वीर कुंवर सिंह विजयोत्सव: कालिदास रंगालय में गूंजी शौर्य गाथा,शैलेंद्र प्रताप ने तेजस्वी यादव को किया सम्मानित

पटना के कालिदास रंगालय में वीर कुंवर सिंह का 168वां विजयोत्सव मनाया गया। शैलेंद्र प्रताप सिंह ने तेजस्वी यादव को सम्मानित किया और कुंवर सिंह के शौर्य व सामाजिक एकता पर विचार साझा किए।

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पटना के कालिदास रंगालय स्थित अनुसुइया सभागार में वीर कुंवर सिंह के 168वें विजयोत्सव के अवसर पर भव्य कार्यक्रम का आयोजन किया गया। भितिहरवा आश्रम जीवन कौशल ट्रस्ट द्वारा आयोजित इस समारोह में बिहार आर्ट थिएटर के छात्रों ने अपनी कला के माध्यम से बाबू कुंवर सिंह के अदम्य साहस और ऐतिहासिक संघर्षों को जीवंत कर दिया। मंच पर प्रस्तुत कुंवर सिंह की गाथा ने उपस्थित दर्शकों में राष्ट्रभक्ति और स्वाभिमान का संचार किया।


शैलेंद्र प्रताप सिंह ने तेजस्वी यादव को किया सम्मानित

विजयोत्सव के उपलक्ष्य में मुख्य वक्ता शैलेंद्र प्रताप सिंह ने बिहार विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष तेजस्वी यादव से मुलाकात की। इस शिष्टाचार भेंट के दौरान उन्होंने तेजस्वी यादव को अंगवस्त्र और स्मृति चिह्न (मोमेंटो) भेंट कर सम्मानित किया और विजयोत्सव की शुभकामनाएं दीं। इस मिलन को वैचारिक संगम के रूप में देखा गया, जहाँ राष्ट्र नायकों की विरासत को आगे बढ़ाने पर चर्चा हुई।

गांधी और कुंवर सिंह के विचारों की समानता पर जोर

कार्यक्रम को संबोधित करते हुए शैलेंद्र प्रताप सिंह ने कहा कि वीर कुंवर सिंह का संघर्ष केवल अंग्रेजों के खिलाफ नहीं, बल्कि अन्याय और सामाजिक असमानता के विरुद्ध भी था। उन्होंने महात्मा गांधी और बाबू कुंवर सिंह के आदर्शों की तुलना करते हुए कहा कि दोनों के मार्ग भले भिन्न रहे हों, लेकिन उनके विचारों की जड़ें स्वाभिमान और राष्ट्र के प्रति समर्पण में एक समान थीं। उन्होंने समाज में व्याप्त विभाजनकारी सोच और वर्तमान चुनौतियों पर भी चिंता व्यक्त की।


बहुआयामी व्यक्तित्व और राष्ट्रीय गौरव का प्रतीक

ट्रस्ट के सचिव प्रो. ज्ञान देव मणि त्रिपाठी और अन्य वक्ताओं ने वीर कुंवर सिंह को एक महान योद्धा के साथ-साथ उच्च आदर्शों वाला दार्शनिक और कर्मयोगी बताया। वक्ताओं ने इस बात पर जोर दिया कि 80 वर्ष की उम्र में उनका संघर्ष यह सिद्ध करता है कि देशभक्ति उम्र की मोहताज नहीं होती। कार्यक्रम में राकेश राव और कुमार अभिषेक रंजन सहित कई गणमान्य लोग उपस्थित रहे, जिन्होंने कुंवर सिंह की धर्मनिरपेक्ष और समावेशी सेना को आधुनिक भारत के लिए प्रेरणास्रोत बताया।