Bihar News : बिहार की तीन पारंपरिक कला एवं शिल्प विधाओं को मिला जीआई टैग, मंत्री डॉ. प्रमोद कुमार ने जताई प्रसन्नता

Bihar News : बिहार की राज्य की तीन पारंपरिक विरासतों को आधिकारिक तौर पर भौगोलिक संकेतक (GI Tag) प्रदान किया गया है। जिसको लेकर मंत्री ने प्रसन्नता जाहिर की है.....पढ़िए आगे

Bihar News : बिहार की तीन पारंपरिक कला एवं शिल्प विधाओं को म
बिहार की बड़ी उपलब्धि - फोटो : SOCIAL MEDIA

PATNA : कला एवं संस्कृति विभाग, बिहार सरकार के मंत्री डॉ. प्रमोद कुमार ने नालंदा की बावन बूटी साड़ी एवं फैब्रिक, गया के पत्थरकट्टी स्टोन क्राफ्ट तथा भोजपुर की पिढ़िया पेंटिंग को भौगोलिक संकेतक (GI) टैग प्राप्त होने पर प्रसन्नता व्यक्त की है। मंत्री ने कहा कि यह उपलब्धि बिहार की समृद्ध सांस्कृतिक, कलात्मक एवं शिल्प परंपरा के लिए गौरव का विषय है। जीआई टैग प्राप्त होने से इन उत्पादों की प्रामाणिकता, विशिष्ट पहचान तथा वैश्विक स्तर पर उनकी स्वीकार्यता को नई मजबूती मिलेगी। इससे न केवल बिहार की सांस्कृतिक विरासत को देश-दुनिया में और अधिक प्रतिष्ठा प्राप्त होगी, बल्कि इनसे जुड़े शिल्पकारों, बुनकरों और कलाकारों के लिए भी नए अवसर सृजित होंगे।

नालंदा की बावन बूटी साड़ी अपनी विशिष्ट बुनाई, पारंपरिक डिजाइन एवं उत्कृष्ट हस्तकला के लिए प्रसिद्ध है। वहीं गया का पत्थरकट्टी स्टोन क्राफ्ट सदियों पुरानी शिल्प परंपरा का प्रतिनिधित्व करता है और पत्थरों पर की जाने वाली बारीक नक्काशी के लिए देशभर में जाना जाता है। भोजपुर की पिढ़िया पेंटिंग बिहार की एक महत्वपूर्ण लोक चित्रकला परंपरा है, जो लोक जीवन, पारिवारिक संस्कारों तथा सांस्कृतिक परंपराओं को जीवंत रूप में अभिव्यक्त करती है।

डॉ. प्रमोद कुमार ने कहा कि बिहार की कला एवं सांस्कृतिक विरासत देश की अमूल्य धरोहर है। राज्य सरकार और कला एवं संस्कृति विभाग पारंपरिक कला, लोक संस्कृति एवं शिल्प विधाओं के संरक्षण, संवर्धन और प्रचार-प्रसार के लिए निरंतर कार्य कर रहे हैं। जीआई टैग जैसी मान्यताएं इन कलाओं को राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय मंच पर नई पहचान दिलाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती हैं।

मंत्री ने इस उपलब्धि पर राज्य के सभी शिल्पकारों, बुनकरों, कलाकारों एवं संबंधित संस्थाओं को हार्दिक बधाई एवं शुभकामनाएं दी हैं। उन्होंने विश्वास व्यक्त किया कि बिहार की पारंपरिक कला और शिल्प की यह पहचान भविष्य में और अधिक सशक्त होगी तथा राज्य की सांस्कृतिक विरासत को वैश्विक स्तर पर नई प्रतिष्ठा प्राप्त होगी।