम की है। इनमें से सबसे छोटी बच्ची 11 साल की है जो कि किशनगंज जिले की रहने वाली है जबकि अन्य बच्चियां बिहार के अलग-अलग जिलों की हैं। इन सभी की उम्र 13 से 17 के बीच है।
सभी बच्चियों को बाल कल्याण समिति के संरक्षण में भेज दिया गया जहां काउंसलिंग के बाद उन्हें सुरक्षित आश्रय गृह भेज दिया गया। पुलिस ने ट्रैफिकिंग व पॉक्सो की धाराओं के तहत अड्डे के चार संचालकों को गिरफ्तार कर लिया है जबकि कुछ आरोपी फरार हैं। छापे की यह कार्रवाई गैरसरकारी संगठनों एसोसिएशन फॉर वालंटरी एक्शन (एवीए) और कोसी लोक मंच की सूचना और निशानदेही पर हुई। ये दोनों ही संगठन बाल अधिकारों की सुरक्षा व संरक्षण के लिए 250 से भी अधिक नागरिक समाज संगठनों के देश के सबसे बड़े नेटवर्क जस्ट राइट्स फॉर चिल्ड्रेन के सहयोगी हैं।
एवीए को उसके एक कार्यकर्ता ने इस अड्डे पर बड़े पैमाने पर देह व्यापार के धंधे में नाबालिग लड़कियों के इस्तेमाल और उनके शोषण की सूचना दी थी। इसके बाद एवीए और कोसी लोक मंच ने बिहार और बंगाल के कार्यकर्ताओं की एक साझा टीम गठित की जो दो महीने से लगातार इस अड्डे की निगरानी कर रही थी। यहां लगभग 30 से 40 नाबालिगों की उपस्थिति की पुष्टि हो जाने के बाद टीम ने जिले के पुलिस अधीक्षक को इसकी सूचना दी। पुलिस अधीक्षक ने तत्परता से कार्रवाई की और पुलिस टीम ने एवीए और कोसी लोक मंच के साथ मिलकर पूरी तैयारी के साथ इस अड्डे पर छापा मार कर 17 नाबालिग लड़कियों को मुक्त कराया। संवेदनशील इलाका होने के मद्देनजर इस दौरान ड्रोन से भी निगरानी की गई लेकिन इसके बावजूद कुछ आरोपी कई बच्चियों को लेकर फरार होने में कामयाब हो गए। शोषण की दास्तान सुनाते हुए मुक्त कराई गई बच्चियों ने पुलिस को बताया कि उन्हें रोजाना 8 से 10 ग्राहकों को खुश करना पड़ता था और अड्डे के संचालक इसके एवज में उन्हें एक धेला भी नहीं देते थे।
बताते चलें कि सितंबर 2025 में भी एसोसिएशन फॉर वालंटरी एक्शन की सूचना पर जिले में इसी तरह के देह व्यापार के एक अड्डे से पुलिस ने नौ नाबालिग लड़कियों को मुक्त कराया था लेकिन आरोपियों ने थाने पर हमला बोल दिया और सभी बच्चियों को लेकर भागने में कामयाब रहे। इस त्वरित कार्रवाई के लिए पश्चिम बंगाल सरकार की प्रशंसा करते हुए जस्ट राइट्स फॉर चिल्ड्रेन के राष्ट्रीय संयोजक रवि कांत ने कहा, “इतनी बड़ी संख्या में वेश्यावृत्ति के अड्डे से नाबालिग लड़कियों का मिलना इस बात को दर्शाता है ट्रैफिकिंग गिरोहों की जड़ें कितनी गहरी और पहुंच कितनी व्यापक है।
उन्होंने कहा कि ट्रैफिकिंग के जरिए 11-12 साल की लड़कियों को बिहार व असम से लाना व उन्हें देह व्यापार के धंधे में धकेलना एक घिनौनी सच्चाई है और इससे निपटने के लिए सरकार व प्रशासन को अपनी पूरी ताकत व संसाधनों के इस्तेमाल की जरूरत है। इस कार्रवाई से साफ है कि पश्चिम बंगाल सरकार व पुलिस में बच्चों की सुरक्षा व संरक्षण के लिए आवश्यक इच्छाशक्ति है। यह एक बड़ा बदलाव है।”