Raghav Chadda Resign : राघव चड्ढा ने दो सांसदों के साथ आम आदमी पार्टी से दिया इस्तीफा, पार्टी पर लगाए कई गंभीर आरोप

Raghav Chadda Resign : आम आदमी पार्टी के वरिष्ठ नेता राघव चड्ढा ने शुक्रवार को प्रेस कॉन्फ्रेंस कर पार्टी से अपने इस्तीफे की घोषणा कर दी। इस दौरान उन्होंने पार्टी नेतृत्व और संगठन की कार्यशैली पर कई गंभीर आरोप लगाए

Raghav Chadda Resign : राघव चड्ढा ने दो सांसदों के साथ आम आद
राघव चड्डा का इस्तीफा - फोटो : SOCIAL MEDIA

New Delhi : आम आदमी पार्टी (AAP) को अब तक का सबसे बड़ा झटका लगा है। पार्टी के प्रमुख चेहरे और राज्यसभा सांसद राघव चड्ढा ने पार्टी की प्राथमिक सदस्यता से इस्तीफा दे दिया है और भारतीय जनता पार्टी (BJP) का दामन थामने का ऐलान किया है। चड्ढा के साथ-साथ पार्टी के कई अन्य दिग्गज सांसदों के भी पाला बदलने की खबर है, जिससे दिल्ली से लेकर पंजाब तक की राजनीति में हड़कंप मच गया है। बताया जा रहा है कि पार्टी के लगभग दो-तिहाई सांसद भी अब 'आप' का साथ छोड़कर नए रास्ते तलाश रहे हैं।

इस्तीफे के बाद मीडिया को संबोधित करते हुए राघव चड्ढा काफी भावुक नजर आए। उन्होंने कहा कि जिस पार्टी को उन्होंने पिछले 15 वर्षों तक अपने खून-पसीने से सींचा था, वह अब अपने मूल सिद्धांतों और मार्ग से भटक गई है। उन्होंने गंभीर आरोप लगाते हुए कहा कि 'आप' अब देशहित के लिए नहीं, बल्कि निजी फायदों और स्वार्थों के लिए काम करने वाली संस्था बनकर रह गई है। चड्ढा ने स्पष्ट किया कि वे अब जनता के बीच रहकर नई ऊर्जा के साथ काम करेंगे।

संगठन में गहरी पैठ रखने वाले नेता संदीप पाठक ने भी पार्टी को अलविदा कह दिया है और भाजपा में शामिल होने की घोषणा की है। पाठक ने अपने अलगाव पर दुख व्यक्त करते हुए कहा कि उन्होंने कभी सपने में भी नहीं सोचा था कि ऐसे हालात पैदा होंगे। पिछले 10 वर्षों से पार्टी की मजबूती के लिए काम करने वाले पाठक ने कहा कि भारी मन से वे अपने रास्ते अलग कर रहे हैं। उनके इस कदम को आम आदमी पार्टी के संगठनात्मक ढांचे के लिए एक अपूरणीय क्षति माना जा रहा है।

इस्तीफों का यह सिलसिला यहीं नहीं थमा। राज्यसभा सांसद स्वाति मालीवाल, पूर्व भारतीय क्रिकेटर हरभजन सिंह और सांसद अशोक मित्तल ने भी आम आदमी पार्टी का साथ छोड़ दिया है। इन सभी दिग्गजों ने भारतीय जनता पार्टी की सदस्यता ग्रहण कर ली है। इसके साथ ही राजेंद्र गुप्ता ने भी भाजपा का दामन थाम लिया है। एक साथ इतने बड़े नामों का पार्टी छोड़ना यह संकेत देता है कि 'आप' के भीतर असंतोष की लहर काफी गहरी हो चुकी है।

राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि इन बड़े चेहरों के जाने से आम आदमी पार्टी के राष्ट्रीय विस्तार के सपनों को बड़ा धक्का लगा है। दिल्ली और पंजाब जैसे राज्यों में अपनी पैठ बना चुकी पार्टी के लिए यह आंतरिक संकट भविष्य की चुनावी चुनौतियों को और कठिन बना सकता है। दूसरी ओर, भाजपा इन नेताओं के अनुभव और प्रभाव का लाभ उठाकर आगामी चुनावों में अपनी स्थिति और मजबूत करने की तैयारी में दिख रही है।