महिला सशक्तिकरण की ओर बड़ा कदम: बिहार के सभी 129 अधिवक्ता संघों में महिलाओं को मिलेगा 33% आरक्षण

बिहार स्टेट बार काउंसिल ने सुप्रीम कोर्ट के आदेश के बाद राज्य के सभी वकील संघों के चुनाव में महिला अधिवक्ताओं के लिए 33% सीटें आरक्षित करने का निर्देश दिया है।

महिला सशक्तिकरण की ओर बड़ा कदम: बिहार के सभी 129 अधिवक्ता संघ

Patna - सुप्रीम कोर्ट के ऐतिहासिक आदेश के बाद बिहार के कानूनी जगत में एक बड़ा बदलाव होने जा रहा है। बिहार स्टेट बार काउंसिल ने राज्य के सभी एडवोकेट एसोसिएशनों के चुनाव में महिला वकीलों के लिए एक-तिहाई (33%) सीटें आरक्षित करने का कड़ा निर्देश जारी किया है। काउंसिल के अध्यक्ष और वरीय अधिवक्ता रमाकांत शर्मा ने बताया कि यह निर्णय सुप्रीम कोर्ट के आदेश और हाई कोर्ट से प्राप्त पत्र के आलोक में लिया गया है।

सुप्रीम कोर्ट के आदेश का अनुपालन

बिहार स्टेट बार काउंसिल के अध्यक्ष रमाकांत शर्मा ने स्पष्ट किया कि न्यायपालिका के शीर्ष स्तर से आए दिशा-निर्देशों के बाद अब वकील संघों के लोकतांत्रिक ढांचे में महिलाओं की भागीदारी सुनिश्चित की जाएगी। हाल ही में काउंसिल की एक महत्वपूर्ण बैठक आयोजित की गई, जिसमें सर्वसम्मति से यह तय किया गया कि भविष्य में होने वाले सभी चुनावों में कुल सीटों का एक-तिहाई हिस्सा महिला अधिवक्ताओं के लिए आरक्षित रहेगा।

निर्वाची पदाधिकारी की पहल और निर्णय

इस निर्णय की पृष्ठभूमि में पटना हाई कोर्ट एडवोकेट एसोसिएशन के चुनाव के निर्वाची पदाधिकारी और वरीय अधिवक्ता अंजनी कुमार की महत्वपूर्ण भूमिका रही। उन्होंने काउंसिल को पत्र भेजकर आरक्षण के कार्यान्वयन पर दिशा-निर्देश मांगे थे। इस पत्र पर विचार करते हुए काउंसिल ने आरक्षण के प्रतिशत को स्पष्ट किया और इसे लागू करने के लिए एसोसिएशन को आधिकारिक पत्र भी भेज दिया है।

129 संघों में लागू होगी नई व्यवस्था

यह नियम केवल पटना हाई कोर्ट तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि बिहार के सभी 129 अधिवक्ता संघों (Bar Associations) पर समान रूप से लागू होगा। काउंसिल के अनुसार, इस कदम से जिला अदालतों से लेकर हाई कोर्ट तक महिला वकीलों को नेतृत्व की भूमिका में आने का अवसर मिलेगा। इससे बार एसोसिएशन के प्रबंधन और निर्णय लेने की प्रक्रियाओं में लैंगिक समानता (Gender Equality) सुनिश्चित हो सकेगी।

सशक्तिकरण की दिशा में मील का पत्थर

अध्यक्ष रमाकांत शर्मा ने इस निर्णय को 'महिला सशक्तिकरण' की दिशा में एक क्रांतिकारी कदम बताया है। कानून के क्षेत्र में महिला अधिवक्ताओं की बढ़ती संख्या को देखते हुए उन्हें संगठनात्मक चुनाव में प्रतिनिधित्व देना समय की मांग थी। जानकारों का मानना है कि इस आरक्षण से बार एसोसिएशनों की कार्यप्रणाली अधिक समावेशी बनेगी और महिला वकीलों की समस्याओं को प्रमुखता से मंच मिल सकेगा।