पटना के कोतवाली के तीन सहायक दारोगा समेत 4 सस्पेंड,बंटी हत्याकांड में पुलिस पर गिरी गाज, छीछालेदर के बाद जागा महकमा, लापरवाही पर बड़ा एक्शन

पटना के बहुचर्चित बंटी यादव हत्याकांड में अब पुलिस महकमे के भीतर भी बड़ी कार्रवाई शुरू हो गई है। अपहरण के दौरान कथित लापरवाही बरतने के आरोप में चार पुलिसकर्मियों को तत्काल प्रभाव से निलंबित कर दिया गया है।

 Two Patna Cops Suspended After Banti Murder Case Backlash
कोतवाली थाने के तीन सहायक दारोगा निलंबित- फोटो : social Media

Patna Police: पटना के बहुचर्चित बंटी हत्याकांड में लगातार उठ रहे सवालों और पुलिस की कार्यप्रणाली पर हो रही किरकिरी के बाद आखिरकार पुलिस अफसर ने बड़ा कदम उठाया है।अपहरण के दौरान कथित लापरवाही बरतने के आरोप में चार पुलिसकर्मियों को तत्काल प्रभाव से निलंबित कर दिया गया है।यह कार्रवाई पटना सेंट्रल एसपी ममता कल्याणी ने की है। शुरुआती विभागीय जांच में ड्यूटी के दौरान गंभीर लापरवाही सामने आने के बाद यह फैसला लिया गया।निलंबित किए गए पुलिसकर्मियों में एएसआई प्रवीण कुमार पंकज, एएसआई अवधेश कुमार, एएसआई वीर बहादुर सिंह तथा गृह रक्षक सुदर्शन प्रसाद शामिल हैं। आदेश के मुताबिक निलंबन अवधि के दौरान चारों का मुख्यालय नवीन आरक्षी पुलिस केंद्र, पटना रहेगा। साथ ही सभी को तीन दिनों के भीतर अपना लिखित स्पष्टीकरण प्रस्तुत करने का निर्देश दिया गया है।दरअसल, 6 जुलाई की रात पटना जंक्शन इलाके से बंटी यादव का कथित तौर पर अपहरण किया गया था। विभागीय जांच में सामने आया कि उस समय डायल-112 और गश्ती ड्यूटी पर तैनात ये चारों पुलिसकर्मी घटनास्थल से महज करीब 100 मीटर की दूरी पर मौजूद थे। इसके बावजूद उन्हें घटना की भनक तक नहीं लगी और न ही कोई तत्काल हस्तक्षेप हुआ। विभाग ने इसे ड्यूटी के दौरान घोर लापरवाही मानते हुए अनुशासनात्मक कार्रवाई की है।

बंटी यादव के अपहरण के बाद परिजन लगातार पुलिस से कार्रवाई की गुहार लगाते रहे। बाद में पांच दिन बाद उनका शव पटना से करीब 60 किलोमीटर दूर अथमलगोला इलाके से बरामद हुआ। इस हत्याकांड के बाद पुलिस की शुरुआती कार्रवाई और गश्ती व्यवस्था पर लगातार सवाल उठ रहे थे।

अब चार पुलिसकर्मियों के निलंबन को इस बात का संकेत माना जा रहा है कि पुलिस विभाग अपने स्तर पर भी यह पता लगाने में जुटा है कि घटना के समय सुरक्षा व्यवस्था में आखिर कहां चूक हुई। यदि ड्यूटी पर तैनात पुलिसकर्मी घटनास्थल के इतने करीब मौजूद थे, तो अपहरण जैसी गंभीर वारदात की सूचना उन्हें क्यों नहीं मिली और तत्काल कार्रवाई क्यों नहीं हो सकी—यही सवाल विभागीय जांच का प्रमुख आधार बना हुआ है।

दरअसल, 6 जुलाई की देर रात पटना जंक्शन इलाके से 33 वर्षीय कारोबारी बंटी कुमार का कथित तौर पर 8 से 10 बदमाशों ने अपहरण कर लिया था। इस वारदात का सीसीटीवी फुटेज भी सामने आया, जिसमें कुछ लोग बंटी को जबरन ले जाते दिखाई दिए। इसके बाद पूरे शहर में हड़कंप मच गया और पुलिस ने कई टीमों का गठन कर तलाश शुरू की।परिजनों का आरोप है कि घटना वाली रात ही उन्होंने पुलिस को पूरी जानकारी दी थी। इतना ही नहीं, संदिग्धों के बारे में भी जानकारी दी गई और सीसीटीवी फुटेज उपलब्ध होने के बावजूद शुरुआती स्तर पर प्रभावी कार्रवाई नहीं हुई। परिवार का कहना है कि यदि पुलिस समय रहते सख्ती से कार्रवाई करती, तो शायद बंटी की जान बचाई जा सकती थी। हालांकि, इन आरोपों की जांच अभी भी जारी है।

पुलिस करीब पांच दिनों तक बंटी की तलाश करती रही, लेकिन उसे जीवित बरामद नहीं कर सकी। बाद में पटना से करीब 60 किलोमीटर दूर अथमलगोला इलाके से उसका शव मिला। पुलिस के अनुसार, बदमाशों ने हत्या के बाद शव की पहचान मिटाने की कोशिश की थी। शव की हालत बेहद खराब थी और पहचान छिपाने के लिए चेहरे समेत अन्य हिस्सों को क्षतिग्रस्त किया गया था।

बंटी के परिजनों का आरोप है कि वह इलाके में कथित तौर पर चल रहे देह व्यापार का विरोध कर रहा था और इसी वजह से उसे अपराधियों ने निशाना बनाया। हालांकि, हत्या के पीछे यही कारण था या नहीं, इसकी आधिकारिक पुष्टि जांच पूरी होने के बाद ही हो सकेगी।

इस हत्याकांड के बाद पुलिस की कार्यशैली पर लगातार सवाल उठते रहे। विपक्ष से लेकर आम लोगों तक ने शुरुआती जांच और कार्रवाई पर सवाल खड़े किए। मामला लगातार सुर्खियों में रहा, जिसके बाद पुलिस ने कई छापेमारियां भी कीं और कथित अवैध गतिविधियों के खिलाफ अभियान तेज किया।

अब कोतवाली थाने के दो दारोगाओं के निलंबन को उसी कड़ी का हिस्सा माना जा रहा है। यह कार्रवाई इस बात का संकेत है कि पुलिस विभाग अपने स्तर पर यह जांच कर रहा है कि शुरुआती चरण में कहीं कोई चूक या लापरवाही तो नहीं हुई।

फिलहाल बंटी हत्याकांड की जांच जारी है। पुलिस मुख्य साजिशकर्ताओं और पूरे घटनाक्रम की कड़ियों को जोड़ने में जुटी है। वहीं, दो पुलिस अधिकारियों पर हुई कार्रवाई ने यह स्पष्ट कर दिया है कि इस हाई-प्रोफाइल मामले में अब केवल अपराधियों की ही नहीं, बल्कि पुलिस की भूमिका भी जांच के दायरे में है।

रिपोर्ट- रंजीत कुमार