खुश्बू सिंह हत्याकांड: पूर्व मंत्री के दामाद ने लगाई न्याय की गुहार, SIT जांच और सुरक्षा की मांग

पटना में वरुण कुमार सिंह ने बहन खुश्बू सिंह की संदिग्ध मौत पर प्रेस कॉन्फ्रेंस की। दहेज हत्या का आरोप लगाते हुए SIT जांच, आरोपियों की गिरफ्तारी और स्थायी सुरक्षा की मांग की।

खुश्बू सिंह हत्याकांड: पूर्व मंत्री के दामाद ने लगाई न्याय क

Patna - बिहार के पूर्व मंत्री संजीव प्रसाद टोनी के दामाद और उद्यमी वरुण कुमार सिंह ने अपनी बहन खुश्बू सिंह की संदिग्ध मौत के मामले में मंगलवार को पटना में प्रेस कॉन्फ्रेंस कर गंभीर आरोप लगाए हैं। वरुण सिंह ने अपनी बहन की मौत को एक सोची-समझी साजिश और दहेज हत्या करार देते हुए इस मामले में विशेष जांच दल (SIT) के गठन और आरोपियों की तत्काल गिरफ्तारी की मांग की है। उन्होंने यह भी खुलासा किया कि इस केस की पैरवी करने के कारण उनकी और उनके परिवार की जान को खतरा है, जिसके लिए उन्होंने सरकार से स्थायी सुरक्षा की गुहार लगाई है।

शादी के छह महीने बाद संदिग्ध परिस्थितियों में मौत

वरुण कुमार सिंह के अनुसार, उनकी छोटी बहन खुश्बू सिंह का विवाह 1 जून 2025 को मुजफ्फरपुर के ब्रह्मपुरा निवासी एनआरआई ई. सुधांशु सिंह के साथ हुआ था। आरोप है कि विवाह के समय से ही ससुराल पक्ष की ओर से फॉर्च्यूनर गाड़ी, एक करोड़ के गहने और 51 लाख रुपये नकद की मांग की जा रही थी। वरुण का दावा है कि अधिकांश मांगें पूरी करने के बावजूद, गाड़ी और दिल्ली में फ्लैट की अतिरिक्त मांग को लेकर खुश्बू को लगातार प्रताड़ित किया गया। अंततः 26 दिसंबर 2025 को उन्हें सूचना मिली कि खुश्बू की मौत जलने और दम घुटने से हो गई है।

पुलिस की कार्यप्रणाली और जांच पर उठाए सवाल

प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान वरुण ने मुजफ्फरपुर पुलिस की शुरुआती भूमिका पर कड़े सवाल खड़े किए। उन्होंने आरोप लगाया कि जब परिवार मौके पर पहुंचा, तो उन्हें शव को ठीक से देखने तक नहीं दिया गया और कमरे की स्थिति संदिग्ध थी। वरुण के अनुसार, स्थानीय पुलिस का रवैया आरोपियों के प्रति "असामान्य रूप से नरम" रहा। हालांकि सामाजिक दबाव के बाद पति सुधांशु सिंह को गिरफ्तार किया गया, लेकिन सास ममता सिंह और ससुर संजीव सिंह सहित अन्य मुख्य आरोपी अब भी पुलिस की पकड़ से बाहर हैं, जिन्हें कथित रूप से फरार होने का मौका दिया गया।

जानलेवा हमले और सुरक्षा की मांग

वरुण सिंह ने एक चौंकाने वाला दावा करते हुए कहा कि इस मामले को उठाने पर उन पर सरकारी सुरक्षाकर्मी की मौजूदगी में ही जानलेवा हमला किया जा चुका है। उन्हें लगातार धमकियां मिल रही हैं ताकि वे न्याय की लड़ाई छोड़ दें। इसी के मद्देनजर उन्होंने उपमुख्यमंत्री सह गृह मंत्री सम्राट चौधरी, डीजीपी विनय कुमार और अन्य वरिष्ठ अधिकारियों को आवेदन देकर अपने परिवार के लिए स्थायी सरकारी अंगरक्षक (Bodyguard) उपलब्ध कराने की मांग की है।

प्रशासन को दी चेतावनी: निष्पक्ष जांच की अपील

वरुण कुमार सिंह ने स्पष्ट किया कि यदि इस मामले की समयबद्ध और उच्चस्तरीय जांच नहीं हुई, तो साक्ष्यों के साथ छेड़छाड़ कर केस को कमजोर कर दिया जाएगा। उन्होंने चेतावनी दी कि यदि भविष्य में उनके या उनके परिवार के किसी सदस्य को कोई शारीरिक नुकसान होता है, तो इसकी पूरी जिम्मेदारी शासन और स्थानीय प्रशासन की होगी। उन्होंने आईजी तिरहुत और एसएसपी मुजफ्फरपुर से भी इस मामले में हस्तक्षेप कर फरार आरोपियों की कुर्की-जब्ती और गिरफ्तारी सुनिश्चित करने की अपील की है।

गृह विभाग के नियमों का हवाला (संदर्भित पत्र)

उल्लेखनीय है कि गृह विभाग (आरक्षी शाखा) द्वारा जारी हालिया निर्देशों के अनुसार, राज्य में कानून-व्यवस्था और सुरक्षा संबंधी आवेदनों का निष्पादन समय-सीमा के भीतर होना अनिवार्य है । वरुण सिंह ने भी प्रशासन से इसी तत्परता की उम्मीद जताई है ताकि एक मृत बेटी को न्याय मिल सके और पीड़ित परिवार सुरक्षित रह सके।