सप्तक्रांति एक्सप्रेस को इस शहर से चलाने की तैयारी? मुजफ्फरपुर में भारी विरोध और आक्रोश
सप्तक्रांति एक्सप्रेस को मुजफ्फरपुर से दरभंगा शिफ्ट करने की चर्चा पर उत्तर बिहार में विरोध तेज। यात्रियों का आरोप—साजिश के तहत मुजफ्फरपुर से छीनी जा रही हैं ट्रेनें।
Muzaffarapur - उत्तर बिहार की 'लाइफलाइन' कही जाने वाली सप्तक्रांति सुपरफास्ट एक्सप्रेस के मार्ग विस्तार और प्रारंभिक स्टेशन को बदलने की अटकलों ने बिहार की राजनीति और रेल गलियारों में तूफान खड़ा कर दिया है। एक कथित विभागीय पत्र वायरल होने के बाद मुजफ्फरपुर और चंपारण के यात्रियों में भारी आक्रोश है। लोगों का आरोप है कि एक साजिश के तहत मुजफ्फरपुर की ट्रेनें दूसरे जिलों को दी जा रही हैं।
मजदूरों की 'जीवनरेखा' पर संकट
विगत 21 वर्षों से सेवा दे रही यह ट्रेन उत्तर बिहार के उन लाखों मजदूरों के लिए एकमात्र सहारा है जो दिल्ली और आसपास के राज्यों में काम करते हैं। यात्रियों का कहना है कि मुजफ्फरपुर से ट्रेन खुलने के कारण जनरल बोगियों में उन्हें बैठने की जगह मिल जाती है। यदि यह दरभंगा से खुलने लगी, तो मुजफ्फरपुर पहुँचते-पहुँचते ट्रेन में पैर रखने की जगह भी नहीं बचेगी। आर्थिक रूप से कमजोर वर्ग के लिए यह ट्रेन किसी वरदान से कम नहीं है।
मुजफ्फरपुर vs दरभंगा: आंकड़ों की जंग
रेलवे के एक वरिष्ठ अधिकारी ने नाम न छापने की शर्त पर बताया कि मुजफ्फरपुर जंक्शन उत्तर बिहार का सबसे बड़ा स्टेशन है, जिसकी आय दरभंगा की तुलना में तीन गुना अधिक है। दरभंगा में न तो पर्याप्त प्लेटफार्म हैं और न ही सप्तक्रांति जैसी बड़ी ट्रेन के लिए 'वाशिंग पिट' की सुविधा। अधिकारी ने आशंका जताई कि संसाधनों की कमी के बावजूद फिजिबिलिटी रिपोर्ट मांगना केवल राजनीतिक दबाव का हिस्सा हो सकता है।
विधायक और सांसद आमने-सामने
इस मुद्दे पर राजनीतिक रार भी तेज हो गई है:
विधायक रंजन कुमार ने सख्त लहजे में कहा कि वह इस निर्णय को रोकने के लिए रेल मंत्री से मिलेंगे। उन्होंने इसे मुजफ्फरपुर के साथ अन्याय बताया।
सांसद शांभवी चौधरी द्वारा संसद में इस ट्रेन के विस्तार का मुद्दा उठाए जाने के बाद ही यह चर्चा तेज हुई है, जिससे क्षेत्र में पक्ष-विपक्ष के बीच कयासबाजी शुरू हो गई है।
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"पहले भी छीनी गई हैं कई ट्रेनें"
सामाजिक संगठनों और भाजपा नेता डॉ. मनोज कुमार सिंह ने याद दिलाया कि पवन, लिच्छवी, हरिहर, साबरमती, अमरनाथ और गरीबरथ जैसी महत्वपूर्ण ट्रेनें पहले ही मुजफ्फरपुर से छीनी जा चुकी हैं। अब सप्तक्रांति के साथ ऐसा हुआ तो सड़कों पर उतरकर आंदोलन किया जाएगा। 2025 में ही इस ट्रेन के 20 साल पूरे होने पर भव्य स्वागत किया गया था, जो लोगों के इससे जुड़ाव को दर्शाता है।
रेलवे का पक्ष: पत्र से इनकार
वहीं, समस्तीपुर रेल मंडल के जनसंपर्क पदाधिकारी आरके सिंह ने किसी भी आधिकारिक पत्र की प्राप्ति से इनकार किया है। उन्होंने कहा कि फिलहाल सप्तक्रांति के विस्तार का कोई आदेश नहीं मिला है। हालांकि, वायरल पत्र ने यात्रियों के बीच उत्सुकता और विरोध दोनों को जन्म दे दिया है।