Bihar News : फैक्टनेब के बैनर तले शिक्षकों कर्मियों ने MLC जीवन कुमार के आवास का किया घेराव, मांगों को लेकर सौंपा ज्ञापन
Bihar News : शिक्षक एवं शिक्षकेतर कर्मचारियों ने अपने वर्षो पुरानी लंबित मांगों को लेकर MLC जीवन कुमार के आवास संख्या का घेराव किया. इस मौके अपनी समस्याओं के सम्बंध में विस्तृत ज्ञापन दिया.....पढ़िए आगे
PATNA : बिहार राज्य संबद्ध डिग्री कॉलेज शिक्षक एवं शिक्षकेतर कर्मचारी महासंघ (फैक्टनेब) के बैनर तले मगध और वीर कुंवर सिंह विश्वविद्यालय इकाई से जुड़े सैकड़ों कर्मचारियों ने अपनी वर्षों पुरानी लंबित मांगों को लेकर जोरदार प्रदर्शन किया। गया, जहानाबाद, औरंगाबाद, अरवल, भोजपुर, रोहतास, बक्सर और भभुआ जिलों से आए शिक्षकों एवं कर्मचारियों ने गया शिक्षक निर्वाचन क्षेत्र के विधान पार्षद (MLC) जीवन कुमार के सरकारी आवास (संख्या 09, आर-ब्लॉक) को घंटों घेरे रखा। प्रदर्शनकारियों ने अपनी प्रमुख मांगों, जैसे—नियमित वेतनमान, पेंशन और पिछले आठ वर्षों के बकाया अनुदान के भुगतान को लेकर सरकार और विधानसभा पर दबाव बनाने के लिए MLC को एक विस्तृत ज्ञापन सौंपा।
यह विरोध प्रदर्शन फैक्टनेब के प्रदेश अध्यक्ष शंभू नाथ सिन्हा, मगध विश्वविद्यालय के अध्यक्ष प्रोफेसर विजय कुमार मिट्ठू और वीर कुंवर सिंह विश्वविद्यालय के अध्यक्ष शंभू सिंह के संयुक्त नेतृत्व में आयोजित किया गया। इस कार्यक्रम में प्रो. नवल किशोर शर्मा, डॉ. अरविंद कुमार, प्रो. शत्रुघ्न प्रसाद, डॉ. अनिल कुमार सिन्हा, प्रो. शिव कुमार सिंह, प्रो. प्रीत कुमार सिंह, प्रो. ब्रजेश शर्मा, प्रो. मदन कुमार, प्रो. मोहम्मद एहसान, धर्मेंद्र कुमार, संटू सिंह, अभिषेक कुमार, सौरभ कुमार, प्रो. शालिग्राम मिश्रा और प्रो. शशि भूषण कुमार सहित बड़ी संख्या में शिक्षक व कर्मचारी शामिल हुए।
प्रदर्शन को संबोधित करते हुए संघ के नेताओं ने कहा कि बिहार के संबद्ध डिग्री कॉलेजों के शिक्षक और कर्मचारी पिछले 40 वर्षों से अपने नियमित वेतनमान और पेंशन के अधिकार के लिए संघर्ष कर रहे हैं। उन्होंने याद दिलाया कि उच्च न्यायालय की सिंगल और डबल बेंच दोनों ने राज्य सरकार तथा मुख्य सचिव के नेतृत्व में गठित समिति को तीन महीने के भीतर सरकारी कॉलेजों की तर्ज पर नियमित वेतनमान और पेंशन प्रदान करने का स्पष्ट आदेश दिया था। हालांकि, अदालती आदेशों के बावजूद राज्य सरकार के रवैये में कोई बदलाव नहीं आया है और वह इस मुद्दे पर पूरी तरह से उदासीन बनी हुई है।
नेताओं ने तीखे लहजे में कहा कि अदालती निर्देशों की अनदेखी से कर्मचारियों में भारी आक्रोश है। सरकार के ढुलमुल रवैये के कारण हजारों शिक्षक व शिक्षकेतर कर्मचारी गंभीर आर्थिक तंगी और अनिश्चितता के दौर से गुजर रहे हैं। आठ वर्षों से अनुदान न मिलने और नियमित वेतनमान लागू न होने से उनके सामने जीवन-यापन का संकट गहरा गया है, जिसे अब और बर्दाश्त नहीं किया जाएगा।
संघ के प्रतिनिधियों ने स्पष्ट किया कि फैक्टनेब के साथी अपने-अपने शिक्षक निर्वाचन क्षेत्र के विधान पार्षदों के जरिए सरकार पर अंतिम दबाव बना रहे हैं। उन्होंने हुंकार भरते हुए कहा कि जब तक उनकी सभी मांगें पूरी नहीं हो जातीं और उन्हें सरकारी कॉलेजों के समान दर्जा व सुविधाएं नहीं मिल जातीं, तब तक उनका यह आंदोलन थमेगा नहीं और इसे चरणबद्ध तरीके से जारी रखा जाएगा।
मनोज की रिपोर्ट