'मेरा सीएम-तेरा सीएम' - दरभंगा 2.25 करोड़ की लूट और शराब से हुई मौतों पर तेजस्वी ने सरकार को घेरा, कहा - अपराध पर गंभीर नहीं

नेता प्रतिपक्ष तेजस्वी यादव ने शराबबंदी कानून और दरभंगा लूट को लेकर बिहार सरकार को घेरा है। उन्होंने 1300 से अधिक मौतों का दावा करते हुए जवाबदेही तय करने की मांग की।

'मेरा सीएम-तेरा सीएम' - दरभंगा 2.25 करोड़ की लूट और शराब से

Patna - बिहार में हाल के दिनों में हुई जहरीली शराब से मौतों और अपराधिक वारदातों ने राज्य सरकार की 'शराबबंदी नीति' को कठघरे में खड़ा कर दिया है। विपक्षी दल राजद (RJD) ने इसे एक बेहद गंभीर मुद्दा बताते हुए सरकार की नीतियों पर सवाल उठाए हैं। इस घटनाक्रम ने एक बार फिर बिहार में शराबबंदी कानून की जमीनी हकीकत और इसकी प्रभावशीलता पर राज्यव्यापी बहस छेड़ दी है।

तेजस्वी यादव ने आंकड़ों के साथ सरकार को घेरा 

नेता प्रतिपक्ष तेजस्वी यादव ने कड़ा रुख अपनाते हुए कहा कि जहरीली शराब से मौत की यह कोई पहली घटना नहीं है। उन्होंने सरकारी आंकड़ों का हवाला देते हुए दावा किया कि शराबबंदी लागू होने के बाद से अब तक 1300 से ज्यादा लोगों की जान जा चुकी है। तेजस्वी ने यह भी आरोप लगाया कि वास्तविक आंकड़ा सरकारी फाइलों में दर्ज संख्या से कहीं अधिक है, जिसे प्रशासन द्वारा दबाने की कोशिश की जा रही है। उन्होंने सरकार से इस पर सीधी जवाबदेही तय करने की मांग की है।

कानून-व्यवस्था पर बढ़ता दबाव 

सिर्फ शराब ही नहीं, बल्कि राज्य में बढ़ती आपराधिक घटनाओं ने भी सरकार की मुश्किलें बढ़ा दी हैं। दरभंगा में हुई बड़ी लूट और जहरीली शराब के ताज़ा मामलों ने पुलिस प्रशासन पर भारी दबाव पैदा कर दिया है। विपक्ष लगातार इन मुद्दों को सदन से लेकर सड़क तक उठा रहा है। तेजस्वी यादव का तर्क है कि जब शराब की तस्करी और लूट की घटनाएं सरेआम हो रही हैं, तो यह स्पष्ट है कि राज्य में कानून का इकबाल खत्म हो चुका है।

नीति की समीक्षा की उठ रही मांग 

विपक्षी खेमे से अब 'शराबबंदी नीति' की उच्चस्तरीय समीक्षा की मांग उठने लगी है। जानकारों का मानना है कि केवल कानून बना देना काफी नहीं है, बल्कि उसके क्रियान्वयन में हो रही चूक और पुलिस-माफिया गठजोड़ को तोड़ना जरूरी है। तेजस्वी यादव ने स्पष्ट किया कि सरकार को अपनी विफलताओं को स्वीकार करना चाहिए और बिहार की जनता की सुरक्षा के लिए ठोस कदम उठाने चाहिए।

आम जनता में चिंता का माहौल 

इन घटनाओं का असर अब आम लोगों पर भी दिखने लगा है। बढ़ते अपराध और जहरीली शराब के डर से नागरिकों के बीच चिंता और असुरक्षा का माहौल है। जानकारों का कहना है कि यदि सरकार ने कानून-व्यवस्था और शराबबंदी के मोर्चे पर जल्द ही कोई निर्णायक कार्रवाई नहीं की, तो यह आगामी चुनावों में एक बड़ा राजनीतिक मुद्दा बन सकता है।